Subrata Roy Sahara story: सोचिए… गोरखपुर का एक लड़का, हाथ में कोई बड़ी पूंजी नहीं, न कोई बड़ा सरनेम, बस जेब में हजार-डेढ़ हजार रुपये और आंखों में बड़े सपने। वही लड़का कुछ सालों में ऐसा नाम बनाता है कि उसका काफिला चले तो सड़कें रुक जाएं, क्रिकेट टीम उसकी जर्सी पहनकर मैदान में उतरे और विदेशी होटलों में भी उसका झंडा लगे। लेकिन हर चमकदार कहानी का एक स्याह मोड़ भी होता है। जब तालियों की जगह सवाल खड़े हो जाएं और शाही अंदाज़ की जगह पुलिस की गाड़ी आ खड़ी हो। सुब्रत रॉय सहारा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है… एक आम आदमी से ताक़तवर टाइकून बनने और फिर विवादों के भंवर में फंसने की कहानी।
सहारा ग्रुप की नींव और विस्तार: Subrata Roy Sahara story
गोरखपुर का एक 30 साल का नौजवान, जिसके पास सिर्फ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा था और जेब में महज़ एक से डेढ़ हजार रुपये, 1978 में अपना कारोबार शुरू करता है। यही नौजवान बाद में बनता है सुब्रत रॉय… सहारा ग्रुप का चेयरमैन। शुरुआत उन्होंने छोटे जमाकर्ताओं को जोड़कर सहारा बैंकिंग से की, और धीरे-धीरे एक ऐसा भरोसे का जाल बुन लिया, जो गांव-गांव तक फैला। इसके बाद ग्रुप ने रुकने का नाम ही नहीं लिया। फाइनेंस के बाद रीयल एस्टेट, हाउसिंग, मीडिया, हेल्थकेयर, एंटरटेनमेंट, कंज्यूमर गुड्स, टूरिज्म और रिटेल… हर क्षेत्र में सहारा ने कदम रखा और उसे अपना बनाया।
जब सुब्रत रॉय सहारा के बेटे की शादी में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ बारात में नाच रहे थे, देश के प्रधानमंत्री घुटने ख़राब होने के बावजूद मंच पर चढ़ कर वरवधू को आशीर्वाद दे रहे थे। देश का कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा था जिसकी गिनती देश के बड़े लोगों में होती हो… pic.twitter.com/XhyIBfympy
— Krishan Choudhary (@choudharykrs) January 15, 2026
देश-विदेश में ‘स्वप्न लोक’ जैसी प्रॉपर्टी
सुब्रत रॉय और सहारा ग्रुप कई बार अपनी शानदार प्रॉपर्टीज़ को लेकर चर्चा में रहे। मुंबई की एंबे वैली सिटी, लंदन का ग्रॉसवर्नर हाउस और न्यूयॉर्क का प्लाजा होटल… ये सब सहारा के ग्लोबल सपनों की पहचान बने। टाइम मैगजीन जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में सुब्रत रॉय की उपलब्धियों को जगह मिली। सहारा इंडिया परिवार का हेडक्वार्टर लखनऊ में रहा, जहां से पूरे समूह का संचालन होता था।
रीयल एस्टेट से मीडिया तक पकड़
सहारा ने रीयल एस्टेट और हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के जरिए देशभर में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी और आवासीय योजनाएं शुरू कीं। लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, हैदराबाद, भोपाल, कोच्चि, गुड़गांव और पुणे जैसे शहरों में सहारा के प्रोजेक्ट्स दिखाई देने लगे। अमेरिकन बिल्डिंग कंपनी से भी गठजोड़ हुआ। मीडिया के क्षेत्र में सहारा ने हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के न्यूज और एंटरटेनमेंट चैनल, अखबार और मैगज़ीन शुरू किए। मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सहारा स्टार होटल और विदेशों में होटल भी खोले गए।
एयरलाइंस, रिटेल और पावर सेक्टर में एंट्री
सहारा ने एयर सहारा की शुरुआत कर एविएशन सेक्टर में कदम रखा। डेढ़ साल पहले रिटेल सेक्टर में ‘क्यू शॉप’ की शुरुआत हुई। उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी सहारा ने निवेश किया। शिक्षा के क्षेत्र में राजधानी लखनऊ में सहारा कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज खोला गया।
खेल और ग्लैमर की दुनिया में दखल
सहारा ग्रुप लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट टीम का स्पॉन्सर रहा। हॉकी टीम को भी सहारा का समर्थन मिला। फॉर्मूला-वन रेस में भी ग्रुप के बड़े स्टेक थे। खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों के साथ नजदीकियों की वजह से सुब्रत रॉय अक्सर सुर्खियों में रहे। एंबे वैली खिलाड़ियों की पसंदीदा जगह मानी जाती थी।
लखनऊ में भारी निवेश
लखनऊ में सहारा सिटी, सहारा एस्टेट और सहारा होम्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स बनाए गए। गोमती नगर में 350 बेड का सहारा हॉस्पिटल तैयार हुआ। हजरतगंज इलाके में सहारा मॉल बनाकर मॉल कल्चर की शुरुआत करने वालों में सहारा शामिल रहा। कई इलाकों में क्यू शॉप खोली गईं।
सुरक्षा ऐसी कि मुख्यमंत्री भी पीछे रह जाएं
इतना ही नहीं, सुब्रत रॉय की सुरक्षा व्यवस्था भी हमेशा चर्चा का विषय रही। निजी सुरक्षा गार्ड्स के साथ भारी पुलिस बल उनके साथ चलता था। सहारा के काफिले में विदेशी गाड़ियां, सरकारी पुलिस वाहन और वकीलों की पूरी टीम शामिल रहती थी। कई बार उनकी सिक्योरिटी को देखकर लोग कहते थे कि यह किसी मुख्यमंत्री से कम नहीं है।
जब गिरफ्तारी ने सबको चौंकाया
फिर आया वो समय जब सुब्रत रॉय की गिरफ्तारी ने सबको चौंकाया दिया। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के गैर-जमानती वारंट पर कार्रवाई करते हुए लखनऊ पुलिस ने सुब्रत रॉय को सहारा सिटी, गोमती नगर से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 4 मार्च तक गोमती नगर पुलिस की कस्टडी में भेज दिया। सुरक्षा कारणों से उन्हें कुकरैल गेस्ट हाउस में रखने का फैसला हुआ। रॉय ने घर पर रहने की इच्छा जताई और मेडिकल जांच कराने से भी इनकार किया। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की जिम्मेदारी पुलिस को सौंपी गई।
नॉन बेलेबल वारंट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
वहीं, अवमानना मामले में जारी गैर-जमानती वारंट को वापस लेने की सुब्रत रॉय की दो बार की गई अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट अपने फैसले पर कायम रहा।
कोर्ट में पढ़ा गया बयान
सीजेएम कोर्ट में सुब्रत रॉय की ओर से एक बयान पढ़ा गया, जिसमें कहा गया, “मेरे ऑफिस, सहकर्मी, परिवार और मीडिया से लगातार फोन और मैसेज आ रहे हैं। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि मेरा देश इससे बेहतर मेरा सम्मान नहीं कर सकता।”
सेबी विवाद और सहारा की सफाई
सहारा समूह ने दावा किया कि उसने सेबी के पास 5,120 करोड़ रुपये जमा कराए हैं, जो निवेशकों को लौटाने के लिए हैं। इस बीच बीएसई में सहारा वन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट और सहारा हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन के शेयरों में गिरावट भी देखी गई।
गिरफ्तारी की असली वजह
सुब्रत रॉय की चमक-धमक और कारोबार के पीछे विवाद भी छुपा था। सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने 2008 से 2011 के बीच रियल एस्टेट में निवेश का नाम लेकर वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) जारी किए। इस दौरान तीन करोड़ से ज्यादा निवेशकों से करीब 17,400 करोड़ रुपये जुटाए गए।
सितंबर 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने अपना आईपीओ (Initial Public Offering) लाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दस्तावेज जमा किए। लेकिन सेबी को दस्तावेजों में गड़बड़ी का अंदेशा हुआ। इसके बाद रोशन लाल नाम के एक व्यक्ति ने सेबी के पास शिकायत की, जिससे मामले की जांच तेज हो गई। अगस्त 2010 में सेबी ने दोनों कंपनियों की जांच करने के आदेश दिए, और यही सिलसिला आगे चलकर सुब्रत रॉय की गिरफ्तारी तक पहुंचा।
सम्मानों से भी भरी रही जिंदगी
आपकी जानकारी के लिए बता दें, सुब्रत रॉय को देश-विदेश से कई बड़े सम्मान मिले डॉक्टरेट की मानद उपाधि, बिजनेस आइकॉन ऑफ द ईयर, इंडिया टुडे द्वारा प्रभावशाली व्यवसायियों में नाम, टाइम मैगजीन की सूची, कर्मवीर सम्मान, उद्यम श्री और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार।
सुब्रत रॉय की कहानी जहां एक ओर असाधारण सफलता की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर यह दिखाती है कि ऊंचाइयों के साथ विवाद और चुनौतियां भी चलती हैं।






























