AAP की सियासत में बड़ा ट्विस्ट 7 सांसदों के दावे और दल बदल कानून के बीच फंसा सस्पेंस| AAP Defection Row

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 25 Apr 2026, 10:36 AM | Updated: 25 Apr 2026, 10:36 AM

AAP Defection Row: आम आदमी पार्टी (AAP) में कथित टूट को लेकर राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। मामला तब और गरमा गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने दावा किया कि AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस दावे ने विपक्षी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।

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कौन-कौन सांसदों के नाम सामने आए| AAP Defection Row

राघव चड्ढा के अनुसार जो सांसद पार्टी छोड़ने वालों में शामिल बताए जा रहे हैं, उनमें हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल का नाम सामने आया है। हालांकि स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है क्योंकि इन चार में से सिर्फ स्वाति मालीवाल ने ही सार्वजनिक तौर पर पार्टी छोड़ने की बात मानी है।

बाकी तीन सांसद हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इसी वजह से पूरे मामले में सस्पेंस और बढ़ गया है और राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।

BJP में शामिल होने का दावा और राजनीतिक संदेश

दूसरी तरफ BJP की ओर से दावा किया गया कि कथित तौर पर शामिल हुए सांसदों का पार्टी में स्वागत किया गया है। भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन से जोड़ते हुए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब देश की राजनीति में विपक्षी एकता और दलों के बीच टकराव पहले से ही तेज है।

AAP का जोरदार पलटवार

AAP ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के राज्यसभा व्हिप एनडी गुप्ता ने कहा कि यह पूरा मामला दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन है और पार्टी इस पर कानूनी कार्रवाई करेगी। वहीं AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि वे राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक की सदस्यता खत्म करने की मांग करेंगे। पार्टी का आरोप है कि इन नेताओं ने स्वेच्छा से पार्टी छोड़कर संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन किया है।

दल-बदल कानून क्या कहता है

भारत का दल-बदल विरोधी कानून संविधान की दसवीं अनुसूची में शामिल है। इसके मुताबिक यदि कोई सांसद या विधायक अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। हालांकि इसमें एक अहम अपवाद भी हैअगर किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल हो जाएं या विलय कर लें, तो इसे वैध माना जा सकता है और वे अयोग्यता से बच सकते हैं।

दो-तिहाई का गणित बना सबसे बड़ा मुद्दा

पूरा मामला अब “दो-तिहाई फॉर्मूले” पर टिक गया है। AAP के राज्यसभा सांसदों की संख्या के हिसाब से अगर सात में से कम से कम पांच सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में जाते हैं, तो इसे वैध विलय माना जा सकता है। राघव चड्ढा का दावा है कि सभी सात सांसदों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और उन्हें राज्यसभा सभापति को सौंपा जा चुका है। लेकिन असली विवाद यहीं से शुरू होता है क्योंकि इसकी पुष्टि अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाई है।

कानूनी राय में भी मतभेद

इस पूरे मामले पर कानून विशेषज्ञों की राय भी बंटी हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल का कहना है कि यदि सदन के दो-तिहाई सदस्य सहमत हैं, तो इसे वैध विलय माना जा सकता है। वहीं वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े का मानना है कि यह नियम पूरे संसद के संदर्भ में भी देखा जा सकता है, केवल एक सदन के आधार पर नहीं।

अधिवक्ता निजाम पाशा ने भी सवाल उठाया है कि क्या मूल राजनीतिक पार्टी की सहमति के बिना ऐसा विलय कानूनी रूप से मान्य होगा।

मूल पार्टी बनाम विधायी दल की बहस

सबसे बड़ा कानूनी पेच यह है कि क्या सिर्फ राज्यसभा के सांसद मिलकर विलय कर सकते हैं या इसके लिए मूल पार्टी की सहमति जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल विधायी दल का निर्णय पर्याप्त नहीं है, जब तक मूल राजनीतिक पार्टी इसे मंजूरी न दे। यही वजह है कि यह मामला अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ सकता है और संभव है कि यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे।

सभापति की भूमिका निर्णायक

इस पूरे विवाद में अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति के हाथ में है। वही तय करेंगे कि यह मामला दल-बदल है या वैध विलय। उनका फैसला ही सांसदों की सदस्यता का भविष्य तय करेगा। हालांकि इस निर्णय को बाद में अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

स्वाति मालीवाल का बयान बना बड़ा झटका

इस पूरे घटनाक्रम में स्वाति मालीवाल का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे भ्रष्टाचार, महिलाओं के साथ उत्पीड़न और संगठन में अनुशासन की कमी जैसे गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान ने AAP की छवि पर राजनीतिक स्तर पर बड़ा असर डाला है।

आगे क्या होगा

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सवाल यह है कि क्या सच में सभी सात सांसद BJP में जाएंगे, क्या दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा होगा और क्या सभापति इसे वैध मानेंगे। AAP के लिए यह बड़ा राजनीतिक संकट जरूर है, लेकिन अभी खेल खत्म नहीं हुआ है। अगर पार्टी कुछ सांसदों को वापस अपने पक्ष में लाने में सफल हो जाती है तो पूरा समीकरण फिर बदल सकता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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