Raghav Chaddha News: भारतीय राजनीति में अक्सर ऐसे चेहरे उभरते हैं जो पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवाल उठाते हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा इन दिनों कुछ ऐसे ही नेता के तौर पर चर्चा में हैं। संसद से लेकर सड़कों तक, उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया है, वे सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। यही वजह है कि एक वर्ग अब उन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगा है।
एयरपोर्ट पर महंगी चाय से सस्ती राहत तक (Raghav Chaddha News)
दरअसल, देश के एयरपोर्ट्स पर चाय-कॉफी और खाने-पीने की चीजों के आसमान छूते दाम लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। कहीं एक कप चाय 200 से 300 रुपये तक में मिलती रही है। राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया और कहा कि हवाई सफर करने का मतलब यह नहीं कि यात्री लूट का शिकार हों।
उनकी आवाज के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘उड़ान यात्रा कैफे’ शुरू करने का फैसला किया। लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक हर एयरपोर्ट पर ये कैफे खुलें। इसकी शुरुआत जनवरी में कोलकाता एयरपोर्ट से हुई, जहां 10 रुपये में चाय, 20 रुपये में कॉफी, 10 रुपये में पानी, 20 रुपये में समोसा और 20 रुपये में रसगुल्ला मिल रहा है। पुणे एयरपोर्ट पर इस कैफे की खास बात यह रही कि वहां केवल महिला कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। यात्रियों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला। सरकार का कहना है कि खाने की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होगा और शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
10 मिनट डिलीवरी पर सवाल
इतना ही नहीं, राघव चड्ढा ने राज्यसभा में 10 मिनट डिलीवरी सेवाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने गिग वर्कर्स की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग डर और असुरक्षा के बीच काम करते हैं, लेकिन दरवाजे पर मुस्कुराकर पांच स्टार रेटिंग मांगते हैं। उन्होंने ऐसी सेवाओं पर रोक लगाने की मांग की।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस रुख का समर्थन किया। संगठन ने इसे मानवीय और दूरदर्शी कदम बताया और कहा कि इससे डिलीवरी कर्मियों की जान, स्थानीय व्यापार और रिटेल सिस्टम की रक्षा होगी।
मिलावटी खाने के खिलाफ सख्त आवाज
खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा उठाकर भी चड्ढा ने लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने संसद में कहा कि बाजार में शुद्धता के नाम पर जहर बेचा जा रहा है। दूध में यूरिया, आइसक्रीम में डिटरजेंट, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन और पनीर में कास्टिक सोडा जैसी मिलावट के आरोप उन्होंने लगाए। उन्होंने कहा कि 71 प्रतिशत दूध के नमूनों में यूरिया और 64 प्रतिशत में सोडियम बाइकार्बोनेट मिला है। देश में जितना दूध बिक रहा है, उतना उत्पादन भी नहीं होता। उनके मुताबिक, यह देश का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट है।
निवेशकों के लिए LTCG खत्म करने की मांग
बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान चड्ढा ने इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को शून्य करने की मांग की। उनका तर्क है कि इससे लोग सोने-चांदी या प्रॉपर्टी की बजाय शेयर बाजार में निवेश करेंगे। उन्होंने कहा कि जब सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) पहले से लागू है, तो LTCG को जारी रखना लॉन्ग-टर्म निवेशकों को हतोत्साहित करेगा। उन्होंने स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, यूएई, हांगकांग और न्यूजीलैंड जैसे देशों का उदाहरण दिया, जहां लॉन्ग-टर्म इक्विटी पर टैक्स नहीं लगता। साथ ही, उन्होंने FIIs के पैसे निकालने पर चिंता जताई और बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव न होने की आलोचना की।
जमीन रिकॉर्ड पर ब्लॉकचेन का सुझाव
भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड की अव्यवस्था को उन्होंने “सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में एक” बताया। आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 66% सिविल विवाद जमीन से जुड़े हैं, 45% संपत्तियों के पास क्लियर टाइटल नहीं है और 48% संपत्तियां विवादों में फंसी हैं। भारत संपत्ति पंजीकरण में 190 देशों में 133वें स्थान पर है और 6.2 करोड़ दस्तावेज अभी डिजिटाइजेशन का इंतजार कर रहे हैं।
In Parliament, I explained why India must put land & property records on BLOCKCHAIN.
Land records in India are in utter chaos. Ordinary citizens are made to run from pillar to post at registrar offices, while dalals and middlemen capture the system. Circle rates are exploited to… pic.twitter.com/zeI4KzL0mz
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) February 10, 2026
चड्ढा ने नेशनल ब्लॉकचेन प्रॉपर्टी रजिस्टर बनाने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता आएगी, ट्रांजैक्शन मिनटों में होंगे और भ्रष्टाचार घटेगा। उन्होंने स्वीडन, जॉर्जिया और यूएई का उदाहरण दिया।
क्यों दिखती है उनमें प्रधानमंत्री की छवि?
इसलिए ये कहना गलत नही होगा कि राघव चड्ढा ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जो सीधे आम आदमी की जेब, सेहत और भविष्य से जुड़े हैं। एयरपोर्ट की महंगी चाय से लेकर मिलावटी दूध, गिग वर्कर्स की सुरक्षा से लेकर निवेशकों के टैक्स तक उनकी राजनीति का दायरा व्यापक है।
यही कारण है कि युवाओं और मध्यम वर्ग का एक तबका उन्हें बदलाव की आवाज मानने लगा है। हालांकि प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना लंबी राजनीतिक यात्रा है, लेकिन जिस तरह वे अलग-अलग मोर्चों पर सक्रिय हैं, उसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक गंभीर दावेदार के रूप में स्थापित कर दिया है।




























