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Bengaluru bulldozer action: बेंगलुरु बुलडोजर एक्शन पर कांग्रेस सरकार ने 400 घरों को उजाड़ा, अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति का आरोप

Nandani | Nedrick News

Published: 28 Dec 2025, 04:14 PM | Updated: 28 Dec 2025, 04:14 PM

Bengaluru bulldozer action: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कांग्रेस सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। येलहंका इलाके के पास स्थित कोगिलु गांव में सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के नाम पर करीब 400 घरों को बुलडोजर से गिरा दिया गया। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय से जुड़े परिवार प्रभावित हुए हैं, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

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BSWML की अगुवाई में चला बुलडोजर (Bengaluru bulldozer action)

यह कार्रवाई बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) के नेतृत्व में की गई। मौके पर करीब चार जेसीबी मशीनें और लगभग 150 पुलिसकर्मी तैनात थे। प्रशासन का कहना है कि यह पूरा ऑपरेशन कानून के तहत किया गया और किसी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस बल मौजूद रखा गया था।

कड़ाके की ठंड में बेघर हुए सैकड़ों लोग

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि यह कार्रवाई ऐसे वक्त की गई, जब बेंगलुरु में ठंड काफी बढ़ी हुई है। अचानक घर टूट जाने से सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे आ गए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात गुजारने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश करनी पड़ी, जिससे मानवीय पहलू पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

सरकार का पक्ष: अवैध निर्माण था

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे बनी ये बस्तियां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थीं। यह इलाका पहले कचरा डंपिंग साइट के रूप में इस्तेमाल होता था, जो रहने योग्य नहीं है। प्रशासन का दावा है कि कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन कब्जा नहीं हटाया गया, इसलिए मजबूरी में कार्रवाई करनी पड़ी।

स्थानीय लोगों का आरोप: बिना सूचना घर गिराए

वहीं, प्रभावित परिवारों की कहानी इससे अलग है। लोगों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 सालों से यहां रह रहे थे। उनके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी जैसे वैध दस्तावेज हैं, लेकिन जमीन से जुड़े कागजात नहीं हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें किसी तरह की स्पष्ट सूचना नहीं दी गई और पुलिस की मौजूदगी में जबरन घर खाली कराकर बुलडोजर चला दिया गया।

राजनीति गरमाई, विपक्ष ने साधा निशाना

इस कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे कांग्रेस की “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” बताते हुए कड़ी आलोचना की और सोशल मीडिया पर इसे आरएसएस की बुलडोजर नीति से जोड़ दिया। उनका कहना था कि सालों से रह रहे मुस्लिम परिवारों को अचानक बेदखल करना गलत है।

कर्नाटक सरकार का जवाब

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि ‘बुलडोजर जस्टिस’ और कानून के तहत अवैध कब्जा हटाने में फर्क है। सरकार प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी ठहरने, खाने और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करेगी। वहीं डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने साफ किया कि यह कार्रवाई लैंड माफिया के खिलाफ थी और बाहरी नेताओं को बिना पूरी जानकारी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

CPI(M) का समर्थन

सीपीआई (एम) ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है। पार्टी ने कहा कि कड़ाके की ठंड में लोगों को बेघर करना अमानवीय है और वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। इसके साथ ही इलाके में स्लम एंटी-डेमोलिशन कमेटी बनाने की घोषणा भी की गई है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

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