UGC Regulations 2026: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे के पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं UGC के नए नियम, जिन्हें वे जनरल कैटेगरी के छात्रों के अधिकारों के खिलाफ मानते हैं, और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार। अग्निहोत्री का कहना है कि ये दोनों घटनाएं केवल प्रशासनिक या शैक्षणिक निर्णय नहीं हैं, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की गरिमा और अधिकारों से जुड़ी हुई हैं।
इस्तीफे के पीछे अग्निहोत्री की दलीलें (UGC Regulations 2026)
अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि उनका कदम ब्राह्मण समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की चुप्पी और नेताओं की मौन नीति ने समाज के विश्वास को झकझोर दिया है। अग्निहोत्री ने सभी ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से अपील की है कि वे भी इस्तीफा दें और जनता के साथ खड़े हों।
उन्होंने कहा कि UGC के नए नियम एकतरफा हैं और छात्रों के करियर व व्यक्तिगत जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं। उनका आरोप है कि समाज के जनप्रतिनिधि मौन रहकर उच्च वर्ग के छात्रों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष किया कि नेता किसी कॉर्पोरेट कंपनी के कर्मचारियों की तरह आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
UGC का नया नियम: उद्देश्य और आलोचना
UGC ने हाल ही में देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में Equal Opportunity Centre, Equity Committee, 24×7 हेल्पलाइन और Equity Squads का गठन अनिवार्य कर दिया है। आयोग का दावा है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है।
UGC के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से 2025 के बीच भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामले भी इन नियमों के पीछे का कारण बताए जा रहे हैं।
हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं। उनका तर्क है कि नियमों में ‘झूठी शिकायत’ पर कार्रवाई का प्रावधान हटा दिया गया है, जिससे कोई भी छात्र या शिक्षक बिना ठोस सबूत के भेदभाव का शिकार हो सकता है। इसके अलावा Equity Committees में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है।
छात्रों में असंतोष और डर
छात्रों का कहना है कि भेदभाव केवल आरक्षित वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के साथ हो सकता है। ऐसे में Equity Committees में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना जरूरी है। छात्रों को डर है कि Equity Squads को दिए गए व्यापक अधिकार और भेदभाव की अस्पष्ट परिभाषा से कैंपस में निगरानी बढ़ जाएगी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
छात्रों का तर्क है कि सामान्य बहस या असहमति को भी भेदभाव के रूप में प्रस्तुत कर कार्रवाई की जा सकती है, जिससे शैक्षणिक माहौल दबावपूर्ण बन जाएगा।
प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद
UGC नियमों के विरोध के बीच प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित बदसलूकी की घटना ने भी मामला गरमाया है। माघ मेला क्षेत्र में उनके शिविर को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रशासन ने स्वामी को नोटिस भेजा और उनके शंकराचार्य पद पर सवाल उठाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि पुलिस और प्रशासन ने उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया, जिसमें उनकी चोटी खींचने का भी आरोप शामिल है। उन्होंने प्रशासन को लिखित शिकायत दी और मांग की कि FIR दर्ज की जाए और शिविर के आसपास स्थायी पुलिस बल तैनात किया जाए।
बता दें, 24 जनवरी की शाम माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-4 में उनके शिविर पर कथित रूप से हमला करने की कोशिश हुई। असामाजिक तत्वों ने शिविर के पास आक्रामक नारेबाजी की। स्वामी ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन से माफी नहीं मिली, तो वह संगम स्नान और अपने शिविर में लौटने से परहेज करेंगे। इस घटना ने संत समाज को दो धड़ों में बांट दिया है, जिसमें कुछ स्वामी का समर्थन कर रहे हैं और कुछ प्रशासन के पक्ष में हैं।
समाज और प्रशासन पर सवाल
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यह समय सामान्य वर्ग के लिए निर्णायक है। अब उन्हें सरकार और सत्ता के बजाय जनता और समाज के साथ खड़ा होना चाहिए। सोशल मीडिया और देशभर में चल रहे प्रदर्शन इस मानसिक और सामाजिक असंतोष का प्रमाण हैं।
अग्निहोत्री के इस्तीफे ने प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह दिखाता है कि समाज के कुछ वर्ग अपने अधिकारों और सम्मान को लेकर गंभीर हैं और वे इसे नजरअंदाज नहीं करने वाले।
और पढ़ें: DDA New Housing Scheme: दिल्ली में अब घर बनाना आसान! DDA की नई योजना में 25% तक का डिस्काउंट





























