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Bangladesh BNP-Jamat Workers Clash: बांग्लादेश चुनाव से पहले हंगामा, कार्यक्रम में हिंसा, नेता की मौत से माहौल गरम, 65 लोग घायल

Nandani | Nedrick News

Published: 29 Jan 2026, 04:33 PM | Updated: 29 Jan 2026, 04:33 PM

Bangladesh BNP-Jamat Workers Clash : बांग्लादेश में आम चुनाव में अब सिर्फ कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन उससे पहले सियासत पूरी तरह गरमा गई है। चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक हिंसा की एक और बड़ी घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। शेरपुर जिले में बुधवार को हुए एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में जमात-ए-इस्लामी के एक वरिष्ठ स्थानीय नेता की मौत हो गई, जबकि कम से कम 65 लोग घायल हो गए।

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कार्यक्रम में कैसे भड़की हिंसा (Bangladesh BNP-Jamat Workers Clash)

यह घटना बुधवार दोपहर करीब 3 बजे झेनाइगाती उपजिला के मिनी स्टेडियम मैदान में हुई। यहां प्रशासन की ओर से एक चुनावी कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें शेरपुर-3 सीट से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को मतदाताओं के सामने अपना चुनावी मेनिफेस्टो रखने का मौका दिया जाना था। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आगे की कतार में कुर्सियों पर बैठने को लेकर BNP और जमात समर्थकों के बीच बहस शुरू हुई। शुरुआत में मामूली कहासुनी थी, लेकिन देखते ही देखते धक्का-मुक्की होने लगी और फिर यह झगड़ा पूरी तरह हिंसक झड़प में बदल गया। लाठी-डंडों और कथित तौर पर स्थानीय हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिससे मैदान में अफरा-तफरी मच गई।

जमात नेता की मौत, कई गंभीर घायल

इस हिंसा में जमात-ए-इस्लामी के श्रीबोर्डी उपजिला इकाई के सचिव मौलाना मोहम्मद रेजाउल करीम (42) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान रात करीब 9:45 बजे उनकी मौत हो गई। रेजाउल करीम के साथ जमात के दो अन्य नेता अमीनुल इस्लाम और मौलाना ताहिरुल इस्लाम भी गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों को पहले मयमनसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए ढाका रेफर किया गया, जहां ताहिरुल इस्लाम की हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, झड़प में घायल हुए 65 लोगों में से करीब 25 को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जबकि 20 लोगों को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। कई अन्य लोगों को हल्की चोटें आईं।

तोड़फोड़ और डर का माहौल

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हिंसा के दौरान कई मोटरसाइकिलें तोड़ दी गईं और स्टेडियम में रखी करीब 100 से ज्यादा कुर्सियां क्षतिग्रस्त हो गईं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोग डर के कारण अपने घरों में दुबक गए और बाजार भी कुछ समय के लिए बंद हो गए।

एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप

जमात-ए-इस्लामी के शेरपुर-3 सीट से उम्मीदवार नुरुज्जमान बादल ने आरोप लगाया कि BNP समर्थक देर से कार्यक्रम में पहुंचे और कुर्सियों को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने जमात समर्थकों पर हमला कर दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके करीब 50 कार्यकर्ता और समर्थक इस हिंसा में घायल हुए हैं।

वहीं, BNP उम्मीदवार महमूदुल हक रुबेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि झड़प की शुरुआत जमात समर्थकों ने की थी। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और उलझ गई है।

BNP ने जिला कमेटी सस्पेंड की

घटना के बाद BNP ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया। पार्टी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि शेरपुर जिला BNP की 41 सदस्यीय कन्वीनिंग कमेटी को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। यह कमेटी कन्वीनर एडवोकेट सिराजुल इस्लाम और सदस्य सचिव एबीएम मामुनुर रशीद पलाश के नेतृत्व में काम कर रही थी।

शेरपुर के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद कमरुल इस्लाम ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक इस मामले में कोई औपचारिक केस दर्ज नहीं हुआ था।

छात्रों का विरोध प्रदर्शन

जमात नेता की मौत के विरोध में ढाका विश्वविद्यालय और जगन्नाथ विश्वविद्यालय में छात्रों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। छात्रों ने इस हिंसा की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इन प्रदर्शनों से साफ है कि यह मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।

जमात-ए-इस्लामी सत्ता के करीब?

इस घटना का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बांग्लादेश में अगले महीने आम चुनाव होने वाले हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक हाशिए पर रही जमात-ए-इस्लामी इस बार सत्ता के बेहद करीब नजर आ रही है। हाल के दो सर्वे में जमात देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP को कड़ी टक्कर दे रही है।

अमेरिकी संस्था इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) के दिसंबर सर्वे में BNP को 33 फीसदी और जमात को 29 फीसदी समर्थन मिला था। वहीं जनवरी में हुए एक संयुक्त सर्वे में BNP को 34.7 फीसदी और जमात को 33.6 फीसदी समर्थन बताया गया।

अवामी लीग पर बैन से बदला सियासी समीकरण

अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और उनकी पार्टी अवामी लीग पर बैन लगा दिया गया। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग के बाहर होने से जो खाली जगह बनी, उसका सबसे ज्यादा फायदा जमात-ए-इस्लामी को मिला है।

जमात ने ऐलान किया है कि वह इस चुनाव में 179 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। वहीं BNP की कमान अब खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है, क्योंकि खालिदा जिया का हाल ही में निधन हो चुका है।

भारत जैसी चुनावी प्रक्रिया

बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया काफी हद तक भारत जैसी है। यहां भी फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम लागू होता है, यानी जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीतता है। संसद में कुल 350 सीटें हैं, जिनमें से 300 पर सीधे चुनाव होते हैं और 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन अपने नेता को चुनता है, जिसे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाते हैं।

चुनाव से ठीक पहले हुई यह हिंसक घटना बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात संभलते हैं या सियासी टकराव और तेज होता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

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