Guru Ka Bagh: एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी.. जो फूलो का व्यापार करते है उनके हाथों में खूश्बू खुद ही आने लगती है। कुछ ऐसा ही है सिख गुरुओ का सानिध्य। सिखों के दसो गुरुओं को ओमकार ईश्वर ने चुना था.. जो परिवारवाद पर नहीं बल्कि आध्यात्मिकता और मानवता की शक्ति पर चुने गए थे। लेकिन सिख गुरुओ के सानिध्य में जो भी रहे, वो भी पूरी तरह से अध्यात्मिक होते चले गए.. जैसे कि भाई मरदाना, या फिर गुरु नानक देव जी की बहन बीबी नानकी। आदि गुरु साहिब जहां भी गए।
संतान श्रीचंद जी गोद दे दिया
वहां उन्होंने अपनी भक्ति शक्ति दिखाई…उनकी बातें उनका तेज इतना था कि बड़े से बड़े सिद्ध संत, सूफी उनके आगे नतमस्तक हो जाया करते थे.. ये उनके प्रभाव की ही देन थी कि संतानहीन बीबी नानकी को न केवल उन्होंने अपनी बड़ी संतान श्रीचंद जी गोद दे दिया बल्कि बहन की उनके दूर जाने की तकलीफ न हो इसलिए उनके घर के पास ही अपना घर बनाया..जिन्हें आज गुरु का बाग कहा जाता है। अपने इस लेख में हम जानेंगे कैसे गुरु का बाग आदि गुरु से ज्यादा उनकी बहन के लिए खास था। औऱ कितने स्थान है गुरु के बाग के नाम से प्रचलित।
गुरु साहिब के अंदर छिपे अध्यात्मिक ज्ञान
कहा जाता है कि जब गुरु साहिब की बड़ी बहन बीबी नानकी जो कि गुरु साहिब से करीब 5 साल बड़ी थी, उनकी शादी मात्र 11 साल की उम्र में ही जय राम जो कि एक पाल्टा खत्री थे और दिल्ली सल्तनत के लाहौर के गवर्नर दौलत खान की सेवा में एक ‘मोदीखाना’ यानि की राजस्व जमा किये जाने वाले गोदाम में कार्य करते थे। गुरू साहिब की बहन ही वो पहली महिला थी जिन्होंने गुरु साहिब के अंदर छिपे अध्यात्मिक ज्ञान को पहचाना था.. इतना ही नहीं उन्होंने गुरु साहिब संगत सेवा में लगे रहे औऱ अपने मन का करें इसके लिए अपने छोटे भाई को भी अपने पास सुल्तानपुर बुला लिया।
खत्री समुदाय से अलग होकर सिक्खी की राह पर चली
उस वक्त वो 15 साल के थे। वो गुरु साहिब की रक्षा एक मां की तरह करती थी. और उन्होंने ही माता सुलख्नी से गुरु साहिब का विवाह कराया था। लेकिन उन्होंने कभी भी गुरु साहिब को संगत सेवा से नहीं रोका.. कहा जाता है कि गुरु साहिब के प्रति वो इतनी निष्ठावान थी कि गुरु साहिब की पहली शिष्या भी वहीं बनी थी। यानि की खत्री समुदाय से अलग होकर वो पहली थी जो सिक्खी की राह पर चली थी। लेकिन ये उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख था कि वो आजीवन निसंतान रही.. लेकिन गुरु साहिब उनके लिए संतान के समान थे.. जब तक गुरु साहिब की शादी नहीं हुई तब तक वो अपनी बहन के साथ ही रहते थे।
लेकिन जैसे ही उनकी शादी हुई, बीबी नानकी ने गुरु साहिब को उनकी पत्नी समेत पड़ोस के घर में रहने के लिए जगह दिला दी.. प्राणों से भी प्यारे भाई का घर सुख और शांति के साथ बसें इसके लिए उन्होंने खुद अपने भाई को अपने घर से अलग किया था.. लेकिन वो उन्हें दूर नहीं कर सकती थी.. इसलिए पास की गली में उनके रहने की व्यवस्था कर दी। गुरु साहिब की दो संताने हुई.. जिनका जन्म बीबी नानकी के सामने ही हुआ थी.. अपने भाई के बच्चों को वो अपनी संतीन की तरह चाहती थी।
लेकिन जब वो उदासी के लिए जाने लगे तो वो जानते थे कि बहन उनसे बिछड़ना नहीं सह पायेगी, इसलिए बड़े बेटे को उन्हें गोद दे दिया। करीब 1 साल तक वो बीबी नानकी के पास ही रहे थे। वो अपनी मां और बुआ..दोनो के यहां रहते थे। कहते है कि बीबी नानकी ने गुरु साहिब को जिस स्थान पर रहने भेजा था, उस स्थान को गुरु का बाग कहा जाता है। यहीं गुरु साहिब के दोनो बच्चें हुए थे औऱ उदासी परंपरा के संस्थापक बाबा श्रीचंद तप किया करते थे। गुरु साहिब के परिवार से जुड़ा ये स्थान पवित्र गुरु का बाग बन गया।
गुरुद्वारा गुरु का बाग की कहानी
इसके अलावा नौवे गुरु गुरु तेगबहादुर से जुड़ा पटना का गुरुद्वारा गुरु का बाद सिख धर्म में काफी प्रचलित है, कहा जाता है कि जब नौवे गुरु असम की यात्रा से लौट रहे थे, तब पटना में रूके थे, जिस बाग में वो रूके थे वो पूरी तरह से सूख चुका था.. कलीम बक्श और रहीम बक्श नाम के दो नवाब इस बाग के मालिक थे, लेकिन जैसे ही गुरु साहिब के चरण इस स्थान पर पड़े, ये बाग हरा भरा हो गया.. ये सुनकर नवाब वहां पहुंचे और गुरु साहिब के सामने नतमस्तक हो गए.. गुरु साहिब ने बड़े प्यार से पूछा कि ये बाग किसका है। जिसपर नवाब ने जवाब दिया कि ये बाग गुरु का है।
वहीं बाग में मौजूद कुआं जो पूरी तरह से दूषित हो गया था, नवाबों ने उसके जल को पवित्र करने की अपील की.. जिस पर गुरु साहिब ने अपना कड़ा कुएं में डाल दिया जिससे पानी पूरी तरह से पवित्र हो गया.. कहा जाता है कि आज भी जो भी व्यक्ति इसके जल से स्नान करता है वो पूरी तरह से रोगो से मुक्त हो जाता है। ये गुरुद्वारा पटना साहिब की तख्त श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा से करीब 3 किलोमीटर दूर दीदारगंज बाजार समिति रोड पर स्थित है। आज यहां भव्य गुरुद्वारा है। जो गुरु साहिब के महान शख्सियत की कहानी कहता है.. जिसने नवाबों को भी झुकने पर मजबूर कर दिया था।




























