श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, सर्वे की दी मंजूरी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 Dec 2023, 12:00 AM | Updated: 14 Dec 2023, 12:00 AM

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह परिसर के सर्वेक्षण पर बड़ा फैसला दिया है और इस फैसले के तहत हिंदू पक्ष की जीत हुई है. दरअसल, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका को स्वीकार कर लिया है. और हाईकोर्ट ने शाही ईदगाह परिसर के कोर्ट कमीशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही ईदगाह कमेटी और वक्फ बोर्ड की दलीलों को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.

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कोर्ट ने दिया सर्वेक्षण का फैसला 

जानकारी के अनुसार, ये विवाद कई साल पुराना है और इस विवाद को लेकर ‘भगवान श्री कृष्ण विराजमान’ और वकील हरि शंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, प्रभाष पांडे और देवकी नंदन के याचिका दायक की थी. वहीँ  इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाही ईदगाह के सर्वे को मंजूरी दी है. हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की तरफ से शाही ईदगाह परिसर का कोर्ट कमीशन नियुक्त करके सर्वे की मांग को मान लिया है. पिछले सप्ताह हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई पूरी की थी लेकिन फैसला सुरक्षित रख लिया गया था जिसके बाद अब इस मामले पर फैसला दिया है.

कोर्ट में दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि भगवान श्री कृष्ण का जन्मस्थान मस्जिद के नीचे है. ऐसी कई निशानियां हैं जो बताती हैं कि मस्जिद एक हिंदू मंदिर था. वहीं याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि निर्देश के साथ एक आयोग नियुक्त किया जाए, जो एक निर्धारित समय के अंदर सर्वे कर अपनी रिपोर्ट पेश करे. पूरे कार्यक्रम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए दिशा-निर्देश भी दिए जाएं. जिसे अब हाईकोर्ट ने मान लिया है.

जानिए क्या है पूरा विवाद 

आपको बता दें, ये मामला 13.37 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है. इस जमीन के 11 एकड़ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनी है. वहीं, 2.37 एकड़ हिस्सा शाही ईदगाह मस्जिद के पास है. हिंदू पक्ष का दावा है ये पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि की है. वहीँ इस विवाद की शुरुआत लगभग 350 साल पहले हुई थी, जब दिल्ली की गद्दी पर औरंगजेब का शासन हुआ करता था. 1670 में औरंगजेब ने मथुरा की श्रीकृष्ण जन्म स्थान को तोड़ने का आदेश दिया और इसके बाद इसी जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई. वहीँ बाद में मराठों से हराने के बाद यहां पर मंदिर बना.

इसी बीच 19वीं सदी में अंग्रेज मथुरा पहुंचे और 1815 में इस जमीन को नीलाम कर दिया. वहीं करीब 100 साल तक जगह ऐसे ही खाली रही और इसे लेकर विवाद शुरू हो गया. मुस्लिम पक्ष का कहना था कि इस जमीन में मुस्लिम पक्ष का भी हिस्सा था. वहीं इस विवाद को कोर्ट पहुंचा औ अब कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर रही है.

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