Chaitra Navratri 2026: घटस्थापना से नवमी तक जानें शुभ तारीख, मुहूर्त और कन्या पूजन का सही दिन!

Nandani | Nedrick News Published: 07 Mar 2026, 12:37 PM | Updated: 07 Mar 2026, 12:37 PM

Chaitra Navratri 2026: इस साल चैत्र नवरात्रि 2026 19 मार्च से शुरू हो रही है। इस दिन श्रद्धालियों द्वारा घटस्थापना की जाती है, जिससे नवरात्रि के नौ दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इसके बाद पूरे नौ दिन माता दुर्गा की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को अत्यंत फलदायी बताया गया है। माना जाता है कि इन दिनों माता की उपासना करने से सभी संकट दूर होते हैं और पूरे नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा सफल होती है।

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घटस्थापना मुहूर्त (Chaitra Navratri 2026)

  • सामान्य घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:52 से 07:43 तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:07 से 12:55 तक

घटस्थापना के दौरान घर में साफ-सफाई करके कलश स्थापित किया जाता है और उसमें मां दुर्गा की पूजा की जाती है। यह नवरात्रि का सबसे शुभ प्रारंभ माना जाता है।

चैत्र नवरात्रि अष्टमी 2026

  • अष्टमी तिथि: 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे से शुरू, 26 मार्च सुबह 11:48 बजे तक
  • सुबह का मुहूर्त: 6:20 – 7:52
  • दूसरा मुहूर्त: 10:56 – 14:01
  • शाम का मुहूर्त: 17:06 – 21:33

इस दिन की खास पूजा मां महागौरी को समर्पित होती है। मां महागौरी को सौभाग्य और विवाह की देवी माना जाता है। मान्यता है कि अविवाहित कन्याएं उनकी श्रद्धा से पूजा करें तो उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाती हैं। इस दिन अपने परिवार की कुल देवी का पूजन करना भी शुभ माना जाता है।

चैत्र नवरात्रि नवमी 2026

  • नवमी तिथि: 26 मार्च सुबह 11:48 से शुरू, 27 मार्च सुबह 10:06 तक
  • मुहूर्त: सुबह 6:18 – 10:56

नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। उनके पूजा करने से व्यक्ति की बुद्धि, विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है। साधना करने वालों को आध्यात्मिक शक्ति और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

कन्या पूजन के लिए अष्टमी और नवमी

चैत्र नवरात्रि में अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन कन्या पूजन के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार, जहां कन्याओं का सम्मान और पूजा होती है, वहां माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। शास्त्रों में लिखा है:

“कुमार्यः पूजिता यत्र तत्र देवी प्रसिद्यति।”
अर्थ: जहां कन्याओं का सम्मान होता है, वहां देवी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं।

Disclaimer: यह जानकारी केवल धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। किसी भी पूजा या उपाय को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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