Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही कथित हत्याओं और हिंसा के विरोध में शनिवार को लंदन में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। इस प्रदर्शन में भारतीय और बांग्लादेशी हिंदू समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन का मकसद साफ था बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर खींचना।
हालांकि, यह प्रदर्शन उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब अचानक खालिस्तान समर्थक गिरोह के करीब पांच सदस्य वहां पहुंच गए और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
“हिंदुओं को लगातार बनाया जा रहा है निशाना” (Bangladesh Violence)
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि बांग्लादेश में हाल के महीनों में हिंदुओं पर हमले बढ़े हैं और कई जगह हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। इसी के विरोध में लंदन स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर ‘हिंदुओं के लिए न्याय’ के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार शोनार बांग्ला” भी बजाया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि वे किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंसा और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
खालिस्तानी समर्थकों की एंट्री से बढ़ा तनाव
शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस प्रदर्शन के दौरान उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब खालिस्तान समर्थक कुछ लोग वहां पहुंच गए। ये लोग बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के समर्थन में नारे लगाने लगे और खालिस्तानी झंडे लहराते नजर आए। इसके साथ ही भारत विरोधी नारेबाजी भी शुरू हो गई, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया।
जानकारी के मुताबिक, इन लोगों की हरकतों से प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति पैदा हो गई। हालात बिगड़ते देख स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्थिति को नियंत्रित किया गया।
दीपू चंद्र दास की हत्या को लेकर आक्रोश
लंदन में हुआ यह प्रदर्शन खास तौर पर दीपू चंद्र दास की हत्या और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के विरोध में आयोजित किया गया था। बंगाली हिंदू आदर्श संघ (BHAS) यूके के सदस्यों ने इस प्रदर्शन का आयोजन किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बांग्लादेश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इकबाल मंच के उस्मान हादी की मौत के बाद स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई है और कई इलाकों से हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें खास तौर पर हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
भारत में भी गूंजा विरोध
लंदन से पहले भारत में भी बांग्लादेश में कथित अत्याचारों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। दिल्ली, पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर नाराजगी जताई। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मशाल जुलूस निकाला।
इस दौरान बीजेपी नेता अनीता महतो ने कहा, “जब तक हिंदू एकजुट नहीं होंगे, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। बांग्लादेश में हिंदुओं को जिंदा जलाए जाने की खबरें बेहद गंभीर हैं।”
भारत सरकार ने जताई चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर भारत सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदाय के खिलाफ बार-बार हो रही हिंसा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है।
उन्होंने मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि भारत इस घटना की निंदा करता है और उम्मीद करता है कि दोषियों को जल्द सजा मिलेगी।






























