Crude Oil Prices: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते टकराव ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कब्जे में लिए जाने के दावों के बाद अब इसका असर कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला में हालात बिगड़ने से ग्लोबल ऑयल मार्केट में बेचैनी साफ दिख रही है।
वेनेजुएला: तेल का बड़ा केंद्र, लेकिन दबाव में (Crude Oil Prices)
वेनेजुएला उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित क्रूड ऑयल रिजर्व है। हालांकि बीते कुछ वर्षों से अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला की तेल सप्लाई पहले ही सीमित हो चुकी थी। अब अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन और सत्ता को लेकर बने नए हालात ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि तेल उत्पादन और निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ट्रंप का बयान और ऑयल इंडस्ट्री पर दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कब्जे में लिए जाने के बाद वेनेजुएला की ऑयल इंडस्ट्री में अमेरिका की पकड़ और मजबूत होगी। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां अब वहां अहम भूमिका निभाएंगी और वेनेजुएला की कंपनियों को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाया जाएगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अटकलें तेज हो गई हैं कि आने वाले दिनों में तेल व्यापार की दिशा बदल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नरम हैं और करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला जैसे बड़े तेल उत्पादक देश में अनिश्चितता बढ़ने से कीमतों पर दबाव आ सकता है। निवेशक और ट्रेडर्स हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि किसी भी बड़े सप्लाई डिसरप्शन से दाम तेजी से उछल सकते हैं।
PDVSA का दावा और जमीनी हकीकत
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला की सरकारी ऊर्जा कंपनी PDVSA ने कहा है कि शनिवार तक उनका तेल उत्पादन और रिफाइनिंग सामान्य रूप से चल रहा था और अमेरिकी हमलों से उनकी सुविधाओं को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबा खिंचता है तो तेल कंपनियों के लिए काम करना आसान नहीं रहेगा। बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे सप्लाई चेन में रुकावट आना तय माना जा रहा है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत के लिए वेनेजुएला के हालात खास मायने रखते हैं। भारत और वेनेजुएला के रिश्ते लंबे समय से तेल आयात पर आधारित रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2021 और 2022 में भारत का वेनेजुएला से तेल आयात घट गया था। लेकिन 2023-24 में हालात सुधरे और दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम व्यापार फिर से बढ़ा। इस दौरान भारत का वेनेजुएला से तेल आयात करीब 1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
चीन से मुकाबला और आगे की राह
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में भारत कुछ समय के लिए वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी बना था, हालांकि फिलहाल चीन इस सूची में शीर्ष पर है। अगर वेनेजुएला में हालात और बिगड़ते हैं तो भारत समेत कई देशों को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक इसी संकट पर निर्भर करेगी।




























