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गुरु अर्जुन देव जी की माता के नाम पर पड़ा है तरनतारन के इस मशहूर गुरुद्वारे का नाम

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 03 Nov 2023, 12:00 AM | Updated: 03 Nov 2023, 12:00 AM

Gurudwara Shri Kuh Bibi Bhani – आज तक हम सिख धर्मं के गुरुओं के बारे में बात करते आए है, लेकिन आज हम एक ऐसी सिख महिला के बारे में बात करेंगे, जिनकी सिख धर्म में मुख्य भूमिका रही है. जिस महिला का पिता भी सिख गुरु था, पति भी सिख गुरु था और बेटा, पौता, परपौता तक सिख गुरु था. इस सिख महिला का नाम बीबी भानी जी है, जिनका जन्म सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमरदास जी और माता मनसा देवी जी के घर हुआ 19 जनवरी 1535 को अमृतसर जिले में हुआ था.

बचपन से ही प्रभु सेवा में लीन रहने वाली लडकी बीबी भानी जी ने अपने पिता गुरु अमरदास जी की सेवा करके यह सिद्ध किया कि बेटियां भी बेटों से कम नहीं होती है. बीबी भानी जी जी को सिखों की महत्वपूर्ण महिलाओं में गिना जाता है. इनके आचार- विचार इनके बेटों में आईये. बीबी भानी जी जी ने अपना सारा जीवन किसी सिख गुरुओं के साथ रही है. दोस्तों, आईये आज हम आपको बीबी भानी जी की याद में बनाए गए गुरुद्वारा श्री कुह बीबी भानी जी, तरनतारन के बारे में आपको बताएंगे.

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माता बीबी भानी जी की कहानी 

माता बीबी भानी जी एकमात्र विशेषाधिकार प्राप्त इंसान है, जिन्होंने अपने पिता श्री गुरु अमर दास जी की सच्ची भावना से पूजा और आराधना की और वह उनकी महान पुत्री-शिष्या थीं. गुरु अमर दास जी द्वारा उनकी समर्पित सेवा के सम्मान में बीबी भानी जी को महान वरदान दिए गए, जिसमे उनके पुत्र को गुरुपद मिलने का वरदान था. जिसके बाद बीबी भानी जी के दो भाई, भाई मोहन जी और भाई मोहरी जी गुरु पद पर नहीं बैठ सके क्योंकि उनके पति भाई जेठा गुरु रामदास का नाम लेकर चौथे गुरु बने.

Gurudwara Shri Kuh Bibi Bhani – खास बात ये है कि बीबी भानी जी के दो बड़े बेटों को उनके मामाओं की तरह दरकिनार हो गए और उनके सबसे छोटे भाई ( गुरु अर्जन देव) को गुरुपद मिला. बीबी भानी जी पति श्री गुरु राम दास जी से प्यार करती थी और उनकी पूजा करती और उनकी सेवा में करती रही. बीबी भानी जी अपने पवित्र बच्चे और पुत्र श्री गुरु अर्जन साहिब से प्यार करती थी, उनका पालन-पोषण करती थी.

Kuh Bibi Bhani Ji
Source – Google

आज बीबी भानी जी को सेवा के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है, सिख इतिहास में उन्हें सेवा की प्रतिमूर्ति के रूप में जाना जाता है. इन्होने अपनी आखरी साँस 9 अप्रैल 1598  में ली थी. जिनकी याद में पंजाब के तरनतारन नाम की जगह में गुरु अर्जुन देव जी ने बीबी भानी जी की याद में एक कुआ बनवाया. जहाँ अब एक गुरुद्वारा भी है. यह गुरुद्वारा बीबी भानी जी की याद में बनवाया गया था. जिससे हम गुरुद्वारा श्री कुह बीबी भानी जी के नाम से जाना जाता है.

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