Sikh scientists at NASA: सिख जहां भी रहे हमेशा उन्होंने अपने धर्म को माना औऱ अपनी परंपरा संस्कृति से कभी कोई समझौता नहीं किया। सिखों का बिजनस विजन कितना फुलप्रूफ है, उसका सबूत दुनियाभर में रहने वाले सिखों ने पहले भी कई बार दे दिया है। चाहे कोई भी क्षेत्र हो सिखों ने अपनी सफलता का परचम लहराया है, जिसमें अमेरिका की स्पेश एजेंसी नासा में भी सिखों की सफलता की कहानी गढ़ी गई है और सिख यहां भी अपने टैलेंट से आगे बढ़ रहे है।
NASA के मार्स मिशन – NASA’s Mars Mission
नासा एक ऐसी स्पेश ऐजेंसी जिसमें काम करने का स्पेशष रिसर्चर सपना देखता है, जो अपनी हाई टेक्नोलोजी और बेहतर वैज्ञानिको के जरिये आज सबसे बड़ी स्पेश ऐजेंसी बन चुकी है.. वहां भी सिखों ने अपना परचम लहरा दिया है। अपने इस वीडियो में हम नासा में सिखों के कमाल और उनके टैलेंट ने कैसे सिख धर्म के प्रति सम्मान बढ़ाया है, उसके बारे में जानेंगें।
सबसे पहले हम बात करेंगे जसलीन कौर जोसन की, नासा में केवल सिख पुरुषों का ही नहीं बल्कि सिख महिलाओं ने भी अपने ज्ञान से सबको चौंका दिया है। जसलीन कौर जोसन एक सिख फैमिली से बिलोंग करती है। नासा मंगल मिशन 2030 के तहत साल 2030 तक मंगल पर जाने के लिए तैयारी कर रहा है, जिसमें जसलीन कौर जोसन को पहली सिख महिला के रूप में मान्यता दी गई है। NASA के मार्स मिशन 2030 में हिस्सा लेने वाली अकेली भारतीय एस्ट्रोनॉमर भी है।
जसलीन की ज़िंदगी स्पेस साइंस को डेडिकेट
मार्स मिशन-2030 की रिसर्च साइंटिस्ट और मुख्य इन्वेस्टिगेटर के तौर पर काम कर रही हैं। वो पांच सबसे कम उम्र के एस्ट्रोनॉमर्स में से एक हैं। जसलीन जोसन हरियाणा के कुरुक्षेत्र के एक छोटे से गाँव एकता विहार से है. जो कि पहली महिला एस्ट्रोनोट कल्पना चावला का भी गांव है। कल्पना चावला जसलीन की प्रेरणा है, जसलीन ने अपनी ज़िंदगी पूरी तरह से स्पेस साइंस को डेडिकेट कर दिया है, जसलीन ने केवल सिख महिलाओं की बल्कि पूरी दुनिया की महिलाओं को भी रिप्रेजेंट करती हैं।
2, गुरकिरपाल सिंह: गुरकिरपाल सिंह एक और सिख है जिन्होंने नासा में सिक्खी की परचम लहराया है। गुरकिरपाल सिंह केर्लिफोनिया के नासा एजेंसी में जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) में हेड इंजीनियर है, जिन्हें मार्स एक्सप्लोरेशन रोवर्स और कैसिनी जैसी परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शन और नियंत्रण एल्गोरिदम विकसित करने के लिए जाना जाता है। गुरकिरपाल सिंह मार्स रोवर्स और कैसिनी के लिए एल्गोरिदम विकसित किया था। वो कई सालो से नासा से जुड़े है।
गुरतेज सिंह संधू नासा के मार्को रिसर्च
गुरतेज सिंह संधू: गुरतेज सिंह संधू नासा के मार्को रिसर्च फाउंडेशन में एक प्रमुख शोधकर्ता के तौर पर काम कर रहे है, जिन्होंने नासा के ईपीएसकोआर अनुसंधान प्रस्ताव के लिए स्वयंसेवी समीक्षक के रूप में कार्य किया था। उनके पास यूनाइटेड स्टेट्स में 1,380 से ज़्यादा पेटेंट हैं। गुरतेज मूल रूप से माइक्रोचिप्स को छोटा, तेज़ और ज़्यादा एफिशिएंट बनाने का काम करते है, जो मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर और क्लाउड सर्वर के अंदर डेटा स्टोर और प्रोसेस करते हैं। चिप मैन्युफैक्चरिंग में उनके ज़बरदस्त काम के लिए IEEE एंड्रयू एस. ग्रोव अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
IIT दिल्ली का डिस्टिंग्विश्ड एलुमनस
वहीं उन्हें साल 2023 में IIT दिल्ली का डिस्टिंग्विश्ड एलुमनस के रूप में भी चुना गया था। डिजीटल दुनिया में गुरतेज का काम हमेशा से सराहनिय है। उनके अचीवमेंट भले ही आम लोगो की नजरो में न हो, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े लोगो के लिए उनका इनोवेशन काफी अहम है। गुरतेज युवा वैज्ञानिको के लिए एक प्रेरणा है। इन व्यक्तियों ने मिशन योजना से लेकर इंजीनियरिंग और अनुसंधान तक, अंतरिक्ष अन्वेषण के अलग अलग कार्यों में अपना योगदान दे रहे है। उनका अचीवमेंट दुनियाभर के सिखों के लिए बड़े गर्व की बात है। सिखो की इस बड़ी और महान सफलता के लिए केवल दुनिया के हर एक सिख को ही नहीं बल्कि हर भारतीय को उनपर गर्व होना चाहिए। नासा में सिखों के बढ़ते प्रभाव की कहानी आपको कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बतायें।
