Hardeep Puri-Epstein Links: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri और उनकी बेटी हिमायनी पुरी को लेकर इन दिनों सियासी और सोशल मीडिया हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं। मामला अमेरिका में जारी एक “Unclaimed Property” नोटिस से जुड़ा है, जिसमें 8 अप्रैल 2022 को जारी एक प्रकाशन में हिमायनी पुरी का नाम सामने आया। यह नोटिस Massachusetts Mutual Life Insurance Company (MassMutual) की ओर से था।
क्या है ‘अनक्लेम्ड प्रॉपर्टी’ का मामला?
अमेरिका में वित्तीय संस्थाएं समय-समय पर उन खातों या संपत्तियों की सूची जारी करती हैं, जिन्हें लंबे समय तक क्लेम नहीं किया गया। ऐसे मामलों को “Unclaimed Property” कहा जाता है। 2022 के नोटिस में हिमायनी पुरी का नाम शामिल होने के बाद यह सवाल उठा कि आखिर यह संपत्ति क्या है… कैश, बीमा राशि, निवेश या कोई अन्य वित्तीय एसेट?
“NOTICE OF NAMES OF PERSONS APPEARING AS OWNERS OF CERTAIN UNCLAIMED PROPERTY held by MASSACHUSETTS MUTUAL LIFE INSURANCE COMPANY”
8 अप्रैल 2022 को हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को अमेरिका 🇺🇸 स्थित उनकी कौन सी प्रॉपर्टी के लिए लीगल नोटिस दिया गया था?
हिमायनी पुरी ने इस… pic.twitter.com/iNRRjJd6Ky— Kunal Shukla (@kunal492001) February 22, 2026
दिलचस्प बात यह है कि 2022 के बाद 2023, 2024 और 2025 के नोटिस में भी उनका नाम सामने आने की बात कही जा रही है। अमेरिकी सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक फरवरी 2026 तक इस कथित संपत्ति को क्लेम नहीं किया गया था।
‘एप्स्टीन कनेक्शन’ को लेकर अटकलें | Hardeep Puri-Epstein Links
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस मामले को अमेरिकी वित्तीय अपराधी Jeffrey Epstein से जोड़ने की कोशिश की है। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह संपत्ति किसी ऐसे नेटवर्क से जुड़ी है, जिसके कारण इसे क्लेम नहीं किया जा रहा? हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अब तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
जरा इन दस्तावेजों को ध्यान से देखिए.. इस सबके बाद तो हरदीप सिंह पुरी इस्तीफ़ा देना ही चाहिए।
बाप एप्स्टीन को डिजिटल इंडिया समझा रहा था और बेटी एपस्टीन के आदमी के माध्यम से करोड़ों का फंड ले रही थी..
तो क्या हरदीप सिंह पुरी की बेटी एपस्टीन के करीबी रहे रॉबर्ट मिलर्ड की बिज़नेस… pic.twitter.com/cEOb7pPSEQ
— Kunal Shukla (@kunal492001) February 21, 2026
मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका एप्स्टीन के किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह उससे केवल पेशेवर कारणों से कुछ मौकों पर मिले थे।
फंडिंग और Realm Partners LLC पर सवाल
हिमायनी पुरी का नाम Realm Partners LLC नाम की कंपनी से जुड़ा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि 2014 में इस कंपनी को करीब 28 करोड़ डॉलर (लगभग 2400 करोड़ रुपये) का निवेश मिला और 2014–15 के बीच कुल फंडिंग 5700 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
आलोचकों का सवाल है कि इतनी बड़ी रकम किन निवेशकों से आई और क्या उन निवेशकों की सूची सार्वजनिक की जाएगी? साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कंपनी का रजिस्ट्रेशन केमेन आइलैंड्स जैसे टैक्स हेवन में है, जिससे संदेह और गहरा रहा है। हालांकि ऑफशोर रजिस्ट्रेशन अपने आप में अवैध नहीं होता, लेकिन पारदर्शिता को लेकर बहस जरूर छिड़ गई है।
रॉबर्ट मिलर्ड और अन्य नामों पर चर्चा
कुछ पोस्ट्स में अमेरिकी कारोबारी Robert Millard और Joi Ito का नाम भी जोड़ा गया है। यह दावा किया जा रहा है कि ये लोग एप्स्टीन के करीबी थे और किसी कारोबारी कड़ी के जरिए हिमायनी पुरी तक पहुंचे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री का पक्ष
हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि एप्स्टीन से उनकी मुलाकातें केवल पेशेवर दायरे में थीं और वह अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े कार्यक्रमों के सिलसिले में हुई थीं। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी आपराधिक गतिविधि से उनका कोई संबंध नहीं है।
पुरी ने यह भी कहा कि उन्हें एप्स्टीन की निजी गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।
RTI बनाम FOIA की बहस
इस पूरे विवाद में सूचना के अधिकार को लेकर भी चर्चा तेज है। भारत में जहां RTI कानून है, वहीं अमेरिका में इसे Freedom of Information Act (FOIA) के नाम से जाना जाता है। कुछ लोग अमेरिकी रिकॉर्ड्स के जरिए और जानकारी सामने लाने की बात कर रहे हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल इस मामले में कई सवाल अनुत्तरित हैं:
- अनक्लेम्ड प्रॉपर्टी वास्तव में किस प्रकार की है?
- उसे अब तक क्लेम क्यों नहीं किया गया?
- निवेशकों की सूची सार्वजनिक होगी या नहीं?
राजनीतिक माहौल में यह मुद्दा गर्म है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और तथ्यों का इंतजार जरूरी है। आरोप और प्रत्यारोप के बीच सच्चाई क्या है, यह आने वाले समय में ही साफ होगा।































