Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में एक अहम और सख्त कार्रवाई करते हुए सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर एक पुलिस अधिकारी की पत्नी ने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। मामला सामने आने के बाद पहले उन्हें पद से हटाया गया था और अब विभागीय जांच के आधार पर सस्पेंशन का फैसला लिया गया है।
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5 महीने पहले IG पद से हटाए गए थे | Chhattisgarh News
बताया जा रहा है कि करीब पांच महीने पहले ही सरकार ने कार्रवाई करते हुए डांगी को पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद से हटा दिया था। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब शिकायत की जांच में कई अहम बिंदु सामने आए। डांगी 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और लंबे समय से अलग-अलग जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
महिला ने लगाए गंभीर आरोप
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर 2025 को एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का कहना है कि उसकी मुलाकात 2017 में कोरबा में हुई थी, जब डांगी वहां एसपी थे। बाद में दोनों के बीच संपर्क बना रहा और दंतेवाड़ा में पोस्टिंग के दौरान वह उन्हें वीडियो कॉल पर योग सिखाती थीं।
महिला ने आरोप लगाया कि बाद में जब डांगी राजनांदगांव और सरगुजा में आईजी बने, तब उन्होंने उसे परेशान करना शुरू किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वे उसे अपनी पत्नी की गैरमौजूदगी में सरकारी बंगले पर बुलाते थे और मना करने पर उसके पति के ट्रांसफर की धमकी देते थे। पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि उसके पास कई डिजिटल सबूत मौजूद हैं।
आरोपों को अधिकारी ने बताया बेबुनियाद
वहीं, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रतन लाल डांगी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें ही ब्लैकमेल किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि महिला उनसे पैसे मांग रही थी और मानसिक दबाव बना रही थी। डांगी ने यह भी कहा कि वे पिछले तीन साल से पुलिस अकादमी में तैनात हैं और उनके पास तबादला करने का कोई अधिकार नहीं है।
वायरल होने से विभाग की छवि पर असर
सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि इस मामले से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुई, जिससे पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा। ऐसे में मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई जरूरी मानी गई।
नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई
निलंबन आदेश में कहा गया है कि एक वरिष्ठ अधिकारी होने के बावजूद डांगी ने अपने पद के अनुरूप आचरण नहीं किया। उन पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला पाया गया है। आरोपों में पद का दुरुपयोग, नैतिक मर्यादा का उल्लंघन और स्थापित मानकों से हटकर काम करना शामिल है।
जांच समिति का गठन
शिकायत के बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसमें आईजी आनंद छाबड़ा और डीआईजी मिलना कुर्रे शामिल थे। इसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई है।
निलंबन के दौरान ये रहेंगी शर्तें
फिलहाल, निलंबन अवधि के दौरान रतन लाल डांगी को नया रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में रहना होगा। उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा, लेकिन बिना अनुमति वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। यह कार्रवाई अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत की गई है।






























