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कफ सिरप केस में Dhananjay Singh क्यों चर्चा में: अमित-आलोक से रिश्ते क्या, सपा क्यों हमलावर?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 Dec 2025, 12:00 AM | Updated: 09 Dec 2025, 12:00 AM

Dhananjay Singh: योगी सरकार के ‘ऑपरेशन क्लीन’ अभियान ने उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप यानी फेंसिडिल के देश के सबसे बड़े अवैध नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। यह नेटवर्क केवल यूपी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका फैलाव झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए सीधे बांग्लादेश तक था। अब तक इस नेटवर्क से जुड़ी 40 जिलों में 128 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, 3.50 लाख से ज्यादा शीशियां जब्त की जा चुकी हैं और 1166 ड्रग लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

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इस पूरे नेटवर्क में शामिल 6 बड़े चेहरे और 68 अन्य लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। नेटवर्क का किंगपिन शुभम जायसवाल अपने पार्टनरों के साथ दुबई में छिपा है। अमित सिंह टाटा और एसटीएफ से बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा सुर्खियों में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह का नाम आ रहा है, जबकि किसी भी एफआईआर में उनका नाम दर्ज नहीं है।

कैसे खुला कोडीन कफ सिरप के नेटवर्क का राज? (Dhananjay Singh)

इस नेटवर्क का पहली बार भंडाफोड़ 18 अक्टूबर को सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र में हुआ। उस समय दीपावली को लेकर सड़कों पर वाहनों की सघन चेकिंग चल रही थी। एक्साइज विभाग के साथ पुलिस की संयुक्त टीम ट्रकों और बड़े वाहनों की तलाशी ले रही थी।

इसी दौरान एक ट्रक को रोका गया, जो त्रिपुरा की ओर जा रहा था। ट्रक में ऊपर से देखने पर नमकीन भरी हुई दिखाई दे रही थी। ड्राइवर के पास भी सिर्फ नमकीन के बिल थे। लेकिन जब ट्रक की गहराई से तलाशी ली गई तो नमकीन के बीच बड़ी संख्या में फेंसिडिल कफ सिरप की शीशियां छिपाकर रखी गई थीं।

पुलिस ने मौके से 1.19 लाख शीशियां जब्त कीं, जिनकी कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपए आंकी गई। ट्रक ड्राइवर हेमंत पाल, बृजमोहन शिवहरे और ट्रांसपोर्टर रामगोपाल धाकड़ को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। त्योहार की वजह से तीनों को बिना लंबी पूछताछ के जेल भेज दिया गया।

जेल में खुला पूरा नेटवर्क

दीपावली के बाद जब पुलिस ने तीनों आरोपियों से जेल में दोबारा पूछताछ की, तब बड़ा खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि यह कफ सिरप गाजियाबाद से लोड की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मेरठ से सौरभ त्यागी को गिरफ्तार किया। यहीं से वसीम और आसिफ का नाम सामने आया।

पूछताछ के आधार पर पुलिस ने रांची से एक ट्रक और गाजियाबाद से चार अन्य ट्रक जब्त किए। यहां ट्रकों में चूने, धान और चावल की बोरियों के बीच कफ सिरप छिपाई गई थी। इसी चरण में पहली बार दुबई में बैठे शुभम जायसवाल का नाम सामने आया, जो इस पूरे नेटवर्क का मास्टर कनेक्टर निकला।

एबॉट कंपनी की फेंसिडिल और पुराना विवाद

जब्त की गई सभी कफ सिरप 100 एमएल वाली एबॉट कंपनी की फेंसिडिल थीं। यह वही कंपनी है, जिसकी दवा पहले भी नशे के रूप में इस्तेमाल को लेकर विवादों में रही है। 2024 में भी यूपी सरकार ने फेंसिडिल और कोडीन युक्त अन्य दवाओं को लेकर बड़ी कार्रवाई की थी। उस समय यूपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक नशे के रूप में दवाओं के अवैध उपयोग की शिकायतें मिल रही थीं।

इसके बाद 12 फरवरी 2024 को एसटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त जांच टीम बनाई गई थी। लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी में उस समय बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसमें धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। अब सोनभद्र कांड के बाद वही फाइल दोबारा खुल गई है।

दवा प्रतिबंधित नहीं, फिर तस्करी कैसे?

सोनभद्र के एसपी अभिषेक वर्मा ने इस पूरे खेल की असली तकनीक का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि फेंसिडिल कफ सिरप प्रतिबंधित दवा नहीं है। इसे डॉक्टर के पर्चे पर वैध रूप से बेचा जा सकता है। 100 एमएल की एक शीशी की कीमत करीब 100 रुपए होती है।

लेकिन इस दवा को शराबबंदी वाले प्रदेशों और बांग्लादेश में 5 से 6 गुना ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा था। इसके लिए फर्जी मेडिकल स्टोर, फर्जी फर्म, फर्जी ड्रग लाइसेंस और फर्जी ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। सौरभ जायसवाल के नाम पर संचालित शैली ट्रेडर्स और शिवाक्षा प्राइवेट लिमिटेड से बड़ी मात्रा में यह दवा उन मेडिकल स्टोर के नाम सप्लाई दिखाई गई, जो हकीकत में बंद पड़े थे।

सोनभद्र जिले में एक मेडिकल स्टोर का मालिक पेंटर निकला। उससे कहा गया कि तुम्हारे नाम से फर्म बनाएंगे, तुम्हें पार्टनर रखेंगे। फिर उसकी दुकान दिखाकर फोटो खींची गई, लाइसेंस लिया गया और रोज 20 से 40 लाख रुपए का बैंक ट्रांजैक्शन उसी फर्म के नाम पर दिखाया गया।

कैसे बना शुभम जायसवाल किंगपिन?

कफ सिरप नेटवर्क का असली सरगना मेरठ के सरधना निवासी आसिफ और वसीम निकले, जो फिलहाल दुबई में बैठे हैं। बनारस के शुभम जायसवाल का पहले मेडिकल स्टोर था। लॉकडाउन से पहले एफएसडीए के एक बड़े अधिकारी ने उसकी पहचान आसिफ-वसीम से कराई।

इसी कड़ी से शुभम इस अवैध नेटवर्क में शामिल हुआ और धीरे-धीरे पूरे तंत्र का किंगपिन बन गया। विकास सिंह के जरिए अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह भी इस खेल में कूद पड़े। धनबाद और बनारस में फर्जी दवा फर्म, फर्जी लाइसेंस और कागजों पर करोड़ों का कारोबार दिखाया गया। असल में पूरा पैसा शुभम और उसके गैंग के पास जाता रहा।

हाईटेक तरीके से होता था ऑपरेशन

एसटीएफ की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि शुभम अपने साथियों से फेसटाइम और जंगी ऐप के जरिए बात करता था। ट्रकों की बुकिंग, ट्रांसपोर्ट, जीएसटी पेमेंट सब कुछ डिजिटल तरीके से किया जाता था। उसका सीए तुषार पूरे बीते तीन साल का अकाउंट मैनेज करता था।

एफएसडीए की जांच में सामने आया कि 2023 से 2025 के बीच शैली ट्रेडर्स ने 89 लाख शीशियां खरीदी थीं। इनमें से 84 लाख शीशियां 93 मेडिकल स्टोर को भेजी गईं जो कागजों पर ही मौजूद थे।

40 जिलों में 128 केस, अब ईडी भी मैदान में

एफएसडीए आयुक्त रोशन जैकब के अनुसार, अब तक 40 जिलों में 128 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। वाराणसी, जौनपुर, कानपुर, गाजीपुर, लखीमपुर, लखनऊ, बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ समेत कई जिले इसकी चपेट में आए हैं।

इस केस में 2 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो गई है। ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इस पूरे घोटाले की जांच कर रही है। अनुमान है कि यह कारोबार करीब 2000 करोड़ रुपए का है।

धनंजय सिंह का नाम क्यों चर्चा में?

दिलचस्प बात यह है कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह का नाम किसी भी एफआईआर में दर्ज नहीं है, लेकिन अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह से उनकी नजदीकियों के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

आलोक सिंह का मकान धनंजय सिंह के घर के सामने बना है। दोनों का मकान नंबर 17 दर्शाया गया है। अमित सिंह टाटा की पत्नी की फॉरच्यूनर का नंबर 9777 है, जो धनंजय सिंह के काफिले के नंबर से मेल खाता है।

सपा का हमला और ठाकुर कार्ड

अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव और प्रिया सरोज ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। अखिलेश ने इसे “वन डिस्ट्रिक, वन माफिया” योजना बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा इस मुद्दे को ठाकुर बनाम पीडीए की राजनीति से जोड़कर देख रही है।

खुद धनंजय सिंह ने की सीबीआई जांच की मांग

धनंजय सिंह का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में कई लोगों के साथ फोटो होना स्वाभाविक है। उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने खुद इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

क्या कफ सिरप से मौतें हुई हैं?

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यूपी में अब तक फेंसिडिल से किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। यह वयस्कों की खांसी की दवा है, जिसमें कोडीन फास्फेट होता है। इसका दवा के तौर पर इस्तेमाल सुरक्षित है, लेकिन नशे के रूप में इसका दुरुपयोग हो रहा था।

दुबई से शुभम जायसवाल का वीडियो बयान

शुभम ने वीडियो जारी कर दावा किया कि फेंसिडिल प्रतिबंधित दवा नहीं है। इसका उत्पादन सीबीएन के कोटे के अनुसार होता है। उसने दावा किया कि उसने सभी नियमों के तहत ही दवा बेची है, जबकि एसटीएफ और ईडी उसके दावों को झूठा बता रही हैं।

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