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Ghaziabad News: थानेदार का अनोखा टेस्ट! पीठ पर मोबाइल रखा और बिहार के युवक को बताया बांग्लादेशी, वीडियो से मचा बवाल

Nandani | Nedrick News

Published: 02 Jan 2026, 02:56 PM | Updated: 02 Jan 2026, 02:58 PM

Ghaziabad News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के नाम पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कौशांबी थाना क्षेत्र के भोवापुर के पास स्थित एक स्लम एरिया का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पुलिस एक युवक की पीठ पर कथित तौर पर “मशीन” लगाकर यह दावा करती दिख रही है कि वह भारतीय नहीं, बल्कि बांग्लादेशी नागरिक है। वहीं युवक पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए खुद को बिहार के अररिया जिले का निवासी बता रहा है।

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23 दिसंबर का वीडियो, अब आया सामने (Ghaziabad News)

यह वीडियो 23 दिसंबर का बताया जा रहा है, जो अब सामने आया है। वीडियो में कौशांबी थाने के SHO अजय शर्मा नजर आ रहे हैं। वह युवक की पीठ पर अपना मोबाइल फोन रखते हुए उसे मशीन बता रहे हैं और उसी के आधार पर उससे सवाल-जवाब कर रहे हैं। SHO यह कहते सुनाई देते हैं कि मशीन से जांच करने पर युवक भारतीय नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम ने लोगों को हैरान कर दिया है और सोशल मीडिया पर पुलिस की जमकर आलोचना हो रही है।

स्लम एरिया में चल रही थी नागरिकता जांच

जानकारी के मुताबिक, 23 दिसंबर को कौशांबी थाने के इंचार्ज अजय शर्मा पुलिस और RAF के जवानों के साथ स्लम एरिया में पहुंचे थे। यहां रहने वाले लोगों से उनकी पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा गया। इसी दौरान एक युवक और उसके परिवार के सदस्य अपने पहचान पत्र लेकर सामने आए। परिवार का कहना था कि वे सभी बिहार के अररिया के रहने वाले हैं।

परिवार के दस्तावेज देखने के बावजूद SHO ने उन्हें बांग्लादेशी बताना शुरू कर दिया। युवक और उसके साथ मौजूद महिलाओं ने बार-बार खुद को भारतीय नागरिक बताया, लेकिन पुलिस अधिकारी अपनी बात पर अड़े नजर आए।

वीडियो वायरल होते ही पुलिस सफाई में उतरी

वीडियो सामने आने के बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सफाई दी। उन्होंने लिखा कि अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस समय-समय पर झुग्गी-झोपड़ी और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले लोगों से पूछताछ करती है और उनके दस्तावेजों की जांच करती है। उनके मुताबिक, कौशांबी पुलिस भी इसी प्रक्रिया के तहत लोगों की पहचान कर रही थी।

हालांकि पुलिस कमिश्नर की इस सफाई से लोगों की नाराजगी कम होती नहीं दिख रही। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या नागरिकता जांच का ऐसा कोई वैध और वैज्ञानिक तरीका है, जिसमें मोबाइल फोन को मशीन बताकर पीठ पर लगाया जाए।

पहले भी विवादों में रहे हैं SHO अजय शर्मा

यह पहला मौका नहीं है जब कौशांबी थाना प्रभारी अजय शर्मा विवादों में आए हों। जून 2022 में मेरठ के पल्लवपुरम थाने में उनके खिलाफ एक महिला ने रेप का मुकदमा दर्ज कराया था। उस वक्त वह दरोगा के पद पर तैनात थे। हालांकि बाद में उस मामले में एफिडेविट के आधार पर आरोप सही नहीं पाए गए थे।

इसके अलावा, मेरठ के SSP ऑफिस में रीडर रहते हुए भी अजय शर्मा का नाम कई बार विवादों से जुड़ा रहा है। अब इस नए वीडियो के सामने आने के बाद एक बार फिर उनके व्यवहार और कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

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