Gold-Silver ETF: ग्लोबल अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण कीमती धातुओं के दाम में उछाल रुक नहीं रही है। सोना और चांदी के दाम अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं। इस बीच, सिल्वर और गोल्ड ETF में भी खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। ज्यादातर निवेशकों ने तो इन मेटल में SIP तक शुरू कर दी है। दूसरी ओर, सालाना आधार पर सोने की कीमतों में 80 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है, जबकि चांदी की कीमतें 190 फीसदी बढ़ी हैं। वहीं पिछले एक साल में सिल्वर ETF में 188% की उछाल आई है और गोल्ड ईटीएफ ने 80 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। सिल्वर और गोल्ड ETFs अपने रिकॉर्ड हाई पर बने हुए हैं। आइए जानते हैं क्या इसमें प्रॉफिट बुक करने का सही मौका है।
एक साल में ऐसा रिटर्न कि सब चौंक जाएं (Gold-Silver ETF)
अगर पिछले एक साल की तस्वीर देखें तो आंकड़े हैरान करने वाले हैं। सोने की कीमतों में सालाना आधार पर 80 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है। वहीं चांदी ने तो निवेशकों को दोगुना से भी ज्यादा फायदा दिया है इसकी कीमतें करीब 190 फीसदी तक उछल चुकी हैं। ETF की बात करें तो सिल्वर ETF में बीते एक साल में करीब 188 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है, जबकि गोल्ड ETF ने भी 80 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। फिलहाल दोनों ही ETF अपने रिकॉर्ड हाई के आसपास बने हुए हैं।
तेजी देखकर निवेश बढ़ाएं या मुनाफा निकालें?
इस तेज रफ्तार के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब निवेशक क्या करें। बाजार के जानकारों की राय थोड़ी संभलकर चलने की है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतनी तेज उछाल के बाद नए निवेश के लिए यह समय ज्यादा सुरक्षित नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जो अभी लॉन्गटर्म निवेश शुरू करना चाहते हैं।
जो निवेशक पहले से सोना या चांदी में निवेश किए हुए हैं, उनके लिए सलाह है कि वे पूरी तरह बाहर निकलने की जल्दबाजी न करें। हालांकि, अतिरिक्त पैसा लगाने से फिलहाल बचना बेहतर होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर पर थोड़ी प्रॉफिट बुकिंग करके पोर्टफोलियो को संतुलित करना समझदारी भरा कदम हो सकता है। करेक्शन आने पर दोबारा खरीदारी पर विचार किया जा सकता है।
FOMO में लिया गया फैसला पड़ सकता है भारी
Certified Financial Planner और फाइनेंशियल रेडियंस के संस्थापक राजेश मिनोचा के मुताबिक, जब किसी एसेट में तेज उछाल आता है तो निवेशकों में FOMO यानी “मौका छूट जाने का डर” पैदा हो जाता है। इसी वजह से लोग ऊंचे भाव पर भी खरीदारी कर लेते हैं, जो बाद में नुकसान का कारण बन सकती है। उनका कहना है कि चांदी लॉन्गटर्म में मजबूत जरूर है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसमें गिरावट का खतरा बना हुआ है। करीब 200 फीसदी की तेजी के बाद अभी नया निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
सोना और चांदी पर एक्सपर्ट्स की दो टूक राय
फिस्डम के रिसर्च उपाध्यक्ष सागर शिंदे का मानना है कि चांदी के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने से रिस्क लेवल काफी बढ़ गया है। जो निवेशक अच्छे मुनाफे में हैं, वे शॉर्ट टर्म में कुछ प्रॉफिट बुक कर सकते हैं। वहीं सोने को लेकर भी विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड हाई के बाद थोड़ी स्थिरता का इंतजार करना चाहिए। लॉन्गटर्म नजरिए से गोल्ड में बने रहना ठीक है, लेकिन इस वक्त नया निवेश टालना बेहतर होगा।
चांदी इतनी तेज क्यों भाग रही है?
चांदी की तेजी के पीछे कई वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर एनर्जी जैसे सेक्टरों में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब इसे सिर्फ सोने के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल माना जा रहा है। इसके अलावा ग्लोबल टेंशन के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में भी चांदी की मांग बढ़ी है। सप्लाई की कमी और माइनिंग में सीमित निवेश ने भी कीमतों को ऊपर पहुंचाने में भूमिका निभाई है।
MCX पर ताजा भाव
MCX पर 5 मार्च वायदा के लिए चांदी के दाम करीब 600 रुपये की तेजी के साथ 2,92,152 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए, जो इसके रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब है। वहीं 5 फरवरी वायदा के लिए सोना करीब 70 रुपये की गिरावट के साथ 1,43,056 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा।
नोट: सोना-चांदी की मौजूदा तेजी भले ही आकर्षक लगे, लेकिन इसमें जोखिम भी कम नहीं है। इसलिए किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेना इस वक्त सबसे समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।






























