उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले कुछ हफ्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश के कद्दावर मुस्लिम नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री Naseemuddin Siddiqui अब समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने वाले हैं। राजनीतिक हलकों में जानकारी है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी और सपा के बीच कई दौर की बातचीत पहले ही हो चुकी है। शुक्रवार शाम चार बजे दोनों पक्षों के बीच अंतिम बैठक होने वाली है, जिसके बाद ज्वाइनिंग को लेकर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
कांग्रेस से इस्तीफा और नए मोड़ की शुरुआत | Naseemuddin Siddiqui
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस में वह प्रांतीय अध्यक्ष के पद पर थे। उनके इस्तीफे की बड़ी वजह मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राहुल गांधी के लखनऊ आने पर एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव न किया जाना था। नसीमुद्दीन इस व्यवहार से नाराज़ हुए और उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा में नया मोड़ लेने का फैसला किया।
इस मौके पर उन्होंने साफ कहा था कि उनके लिए कांग्रेस में जमीनी स्तर पर काम करने का अवसर नहीं था। उन्होंने बताया, “मैं हाई-प्रोफाइल नेता नहीं हूं और न ही कभी रहा। मीडिया विभाग का अध्यक्ष बनाना या समिति का सदस्य बनाना मेरे लिए जमीनी कार्य नहीं है। मैं संगठन का आदमी हूं और जमीनी स्तर पर काम करना चाहता हूं।”
पहले बसपा में था राजनीतिक करियर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक करियर बहुजन समाज पार्टी (BSP) से शुरू हुआ था। वह काशीराम के दौर से ही पार्टी में थे और मायावती के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे। चार बार मायावती के मुख्यमंत्री बनने पर नसीमुद्दीन कैबिनेट मंत्री रहे। 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें बसपा से बाहर कर दिया गया। इसके बाद 2018 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा।
यूपी में बसपा के समय नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी में नंबर दो की स्थिति मानी जाती थी। उनके पास सरकार और संगठन में काफी बोलबाला था। लेकिन सरकार जाने के बाद उनका रुतबा कम होता गया और कांग्रेस में भी उन्होंने अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा पाए।
समाजवादी पार्टी में शामिल होने की तैयारी
राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नसीमुद्दीन का सपा में शामिल होना उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक पर असर डाल सकता है। सपा और उनके बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। शुक्रवार शाम चार बजे होने वाली बैठक में ज्वाइनिंग का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि यह फाइनल हो जाता है तो सपा के लिए यह बड़ा राजनीतिक लाभ होगा।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी कौन हैं?
नसीमुद्दीन सिद्दीकी बांदा जिले के स्योंढ़ा गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने 1988 में बसपा के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। 1991 में बसपा के टिकट पर बांदा सदर सीट से विधायक चुने गए। बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके नसीमुद्दीन उस दौर के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे माने जाते थे।
राजनीतिक महत्व
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में शामिल होना पार्टी के मुस्लिम वोटरों के लिए संदेश है। उनके राजनीतिक अनुभव और यूपी में लंबा नेटवर्क सपा को आगामी चुनावों में मजबूती प्रदान कर सकता है। वहीं, कांग्रेस से उनका इस्तीफा यह भी दर्शाता है कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता और अनुभवी नेता अब सक्रिय भूमिका निभाने के लिए अन्य विकल्प तलाश रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की सियासत में नसीमुद्दीन सिद्दीकी की वापसी और सपा में शामिल होने की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी होने की उम्मीद है, जिससे राज्य की राजनीतिक तस्वीर में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



























