Asrani Death: बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन असरानी का निधन, दिवाली के प्रदूषण ने बिगाड़ दी थी उनकी तबीयत!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 21 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 21 Oct 2025, 12:00 AM

Asrani Death: बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन असरानी, जिनकी चुटीली कॉमिक टाइमिंग ने लाखों दर्शकों को हंसी से लोटपोट किया, अब इस दुनिया में नहीं रहे। 84 वर्षीय असरानी ने 20 अक्टूबर को मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। उनका निधन फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सदमा है, और उनके चाहने वालों के लिए यह बहुत दुखद पल है।

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कैसे बिगड़ी असरानी की तबीयत? Asrani Death

जानकारी के अनुसार, असरानी पिछले पांच दिनों से मुंबई के आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज (COPD) में अचानक बढ़ोतरी हो गई थी। सांस लेने में दिक्कत इतनी बढ़ गई थी कि उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, दिवाली के दौरान होने वाले प्रदूषण ने उनकी स्थिति को और गंभीर बना दिया। खासकर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रदूषण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

पटाखों से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक गैसें फेफड़ों की नलियों को सिकोड़ देती हैं। इससे सांस लेने में और कठिनाई होती है और खांसी, ब्रॉन्काइटिस जैसी समस्याएं और बढ़ जाती हैं। इस प्रदूषण के कारण असरानी जैसे बुजुर्गों में फेफड़ों की कार्यक्षमता 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

दिवाली के दिन मुंबई में पॉल्यूशन की स्थिति

दिवाली के दिन, यानी 20 अक्टूबर को, मुंबई भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रही थी। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में पीएम 2.5 का स्तर 339 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो WHO की निर्धारित सीमा से लगभग छह गुना अधिक था। इस तरह के प्रदूषण से फेफड़ों में सूजन और सांस लेने में कठिनाई बढ़ सकती है। इंडियन चेस्ट सोसायटी की रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली के बाद रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के मामलों में 40 प्रतिशत तक वृद्धि हो जाती है।

प्रदूषण का फेफड़ों पर असर

डॉक्टरों का कहना है कि दिवाली के प्रदूषण से फेफड़ों की स्थिति बिगड़ने के अलावा, यह हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ा सकता है। दिल्ली के विनायक हेल्थ हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राधिका शर्मा के अनुसार, दिवाली के बाद स्मॉग का असर एक हफ्ते तक रहता है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता 25 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इसके अलावा, क्रॉनिक बीमारियों जैसे COPD या अस्थमा वाले मरीजों के लिए सांस लेना और भी मुश्किल हो जाता है।

दिवाली के प्रदूषण से बचने के उपाय

दिवाली के प्रदूषण से बचने के लिए डॉक्टरों ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं। दिल्ली के AIIMS में अडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल आर सल्वे के अनुसार, दिवाली का प्रदूषण शॉर्ट-टर्म में अस्थमा और COPD के मरीजों को और ज्यादा प्रभावित करता है। इसके अलावा, लॉन्ग-टर्म में कार्डियो-रेस्पिरेटरी डिजीज, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मास्क पहनना और घर के अंदर रहना फायदेमंद हो सकता है।

असरानी का अंतिम संस्कार और परिवार की इच्छा

आपको बता दें, असरानी के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार सांताक्रूज वेस्ट के शास्त्री नगर शवदाह गृह में किया गया। परिवार के मुताबिक, असरानी ने कभी नहीं चाहा था कि उनके निधन के बाद किसी तरह का शोर-शराबा हो या उनकी मौत की खबर को सार्वजनिक किया जाए। उनके परिवार ने उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए उनका अंतिम संस्कार बहुत ही शांति से किया। एक्टर के मैनेजर बाबुभाई थीबा ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी तबीयत कई दिनों से खराब थी।

असरानी का शानदार फिल्मी करियर

असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल से की और राजस्थान कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। 1967 में फिल्म ‘हरे कांच की चूड़ियां’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद वह फिल्म इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बन गए। उन्होंने 50 साल से भी अधिक समय तक सैकड़ों फिल्मों में काम किया और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी सबसे यादगार भूमिका ‘शोले’ फिल्म में जेलर के किरदार के रूप में थी। उनका डायलॉग “हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं” आज भी दर्शकों की जुबान पर है।

निजी जीवन

असरानी के निजी जीवन की बैट करें तो उन्होंने 1973 में मंजू बंसल से शादी की थी और उनका एक बेटा, नवीन असरानी है, जो अहमदाबाद में डेंटिस्ट हैं। असरानी के परिवार में तीन भाई और चार बहनें थीं। उनके पिता एक कालीन की दुकान चलाते थे, और असरानी एक साधारण परिवार से आते थे।

असरानी बॉलीवुड के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने दशकों तक हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन न केवल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बल्कि उनके लाखों चाहने वालों के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।

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