Manipur Gangrape Victim Death: मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुई बर्बरता की एक और भयावह तस्वीर सामने आई है। कुकी-ज़ो समुदाय की 20 वर्षीय युवती की 11 जनवरी को मौत हो गई, जो करीब ढाई साल पहले सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थी। परिजनों का आरोप है कि यौन हिंसा के बाद हुए गहरे मानसिक और शारीरिक आघात से वह कभी उबर नहीं पाई और आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई।
15 मई 2023 को हुआ था अपहरण और गैंगरेप (Manipur Gangrape Victim Death)
परिजनों के मुताबिक, 15 मई 2023 की शाम इंफाल के न्यू-चेकॉन इलाके में एक एटीएम के पास से कुछ लोगों ने युवती का अपहरण कर लिया था। उस समय मणिपुर में कुकी-ज़ो और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा अपने चरम पर थी। आरोप है कि युवती को पहले सफेद रंग की एक कार में ले जाया गया, उसके साथ मारपीट की गई और बाद में लैंगोल इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।
घटना के वक्त युवती महज 17 साल की थी। वह किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर भागने में सफल रही, लेकिन यौन हिंसा का गहरा सदमा उसके मन और शरीर पर स्थायी असर छोड़ गया।
इलाज चलता रहा, लेकिन हालात बिगड़ते गए
युवती की मां ने बताया कि घटना के बाद से उनकी बेटी लगातार मानसिक तनाव, डर और गंभीर शारीरिक समस्याओं से जूझ रही थी। उसे कांगपोकपी से लेकर गुवाहाटी तक कई अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया।
परिजनों का कहना है कि गैंगरेप के दौरान उसके गर्भाशय को गंभीर चोटें आई थीं। इसके अलावा वह पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसे लक्षणों से भी पीड़ित थी। उसे साइकियाट्रिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट की दवाएं दी जा रही थीं, लेकिन उसकी हालत में कोई स्थायी सुधार नहीं हो पाया।
11 जनवरी को हुई मौत
11 जनवरी को युवती की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उसे उल्टियां हुईं और फिर सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे संभाल पाते, उससे पहले दोपहर करीब तीन बजे उसकी मौत हो गई।
मां का आरोप है कि सफेद रंग की कार देखते ही बेटी को घबराहट होने लगती थी और कई बार उसकी सांस अटक जाती थी। उनका कहना है कि यौन हिंसा का डर और सदमा ही आखिरकार उसकी मौत की वजह बना।
एफआईआर हुई, लेकिन कार्रवाई पर सवाल
इस मामले में जुलाई 2023 में कांगपोकपी थाने में ज़ीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में सामूहिक बलात्कार, हमला, हत्या की कोशिश और अपहरण जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। युवती ने अपनी लिखित शिकायत में हथियारों के साथ आए चार लोगों द्वारा अगवा किए जाने का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मणिपुर हिंसा के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुए कई मामलों के साथ इस केस को भी 22 जुलाई 2023 को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। शुरुआती तौर पर कुछ गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें जांच की प्रगति की कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई।
कुकी-ज़ो समुदाय में आक्रोश
युवती की मौत के बाद कुकी-ज़ो समुदाय में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कमेटी ऑन ट्राइबल इंटेग्रिटी के प्रवक्ता लुन किपगेन ने कहा कि ढाई साल बीतने के बावजूद इस मामले में न तो आरोप तय हुए हैं और न ही कोई निर्णायक कार्रवाई सामने आई है।
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने इस घटना को मणिपुर हिंसा के दौरान हुए “अनसुलझे और क्रूर अत्याचारों का प्रतीक” बताया है। वहीं कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन की दिल्ली यूनिट ने भी बयान जारी कर यौन हिंसा के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की है।
न्याय की मांग पर कायम परिवार
मृतका की मां ने साफ कहा है कि उनकी बेटी को जीते जी इंसाफ नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार बेटियों की सुरक्षा की बात करती है तो उनकी बेटी के साथ ऐसा क्यों हुआ। परिवार ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग की है।






























