CM Rekha Gupta: दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक बयान को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे न्यायपालिका का अपमान बताया है। AAP नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने अदालत के फैसलों को लेकर “सेटिंग” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
क्या है पूरा मामला | CM Rekha Gupta
दरअसल, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का एक वीडियो सामने आया है, जो एक टीवी कार्यक्रम के दौरान का बताया जा रहा है। इस वीडियो में वह कथित तौर पर कहती नजर आ रही हैं कि कुछ लोग खुद को “कट्टर ईमानदार” बताकर छूट गए, लेकिन यह एक न्यायिक प्रक्रिया का पहला चरण हो सकता है और आगे भी उन्हें जवाब देना पड़ेगा। इसी दौरान उन्होंने “सेट करके चीजें निकालने” जैसी बात कही, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया।
AAP नेताओं का दावा है कि यह टिप्पणी पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं के पक्ष में आए कोर्ट के फैसलों को लेकर की गई है।
संजय सिंह का हमला, सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग
इस मुद्दे पर AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति अगर यह कहे कि अदालतों के फैसले “सेट” किए जाते हैं, तो यह न्यायपालिका का गंभीर अपमान है।
संवैधानिक पद पर बैठी CM रेखा गुप्ता का बयान घोर आपत्ति जनक है।
वो कह रहीं हैं “@ArvindKejriwal के पक्ष में निर्णय कोर्ट को सेट करके हासिल किया गया है”
इन पर कार्यवाही होनी चाहिए।
इस पूरे मामले में 4.30 PM पर @AamAadmiParty कार्यालय पर PC करूँगा। pic.twitter.com/SuMSiJCDzB— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) March 27, 2026
संजय सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर आज आप कह रही हैं कि फैसले सेट होते हैं, तो क्या पहले हमारे खिलाफ आए फैसले भी आपने सेट करवाए थे?” उन्होंने यह भी कहा कि जिस फैसले में अदालत ने कहा कि आरोप साबित करने लायक सबूत तक नहीं हैं, उसे इस तरह से सवालों के घेरे में लाना बेहद गंभीर बात है।
उन्होंने आगे सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि इस बयान का संज्ञान लिया जाए और मुख्यमंत्री के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि “ऐसे बयान देने वाले व्यक्ति को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।”
आतिशी ने उठाए सवाल
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठाया कि क्या भाजपा न्यायपालिका के बारे में यही सोच रखती है? उन्होंने यह भी कहा कि क्या इस मामले में अवमानना का केस नहीं चलना चाहिए।
सिसोदिया का पलटवार ‘हमारी सेटिंग सच्चाई से है’
पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इस बयान पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हमारी कोई सेटिंग नहीं है, अगर है तो सच्चाई, ईमानदारी और देशभक्ति के साथ है।” उन्होंने आगे कहा कि जो लोग ईमानदारी को समझते ही नहीं, वे इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। एक अन्य पोस्ट में सिसोदिया ने कहा कि अदालतों को “सेट” बताना सिर्फ न्यायपालिका ही नहीं, बल्कि संविधान का भी अपमान है।
रेखा गुप्ता जी! हमारी सेटिंग सच्चाई के साथ है, कट्टर ईमानदारी के साथ है, देश को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाले देशभक्तों के साथ है…
आपको क्या पता ईमानदारी, देशभक्ति, सच्चाई क्या चीज़ होती है। इसलिए आप ‘सत्यमेव जयते’ का मतलब कभी समझ ही नहीं पायेंगी।
जिस तरह आपके एक ही साल के… https://t.co/77GuEjFV4S
— Manish Sisodia (@msisodia) March 27, 2026
सिसोदिया ने सरकार पर हमला करते हुए यह भी कहा कि दिल्ली की जनता मौजूदा शासन से परेशान है और ऐसी राजनीति से लोगों का भरोसा टूटता है।
सौरभ भारद्वाज का तीखा बयान
AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय टीवी पर पूरे न्यायिक सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई फैसला किसी के मनमुताबिक नहीं आता, तो जजों पर इस तरह सवाल उठाना बेहद खतरनाक मिसाल है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती है।
सौरभ ने कार्यक्रम की एंकर पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के बयान पर कोई कड़ा सवाल नहीं पूछा गया, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया।
विवाद क्यों बढ़ा?
इस पूरे विवाद की जड़ “सेटिंग” शब्द को लेकर है। AAP नेताओं का कहना है कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। वहीं भाजपा की ओर से इस पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक और कानूनी असर
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मामला सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा। अगर AAP इस मुद्दे को आगे बढ़ाती है और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होती है, तो यह कानूनी रूप भी ले सकता है। साथ ही, यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली की राजनीति पहले से ही काफी गरम है। ऐसे में इस बयान ने माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है।



























