BSF soldier killed: ये चीखती, रोती बिलखती महिला.. जो केवल अपने बेटे का एक बार दीदार कराने की गुहार लगा रही है… इस मां ने अपना बेटा भारत मां की सेवा के लिए भेजा था, लेकिन तब इस मां को क्या पता था, कि जिसे शहादत की सलामी मिलनी चाहिए थी, उसे ही नशाखोरी की बदनामी मिलेगी.. ये वीडियो 22 मार्च का है, जब बीएसएफ जवान जसविंदर सिंह जो कि 3 मार्च से ही नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की कस्टडी में रखा गया था और आगे की पूछताछ के लिए जम्मू से अमृतसर 19 मार्च को लाया गया था..लेकिन 21 तारीख की रात जम्मू के न्यू दीवानगढ़ गांव में देर रात के एक मनहूस खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
घर वाले आनन फानन में अमृतसर भागे.. क्योंकि उनका लाल जिसे देखने के लिए मां गुरमीत कौर लगातार अमृतसर के चक्कर लगा रही थी, बार बार पूछ रही थी कि उसके बेटे का कसूर क्या है, लेकिन सबने चुप्पी साधी थी.. उनका बच्चा कैसा है.. ये तक किसी ने खबर नहीं दी थी और जब खबर आई तो केवल ये कि जसविंदर की मौत हो गई है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के 42वीं बटालियन में तैनात जसविंदर एनसीबी की कस्टडी में मारा जाता है,… लेकिन यहां कोई जवाबदेही नहीं होती….आखिर क्यों हुई थी जसविंदर की मौत और क्या था इसका कारण.. इन सबका खुलासा हुआ करीब 1 महीने बाद.. और जो सच सामने आया है उसने सबको झकझोर दिया है.. लोगो के अंदर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रति नफरत और गुस्सा भर गया है।
बेल्ट और जूतों से बेरहमी से पीटा गया
जी हां, 3 मार्च को जसविंदर को एनसीबी वालो ने एक मामले की पूछताछ करने के नाम पर उनके घर से उठाया था, तब से वो कस्टडी में ही थे, लेकिन 20 मार्च को खबर आई थी कि जवान की तबीयत खराब है.. लेकिन 21 मार्च को उसके मरने की खबर सामने आई.. परिवार वालो ने सीधे आरोप लगाया कि उसे बेल्ट और जूतों से बेरहमी से पीटा गया, उनके बेटे को इतना टॉर्चर किया गया कि उसकी मौत हो गई.. उन लोगो ने शव लेने से और पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था..वहीं ये मामला ज्यादा हाइटलाइट तब हो गया जब इस मामले में पंजाब की गैर-सरकारी संस्था पंजाब मानवाधिकार संगठन भी कूद पड़ी। उन्होंने सीधे इस मामले में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी, वहीं प्रधान जांचकर्ता सरबजीत सिंह वेरका और मीडिया प्रभारी डॉ. खुशाल सिंह ने ये भी शक जतया था कि जवान के साथ क्रूरता हुई है जो मानव अधिकारों का पूरी तरह से उल्लघंन है। संगठन ने मांग की निष्पक्ष जांच के साथ साथ पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग और मजिस्ट्रेट की निगरानी में ही किया जाये।
सीमा पार ड्रग्स तस्करो के संपर्क
वहीं जब परिवार वालो ने एनसीबी के ऑफिस के सामने प्रदर्शन शुरु किया तब एनसीबी ने एक स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि 19 मार्च को पूछताछ के दौरान उसे सीने में दर्द हुई थी, तब अमृतसर के पल्स अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया था जहां जवान की ईलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई, इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि जसविंदर पर शक था कि वो सीमा पार ड्रग्स तस्करो के संपर्क में था और तस्करी में मदद करता था। वहीं एनसीबी के मुताबिक जसविंदर के भाई पुपिंदर सिंह को भी ड्रग्स तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुपिंदर सिंह एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पंजाब और जम्मू-कश्मीर में NDPS के छह मामले दर्ज थे। यानि की एनसीबी ने कोई मारपीट कोई टॉर्चर नहीं किया था.. बस दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी.. लेकिन एनसीबी के दावो का तब भांडा फूट गया जब जवान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है।
जी हां, जवान जसविंदर सिंह के पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर अमृतसर के सिविल अस्पताल की ऑथोरिटी ने खुलासा किया कि सच तो ये है कि रिपोर्ट के मुताबिक जसविंदर के शरीर पर करीब 34 गहर घाव के निशान थे, जिसमें करीब 24 घाव ऐसे थे जो कि दो से चार दिन पुराने थे, तो वहीं बाकि के घाव 24 घंटे के अंदर किये गए थे। जसविंदर के सिर से लेकर उसके पैर की ऐड़ी तक पर भारी फोर्स के निशान थे, 16 पन्नों की ये रिपोर्ट बताती है कि उसके जांघो और पेट के नीचले हिस्से में गहरे नीले निशान थे..नीजि अंगो पर गहरे चोट थे, जो बताते है कि जसविंदर को कितनी बुरी तरह से टॉर्चर किया गया था। करीब एक महीने बाद इस खुलासे ने सबको झकझोर कर रख दिया तो वहीं पंजाब की नारकोटिंक्स ब्यूरो की कार्यशैली और बर्बरता पर भी सवालियां निशान खड़े कर दिये है..एनसीबी ने जो भी झूठे दावे किये थे उसका भी पर्दाफाश हो चुका है.. अब देखना ये होगा कि जसविंदर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पंजाब की सरकार का क्या रवैया होगा.. क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी.. क्या जसविंदर के परिवार को न्याय मिलेगा और आखिर पूछताछ के नाम पर देश की रक्षा करने वाले एक दवान के साथ जानवरों जैसा व्यावहार किसकी शय पर किया गया.. कौन देगा इसका जवाब।



























