Trending

Aravalli Hills Controversy: अरावली पहाड़ियां खतरे में! जानें दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान पर कितना पड़ेगा असर

Nandani | Nedrick News

Published: 24 Dec 2025, 08:40 AM | Updated: 24 Dec 2025, 08:40 AM

Aravalli Hills Controversy: राजस्थान की पहचान और दिल्ली-हरियाणा के पर्यावरण की रीढ़ मानी जाने वाली अरावली पहाड़ियों का अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है। अरावली पहाड़ियों ने सदियों से मैदानी इलाकों को रेगिस्तान बनने से बचाया है, लेकिन हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसका बड़ा हिस्सा अब कानूनी संरक्षण से बाहर हो गया है।

और पढ़ें: Ex-Agniveers 50% Reservation: 2026 में पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ा तोहफा, BSF में 50% आरक्षण, आयु सीमा और फिजिकल टेस्ट में भी राहत

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और नई परिभाषा (Aravalli Hills Controversy)

20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के टीएन गोवर्धन की पुरानी याचिका पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को मंजूरी दी है। इसके अनुसार अब केवल वही पहाड़ियां अरावली मानी जाएंगी, जिनकी धरातल से ऊंचाई 100 मीटर या उससे अधिक है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि अरावली की अधिकांश पहाड़ियों का लगभग 90% हिस्सा अब कानूनी संरक्षण से बाहर हो गया है।

इस फैसले के बाद पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर अरावली के ये हिस्से हट गए तो इसका प्रभाव राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के पर्यावरण, जल, मौसम और अर्थव्यवस्था पर गंभीर होगा।

राजस्थान पर प्रभाव

अरावली की पहाड़ियों का हटना राजस्थान में रेगिस्तान के विस्तार को तेज करेगा। अरावली प्राकृतिक दीवार का काम करती हैं, जो रेगिस्तानी धूल और गर्म हवाओं को रोकती हैं। इनके हटने से जयपुर, अलवर, सीकर और दौसा जैसे जिलों में रिहायशी इलाके और खेती प्रभावित होगी।

भूजल का स्तर गिरने से जल-संकट बढ़ेगा और किसानों को अपनी खेती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है। फसलें कम होंगी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

हरियाणा पर असर

हरियाणा में भी अरावली का महत्व कम नहीं है। गुरुग्राम, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले अरावली क्षेत्र में आते हैं। पहाड़ियों के हटने से रेत भरी हवाएं चलेंगी, मिट्टी की नमी कम होगी और कृषि उत्पादन घटेगा। भूजल का स्तर गिरने से ट्यूबवेल सूख जाएंगे, गर्मी बढ़ेगी और हिटवेव जैसी आपदाएं आम होंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली की कमी से हरियाणा का कृषि और जल संकट गहरा सकता है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पलायन बढ़ सकता है।

दिल्ली पर संभावित प्रभाव

राजधानी दिल्ली भी अरावली पहाड़ियों के नुकसान से अछूती नहीं रहेगी। अरावली की पहाड़ियों के हटने से राजस्थान की धूल सीधे दिल्ली पहुंचेगी, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ेगा। गर्मियों में तापमान तेजी से बढ़ेगा और मानसून पर भी इसका असर दिखाई देगा। इससे श्वसन रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

पर्यावरणविदों की चेतावनी

विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों का कहना है कि अरावली पहाड़ियों का संरक्षण सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि जल, हवा और जीवन रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। अगर पहाड़ियों को हटने दिया गया तो न केवल राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के पर्यावरण पर असर पड़ेगा, बल्कि लोगों की जीवन शैली और स्वास्थ्य भी प्रभावित होंगे।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अरावली पहाड़ियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, और अब सवाल यह है कि क्या राज्य सरकारें और केंद्र इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाएंगे या नहीं।

और पढ़ें: IAS Santosh Verma: फर्जी दस्तावेज़ों से आईएएस बने संतोष वर्मा? MP सरकार ने बर्खास्तगी की घंटी बजा दी!

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds