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Anti-Ageing Research: दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं से लेकर टेक अरबपतियों तक, मौत को मात देने की जंग में बहा रहे हैं अरबों की दौलत

Nandani | Nedrick News

Published: 28 Dec 2025, 04:26 PM | Updated: 28 Dec 2025, 04:36 PM

Anti-Ageing Research: आज की दुनिया में अगर किसी एक मुद्दे ने वैज्ञानिकों से लेकर अरबपतियों और राष्ट्राध्यक्षों तक की नींद उड़ाई है, तो वह है इंसान की उम्र। सवाल सिर्फ लंबा जीने का नहीं, बल्कि जवान और सेहतमंद बने रहने का है। कूटनीतिक गलियारों से लेकर सिलिकॉन वैली तक, हर जगह एक ही चर्चा है कि क्या इंसान 100 ही नहीं, बल्कि 120, 150 साल या उससे भी ज्यादा जी सकता है?

कुछ समय पहले इस बहस को तब और हवा मिली, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई एक गुपचुप बातचीत दुनिया के सामने आ गई। बीजिंग में एक सैन्य समारोह के दौरान गलती से माइक ऑन रह गया और दोनों नेता अंग प्रत्यारोपण, वैज्ञानिक प्रयोगों और इंसान के 150 साल तक जीवित रहने की संभावनाओं पर चर्चा करते सुने गए। इस एक पल ने साफ कर दिया कि अमरता का सपना अब सिर्फ फिल्मों या किताबों तक सीमित नहीं रहा।

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सिर्फ नेता नहीं, अरबपति भी मौत को चुनौती दे रहे हैं (Anti-Ageing Research)

अमर होने या कम से कम बुढ़ापे को टालने की चाह सिर्फ राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं है। टेक्नोलॉजी की दुनिया के सबसे अमीर लोग इस दिशा में अरबों डॉलर झोंक रहे हैं। सिलिकॉन वैली के बड़े नाम जेफ बेजोस, पीटर थील, सैम ऑल्टमैन, लैरी पेज और मार्क जकरबर्ग सब किसी न किसी रूप में उम्र बढ़ाने की रिसर्च से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश कर चुके हैं।

इनका मानना है कि जिस तरह टेक्नोलॉजी ने दुनिया बदल दी, उसी तरह विज्ञान बुढ़ापे को भी मात दे सकता है। मौत को जीवन की आखिरी सच्चाई मानने से इनकार करते हुए ये लोग अब इसे एक तकनीकी समस्या की तरह देखने लगे हैं, जिसे सॉल्व किया जा सकता है।

OpenAI के सैम ऑल्टमैन और “10 साल ज्यादा जीने” का मिशन

ChatGPT जैसी क्रांतिकारी तकनीक के पीछे खड़े OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन अब इंसानी उम्र बढ़ाने के मिशन में भी उतर चुके हैं। उन्होंने ‘रेट्रो बायोसाइंसेज’ नाम की एक स्टार्टअप कंपनी में करीब 18 करोड़ डॉलर (लगभग 1,500 करोड़ रुपये) का निवेश किया है। इस कंपनी का लक्ष्य है विज्ञान के दम पर इंसान की जिंदगी में कम से कम 10 साल और जोड़ना।

रेट्रो बायोसाइंसेज के प्रमुख जो बेट्स-लाक्रोइक्स का कहना है कि उनकी कंपनी एक ही रास्ते पर नहीं चल रही, बल्कि कई वैज्ञानिक तरीकों पर एक साथ काम कर रही है। उनका मानना है कि उम्र बढ़ाने जैसी बड़ी चुनौती को हल करने के लिए पुराने नियमों को तोड़ना जरूरी है।

सैम ऑल्टमैन खुद भी अपनी सेहत को लेकर काफी सजग हैं। वो संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा वे मेटफॉर्मिन नाम की दवा भी लेते हैं, जो आमतौर पर डायबिटीज में दी जाती है, लेकिन टेक इंडस्ट्री में इसे उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी करने वाला विकल्प माना जा रहा है।

ओरेकल के लैरी एलिसन: “मौत मुझे समझ नहीं आती”

ओरेकल के संस्थापक लैरी एलिसन लंबे समय से मौत और बुढ़ापे के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने एक बार कहा था, “कोई इंसान अचानक गायब कैसे हो सकता है? उसका अस्तित्व खत्म कैसे हो सकता है?” इसी सोच ने उन्हें 1997 में ‘एलिसन मेडिकल फाउंडेशन’ शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

इस फाउंडेशन ने उम्र से जुड़ी रिसर्च में करीब 43 करोड़ डॉलर खर्च किए, जिसमें से 80 फीसदी रकम सिर्फ जीवन को लंबा करने के तरीकों पर लगाई गई। हालांकि 2013 के बाद इस फाउंडेशन ने नई फंडिंग बंद कर दी, लेकिन तब तक यह एंटी-एजिंग रिसर्च की दुनिया में बड़ा नाम बन चुका था।

गूगल के लैरी पेज और कैलिको लैब्स

गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज ने भी 2013 में ‘कैलिफोर्निया लाइफ कंपनी’ यानी कैलिको लैब्स की शुरुआत की। इसका मकसद बुढ़ापे के पीछे छिपे जैविक रहस्यों को समझना और उम्र से जुड़ी बीमारियों का इलाज ढूंढना है।

2014 में कैलिको ने दवा कंपनी AbbVie के साथ साझेदारी की और इस प्रोजेक्ट में अरबों डॉलर झोंक दिए गए। हालांकि, 2020 में कैलिको के सह-संस्थापक बिल मैरिस ने कंपनी की धीमी प्रगति पर निराशा भी जाहिर की थी। इसके बावजूद, कैलिको को आज भी उम्र बढ़ाने वाली रिसर्च की प्रेरणा माना जाता है।

जकरबर्ग का सपना: 100 साल से ज्यादा जीना हो आम बात

मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं। दोनों ने मिलकर ‘चान जकरबर्ग इनिशिएटिव’ शुरू किया, जिसका लक्ष्य खतरनाक बीमारियों को खत्म करना और मानव स्वास्थ्य में सुधार लाना है।

जकरबर्ग का मानना है कि इस सदी के अंत तक 100 साल से ज्यादा जीना आम बात हो जाएगी। वो खुद भी फिट रहने के लिए जिउ-जित्सु और क्रॉसफिट जैसी कठिन एक्सरसाइज करते हैं।

जेफ बेजोस और कोशिकाओं को जवान बनाने की कोशिश

अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस भी ऑल्टोस लैब्स नाम की कंपनी में बड़े निवेशक माने जाते हैं। इस स्टार्टअप का फोकस शरीर की पुरानी कोशिकाओं को फिर से जवान बनाना है।

बेजोस खुद भी फिटनेस को लेकर बेहद गंभीर हैं। वेट ट्रेनिंग, रोइंग, हाइकिंग और वाटर स्पोर्ट्स उनके रोजमर्रा के रूटीन का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि लंबी उम्र सिर्फ लैब में नहीं, बल्कि जिम और रोज की आदतों से भी आती है।

सबसे आगे ब्रायन जॉनसन: उम्र को पीछे मोड़ने वाला इंसान

इस पूरी रेस में अगर कोई सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वो हैं अमेरिकी टेक अरबपति ब्रायन जॉनसन। 48 साल के ब्रायन का दावा है कि उनका दिल 37 साल के व्यक्ति जैसा, त्वचा 28 साल के युवक जैसी और फेफड़े 18-19 साल के जवान जैसे काम करते हैं।

ब्रायन हर दिन सुबह पांच बजे उठते हैं, सख्त शाकाहारी डाइट लेते हैं और रोजाना 1,977 कैलोरी से ज्यादा नहीं खाते। हल्दी, जिंक, मेटफॉर्मिन समेत कई सप्लीमेंट्स उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं। साल 2021 में उन्होंने अपनी जैविक उम्र 5.1 साल कम कर ली, जिसे एक रिकॉर्ड माना जाता है।

प्लाज्मा एक्सचेंज और क्लोन अंग

2024 में ब्रायन ने टोटल प्लाज्मा एक्सचेंज करवाया, जिसमें उनके शरीर का पुराना प्लाज्मा निकालकर एल्बुमिन डाला गया। उनका मानना है कि इससे शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

इतना ही नहीं, ब्रायन ने अपने अंगों के क्लोन भी लैब में तैयार करवाए हैं, ताकि नई दवाओं और इलाजों को पहले उन पर टेस्ट किया जा सके। उनका कहना है कि इससे एंटी-एजिंग इलाज ज्यादा सुरक्षित बनेंगे।

क्या सच में अमर हो पाएगा इंसान?

इन तमाम कोशिशों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इंसान सच में मौत को मात दे पाएगा? वैज्ञानिक अभी भी इस पर बंटे हुए हैं। कुछ इसे भविष्य की बड़ी क्रांति मानते हैं, तो कुछ इसे अमीरों का महंगा सपना बताते हैं।

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