Honey Singh Sikhism: इंडिया को म्यूजिक की नई दुनिया में ले जाने वाले और भारत को रियल पॉप म्यूजिक से मिलाने वाले पहले पॉप रैपर हनी सिंह ((Honey Singh) एक ऐसे स्टार है जिनके सितारे फिलहाल भले ही गर्दिश में है, लेकिन ये वहीं स्टार है जिन्होंने बादशाह, गिप्पी ग्रेवाल जैसे आज के बड़े सितारों को इंडस्ट्री में पहचान दिलाई थी। हनी सिंह जो कि पंजाब के होशियारपुर के सिख परिवार से आते है, लेकिन जहां सिख धर्म में हर एक सिख अपने गुरुओ के प्रति पूरी तरह के समर्पित होते है, और अपने धार्मिक संस्कृति और परंपरा को पूरी कट्टरता से पालन करते है। यहां तक की धर्म के लिए कई गुरुओ ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया..ताकि भविष्य में सिखो की अपने धर्म के प्रति निष्ठा बनी रही.. वहीं हनी सिंह जैसे सैंशेसन ने सिख धर्म को छोड़कर नास्तिक बनने का फैसला किया … और वो भी मात्र 12 साल की उम्र में.. लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ उनकी जिंदगी में जिसके कारण एक 12 साल का बच्चा सिख धर्म को मानने से इंकार करने लगा.. औऱ बन गया नास्तिक।
हनी सिंह की लाइफ का ब्रेकडाउन – Honey Singh Sikhism
आपको याद होगा कि हनी सिंह 2014-2016 के बीच इंडस्ट्री से पूरी तरह से गायब थे, कहा गया कि नशे की लत और बायपॉलर डिसऑर्डर के कारण वो करीब 18 महीने तक इलाज करा रहे थे। जबकि उस वक्त वो अपने करियर के पीक पर थे, सिंगर जसबीर जस्सी ने दावा किया था कि हनी सिंह रिहेब सेंटर मे थे लेकिन हनी सिंह ने कहा कि वो रिहेब सेंटर में नही थे बल्कि नोएडा के अपने घर पर थे। उन्होंने 2024 में एक इंटरव्यू में एक्सेप्ट किया था कि नशे की आदत के कारण उन्हें बहुत नुकसान हुआ.. और उससे निकलने में उन्हें 8 साल लग गए।
क्यों बने हनी सिंह नास्तिक – Honey Singh Sikhism
हनी सिंह (Honey Singh) ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वो डिमोनिक एक्टीविज में शामिल हो गए थे, और एक समय था जब वो शैतान की पूजा करने लगे थे.. हनी सिंह ने ये भी एक्सेप्ट किया कि भगवान होता है और उसकी कृपा से ही वो अब सही सलामत है, लेकिन एक समय ऐसा आया था जब लोगो के तानों से तंग आकर उन्होंने भगवान को मानना छोड़ दिया था और नास्तिक बन गए थे.. जी हां, हनी सिंह (Honey Singh) ने बताया कि वो करीब 12 साल के रहे होंगे। चुंकि वो सिख धर्म को मानते थे तो उसमें बचपन से ही बच्चो के केश बढ़ाने की परंपरा को मानते हुए वो भी केश बढ़ाते थे, लेकिन उसकी वजह से अक्सर उनकी जटाये बन जाती थी इसलिए वो खुद ही बालो को काट दिया करते थे, इस कारण हनी सिंह के बाल अक्सर उनके साथ पढ़ने वाले बच्चो से छोटे रहते थे, लेकिन छोटे बालो के कारण उन्हें स्कूल में बच्चे चिढ़ाते थे, छोटी चोटी वाला कहा करते थे, उस दौरान हनी सिंह तबला बजाया करते थे।
छोटी सी उम्र में सिख धर्म का त्याग – Honey Singh Sikhism
हैरानी की बात थी कि बच्चो को उनके अंदर की कमिया दिखी और उनका टैलेंट नहीं। हनी सिंह (Honey Singh) ये मानने लगे कि वो सिख धर्म को मानते है और इसमें केशो को बढ़ाने के जो नियम है उसके कारण ही उन्हें इतना अपमान सहना पड़ता है, जिससे एक दिन गुस्से में हनी सिंह ने रोते हुए अपनी मां से कह कर अपने सारे बाल कटवा दिये थे.. और वो अगले दिन सिर पर केवल रूमाल बांध कर असेंबली में चले गए थे, लेकिन वहां भी उनकी तकलीफ पूछने के बजाय टीचर ने उन्हें ऐसे देखा जैसे उनके कोई बड़ा गुनाह हो गया हो.. जिसका असर हनी सिंह (Honey Singh) पर ऐसा पड़ा कि उन्होंने न केवल सिख धर्म छोड़ा बल्कि तबला बजाना भी छोड़ दिया औऱ नास्तिक बन गए।
हनी सिंह (Honey Singh) छोटी सी उम्र में सिख धर्म को त्याग कर नास्तिक बन गए थे.. लेकिन क्या आपने सोचा है कि सिख धर्म नास्तिक बनने की इजाजत देता है। दरअसल कई बार केवल एक ईश्वर को प्राथमिकता देने के कारण सिख धर्म को लोग नास्तिक विचारधारा वाला कह तो देते है लेकिन सच तो ये है कि सिख धर्म नास्तिक नहीं है। गुरु साहिबाणों की बाणियों से सुशोभित पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी परमात्मा को याद करने की बात कही गई है।
सिख धर्म निस्वार्थ सेवा और लोगो के बीच समान भावना रखने की सीख देता है। तर्क करें और तब ही किसी पर विश्वास करें, सिख धर्म का ध्येय है कि व्यक्ति अपना कर्म सुधारे ताकि वो मोक्ष को पा सकें, जिसके लिए उन्हें गुरु का सिमरण करना अनिवार्य है। इसलिए सिख धर्म पर चलने वाला हर कोई ईश्वर पर विश्वास करता है। जो सबूत है कि सिख धर्म में नास्तिक होना स्वीकार्य नहीं है.. हां ये जरूर कहा जाता है कि आप पहले तर्क कीजिये और तभी विश्वास किजिये। सिख धर्म को लेकर ये जानकारी आपको कैसी लगी।



























