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Gurdwaras in Hong Kong: हांगकांग में सिखों का डंका ब्रिटिश काल से आज तक, 100 साल से ज्यादा का गौरवशाली इतिहास

Shikha Mishra | Nedrick News
Hong Kong
Published: 13 Feb 2026, 08:23 AM | Updated: 13 Feb 2026, 08:23 AM

Gurdwaras in Hong Kong:  वैसे तो हांगकांग को आज के समय में चीन का एक हम हिस्सा माना जाता है लेकिन क्या आप ये जानते है कि 1997 से पहले तक हांगकांग चीन का नहीं बल्कि ब्रिटेन का हिस्सा था, इस पर ब्रिटिश का शासन था, ब्रिटिश रूल के दौरान सेना के सदस्य के तौर पर ब्रिटेन ने सिखों को हांगकांग भी भेजा है, और आज के समय में वहां करीब 15 हजार सिख रहते है, जो एक सदी से भी ज्यादा समय से हांगकांग का हिस्सा है। हांगकांग पूरी दुनिया के इन क्षेत्रों में से एक है जहां सिखों को अपनी पगड़ी के साथ आधुनिक हांगकांग पुलिस बल में शामिल होने की अनुमति दी गई है।

हांगकांग का एकमात्र गुरुद्वारा

इसके लिए सिख कैडेटों को उनकी वर्दी के हिस्से के रूप में उनकी सबसे बड़ी पहचान पगड़ी पहनने की अनुमति देने के लिए नीतियो में बदलाव तक कर दिये। इतना ही नहीं वर्तमान में हांगकांग के मूल कैंटोनीज़ हांगकांग के लोग भी सिख धर्म की तरफ आकर्षित हो रहे है और सिख धर्म अपना रहे है। और यहीं कारण है कि हांगकांग का एकमात्र गुरुद्वारा उन्हें फिर से शुरु करना पड़ा। जी हां, अपने इस वीडियो में हांगकांग में मौजूद गुरुद्लारों के बारे मं बात करेंगे.. जो वहां के सिखों की सबसे बड़ी शान औऱ उनकी धार्मिक पहचान का प्रतीक है।

गुरुद्वारा खालसा दीवान सिख टेंपल – Gurdwara Khalsa Diwan Sikh Temple

गुरुद्वारा- खालसा दीवान सिख टेंपल- हांगकांग का एकमात्र सिख टेंपल, जिसे गुरुद्वारा- खालसा दीवान सिख टेंपल के नाम से जाना जाता है, ये हांगकांग के वान चाई डिस्ट्रिक्ट में एक गुरुद्वारा है, जो हांगकांग आइलैंड पर क्वीन्स रोड ईस्ट और स्टब्स रोड के जंक्शन पर स्थित है। मौजूदा समय में जो गुरुदवारा यहां नजर आता है वो असल में 5 सालो तक बंद रहने के बाद 8 नवंबर 2022 को हांगकांग SAR के चीफ एग्जीक्यूटिव, जॉन ली का-चियू ने फिर से रिओपन किया था। इस गुरुद्वारे का इतिहास 1901 से शुरु होता है, जब सिखों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए ब्रिटिश आर्मी के सिख सैनिकों ने इस गुरुद्वारे का निर्माण कराया था जिसे श्री गुरु सिंह सभा कहा जाता था।

बमबारी में गुरुद्वारे को काफी नुकसान

साल 1930 तक सिखो के लिए यहीं गुरुद्वारा था, लेकिन धीरे धीरे समय के साथ .यहां जनसंख्या बढ़ी और फिर 1930 के आसपास गुरुद्वारे को और बड़ा करने का फैसला किया गया और 1930 में इसका विस्तार भी किया गया लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध में हुई बमबारी में गुरुद्वारे को काफी नुकसान हुआ और गुरुद्वारे में पाठ कर रहे ग्रंथी की मौत हो गई.. लेकिन 1945 में इस गुरुद्वारे को फिर से बनाने की शुरुआत हुई..जिसमें इस बार बड़ी संख्या में हांगकांग आकर बसे सिंधी हिंदुओं ने मदद की थी। जिसके बाद 1980 तक गुरुद्वारे का विस्तार नहीं किया गया, लेकिन 1980 में फिर से इस गुरुद्वारे का विस्तार किया गया और  क्वींस रोड ईस्ट पर एक पुल से इस गुरुद्वारे को जोड़ कर बढ़ाया गया।

खालसा दीवान सिख मंदिर का रिकंस्ट्रक्शन

धीरे धीरे कई बार गुरुद्वारे को बढ़ावा गया, इसे और भव्य बनाया गया, लेकिन 2008 में इसे 4 मंजिला तक बनाया गया। मगर 2013 में पाया गया कि गुरुद्वारे की पुरानी दीवारो में दरार पड़ गई है और तय किया गया कि इसका रिनोवेशन किया जायेगा। 2017 से, खालसा दीवान सिख मंदिर का रिकंस्ट्रक्शन शुरू हुआ और 2022 में इसे फिर से खोल दिया गया। करीब 5 सालों के लिए इस गुरुद्वारे को बंद कर इसका रिनोवेशव किया गया। इस बार इसे करीब 76,000 स्क्वायर फीट में बनाया गया है। जिसमें एक बड़ा प्रार्थना हॉल, एक लाइब्रेरी, कई क्लासरूम और कॉन्फ्रेंस रूम बनाया गया हैं।

इस गुरुद्वारे में आने वाले को सिख कल्चर के बारे में करीब से जानने का मौका मिलता है। इसके किचन कम्युनिटी किचन कहा जाता है, जहां भारत और पाकिस्तान से आने वाले नए माइग्रेंट्स के लिए फ्री रहने की जगह भी मुहैया कराई जाती है। यहां हर हफ्ते करीब 5000 लोग लंगर खाते है। हांगकांग का ये ऐतिहासिक गुरुद्वारा केवल इतिहास की दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक सौहार्द के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुरुद्वारा- खालसा दीवान सिख टेंपल अपने आज के रूप में आने से पहले कई बार टूटा, कई बार बना, लेकिन इसकी चमक कभी कम नहीं पड़ी। 100 साल पहले हो या वर्तमान का समय सिखों के लिए सबसे अहम जीवन का हिस्सा है। गुरुद्वारा- खालसा दीवान सिख टेंपल हांगकांग के सिखो के लिए उनकी सबसे बडी शान के रूप में खड़ा है.. जो हर हाल में सिक्खी की चमक को बनाये रखें है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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