Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी हत्याकांड में सामने आए नए घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड की सियासत और सामाजिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। जन पक्षधर सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है। आंदोलन के पहले चरण में 4 जनवरी को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इसके लिए परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया जाएगा।
राज्यभर में विरोध प्रदर्शन की तैयारी (Ankita Bhandari Case)
आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए सामाजिक संगठनों ने राज्य के सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर भी विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है। उत्तराखंड महिला मंच की अपील पर देहरादून स्थित शहीद स्मारक में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में साफ किया गया कि मुख्यमंत्री आवास कूच के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
चक्काजाम और जन जागरूकता यात्राएं भी शामिल
बैठक में तय हुआ कि आने वाले दिनों में देहरादून समेत पूरे राज्य में चक्काजाम और विभिन्न मुद्दों को लेकर जन जागरूकता यात्राएं भी निकाली जाएंगी। 4 जनवरी के मुख्यमंत्री आवास कूच को सफल बनाने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है और जिम्मेदारियां भी बांटी गई हैं, ताकि आंदोलन पूरी ताकत के साथ किया जा सके।
निकलो बाहर मकानों से, जंग लड़ो शैतानों से ✊🏻
प्रेस नोट⚫अंकिता वीआईपी की जांच के लिए करेंगे सीएम आवास कूच
⚫अंकिता के कमरे को बुलडोजर से ढहाने के मामले को भी बनाया जाएगा मुद्दादेहरादून
विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों से आम नागरिकों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में 4… https://t.co/EVCby2zThP pic.twitter.com/fDXUXegw5I— swati negi (@swatinegi2) January 2, 2026
न्यायिक जांच की मांग, नेताओं को पद से हटाने का दबाव
आंदोलन के जरिए राज्य सरकार से कई अहम मांगें रखी जाएंगी। संगठनों ने मांग की है कि उर्मिला सनावर द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किसी मौजूदा जज की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए। इस समिति में कम से कम चार सदस्य सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों से भी शामिल किए जाएं।
इसके साथ ही बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार और राज्य प्रभारी दुष्यंत गौतम को जांच पूरी होने तक उनके पदों से हटाने और उर्मिला सनावर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
‘VIP को बचाने का आरोप’, लोगों में गुस्सा
बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों का कहना था कि अंकिता भंडारी मामले में उत्तराखंड के लोगों के मन में लंबे समय से यह टीस बनी हुई है कि पूरा न्याय नहीं मिला। आरोप लगाया गया कि हत्या के पीछे शामिल वीआईपी को पूरी तरह बचा लिया गया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि भले ही जनता के दबाव में निचली अदालत ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई हो, लेकिन लोगों को डर है कि यह फैसला ऊपरी अदालतों में टिक नहीं पाएगा और आरोपी बरी हो सकते हैं। ऐसे में उर्मिला सनावर के आरोपों ने आंदोलन की चिंगारी को और तेज कर दिया है।
सामाजिक संगठनों और विपक्ष का साझा मंच
बैठक में गरिमा दसौनी, ज्योति रौतेला, समर भंडारी, प्रमिला रावत, इंद्रेश मैखुरी, सुलोचना इष्टवाल, ऊषा डोभाल, डॉ. रवि चोपड़ा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे। संचालन कमला पंत ने किया।
इस मौके पर कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई माले, उत्तराखंड क्रांति दल, राष्ट्रीय रीजिनल पार्टी समेत कई दलों और उत्तराखंड इंसानियत मंच, मूल निवास भूकानून संघर्ष समिति, दून सिटीजन फोरम, स्त्री मुक्ति लीग, भारत की नौजवान सभा, इप्टा, आइसा जैसे संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आगे और तेज होगा आंदोलन
कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सड़क से लेकर सियासत तक चर्चा का केंद्र बन गया है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक पूरे मामले में पारदर्शी जांच और वीआईपी की भूमिका सामने नहीं आती, तब तक जन दबाव और तेज किया जाएगा।




























