Bangladesh Election Result 2026: अगस्त 2024 में बांग्लादेश की सड़कों पर उमड़ा छात्र आंदोलन किसी तूफान से कम नहीं था। इसी आंदोलन ने 15 साल से सत्ता में रही Sheikh Hasina के शासन का अंत कर दिया था। उस वक्त जो युवा चेहरे बदलाव की मिसाल बने थे, वही अब चुनावी मैदान में उम्मीदों के साथ उतरे। लेकिन 13वें संसदीय चुनाव के नतीजों ने इस नई राजनीतिक ताकत को बड़ा झटका दे दिया है।
छात्र आंदोलन से निकली नई पार्टी National Citizen Party (एनसीपी) से लोगों को काफी उम्मीदें थीं। हजारों युवाओं ने इसे बांग्लादेश की राजनीति में ‘तीसरा विकल्प’ बनाने का सपना देखा था। लेकिन फाइनल नतीजों में तस्वीर कुछ और ही नजर आई।
30 सीटों पर लड़ी, सिर्फ 5 पर जीत (Bangladesh Election Result 2026)
स्थानीय टीवी प्रोजेक्शनों के मुताबिक, एनसीपी ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, उसे महज 5 सीटों पर ही जीत मिल सकी। बाकी सीटों पर पार्टी बुरी तरह पिछड़ती दिखाई दी। यह नतीजा उन समर्थकों के लिए निराशाजनक रहा, जिन्होंने सड़कों पर आंदोलन से लेकर चुनाव प्रचार तक पार्टी का साथ दिया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आंदोलन की ऊर्जा को वोटों में बदलना आसान नहीं होता। संगठन, संसाधन और जमीनी नेटवर्क की कमी भी नए दलों के सामने बड़ी चुनौती बनती है।
जमात से गठबंधन बना विवाद की वजह?
एनसीपी की हार के पीछे एक बड़ा कारण उसका 11 दलों वाला गठबंधन माना जा रहा है, जिसमें Bangladesh Jamaat-e-Islami भी शामिल थी। छात्र आंदोलन की पहचान समावेशी और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी थी, लेकिन जमात जैसे कट्टरपंथी माने जाने वाले दल के साथ हाथ मिलाने से पार्टी की छवि पर असर पड़ा।
गठबंधन की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर भी असंतोष उभर आया। कई महिला नेताओं ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि उन्हें नजरअंदाज किया गया और निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। इससे संगठनात्मक एकजुटता भी कमजोर पड़ी।
विश्लेषकों का मानना है कि उदारवादी और युवा वोटर, जो एनसीपी की ओर झुक रहे थे, वे इस गठबंधन से असहज हो गए और उनका रुख बदल गया। इसका फायदा मुख्य विपक्षी दल Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) को मिला, जिसकी अगुवाई पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia करती हैं।
नतीजों पर सवाल, दोबारा मतगणना की मांग
हार के बाद एनसीपी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता आसिफ महमूद शोजीब भुइयां ने देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि ढाका-13, 15, 16 और 17 जैसी सीटों पर नतीजों में गड़बड़ी हुई है। उनका दावा है कि ढाका-15 में जहां जमात के अमीर करीब 20 हजार वोटों से आगे चल रहे थे, वहां अचानक बिना स्पष्ट कारण के बीएनपी उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया गया।
पार्टी ने कई सीटों पर दोबारा मतगणना (रिकाउंटिंग) की औपचारिक मांग की है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल इतना साफ है कि बांग्लादेश की राजनीति में छात्र आंदोलन ने नई ऊर्जा जरूर भरी है, लेकिन उसे स्थायी राजनीतिक ताकत में बदलने के लिए रणनीति, धैर्य और व्यापक सामाजिक समर्थन की जरूरत होगी। सड़क की गूंज संसद तक पहुंची जरूर है, पर अभी सफर लंबा नजर आ रहा है।



























