Mini Punjab in Jammu: जम्मू कश्मीर और सिखों का रिश्ता काफी खूबसूरत और कई सदी पुराना है, सिखों ने न केवल जम्मू कश्मीर की खूबसूरत घाटी को अपना बसेरा बनाया बल्कि सिखों की बहादुरी की मिशाल कहते हुए भी आपको कई धरोहर मिल जायेंगे… जो बताते है कि आखिक क्यों और कैसे सिख धर्म यहां की मिट्टी की सबसे बड़ी शान बन गया। खासकर जब जम्मू की बात होती है तो सबसे पहले आपके जेहन में साहसी बहादुर बंदा सिंह बहादुर जरूर आते है, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक मुगलो के छक्के छुड़ा दिये थे…
जबकि वो खुद सिख धईम में नहीं जन्में थे, लेकिन दशम गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें न केवल सिख धर्ण अपनाने पर विवश किया था, बल्कि वो सिख धर्म के बड़े बहादुर लड़ाको में भी शामिल हो गए, उनकी बाहुदरी और महानता के चर्चे आज भी सिख बुजुर्ग अपने बच्चों को सुनाते है, ताकि सिख बच्चें उनकी ही तरह बन सकें.. ये तो केवल एक सिख की कहानी थी… ऐसे अनगिनत कहानियां है जम्मू की धरती पर… जहां न केवल बहुत संख्या में है बल्कि उन्होंने जम्मू में एक मिली पंजाब भी बसा दिया है, अपने इस वीडियो में हम जम्मू में मौजूद मिली पंजाब के बारे में जानेंगे… जो सिखों को अलग पहचान देता है।
जम्मू के बारे में जानकरी
जम्मू का नाम अकेले कभी नहीं लिया जाता है बल्कि इसके साथ कश्मीर भी इस के साथ जुड़ा हुआ है। जम्मू कश्मीर एक साथ मिलकर एक राज्य और भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश बनता है। हालांकि जम्मू के बसने के पीछे इसका अपना इतिहास है। इतिहासकारों की माने तो राय जम्बुलोचन ने इसकी स्थापना की 14 वीं शताब्दी में की और इसका नाम रखा जम्बुपुरा या फिर जंबूनगर जो समय के साथ बदलता रहा और बिगड़ कर जम्मू हो गया। जम्मू संभाग, जम्मू और कश्मीर की शीतकालीन राजधानी भी है।
जम्मू नगरमहापालिका वाला नगर है जो कि तवी नदी के तट पर बसा है। दुनिया भर में प्रचलित कटरा का वैष्णो देवी मंदिर जम्मू में ही स्थित है। जम्मू को असल में मंदिरों का नगर कहा जाता है। वहीं जम्मू का क्षेत्रफल 240 वर्ग किलोमीटर है। वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू की आबादी 502197 के आसपास थी। 2024 में जम्मू शहर की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 711,000 के आसपास थी। कश्मीर जहां मुस्लिम बहुल आबादी वाला क्षेत्र है तो वहीं जम्मू हिन्दू बहुल वाला क्षेत्र है। जम्मू को शांति और सद्भावना से भरा हुआ क्षेत्र माना जाता है। कश्मीर जहां कट्टरपंथियों के कारण अशांत रहता है तो वहीं जम्मू का वातावरण इसके उल्टा रहता है। जम्मू में सभी शांति और आपसी सौहार्द के साथ रहते है।
जम्मू में सिख धर्म की शुरुआत
जब बात जम्मू में सिखों के इतिहास और वर्तमान मौजूदगी की होती है तो ये बिल्कुल पंजाब में रहने वाले सिखों से जुड़ा हुआ है। सिखो के पहले शासक महाराजा रणजीत सिंह जी ने जम्मू कश्मीर में अपना न केवल अधिपत्य जमाया था बल्कि सिखों के लिए यहां के दरवाजे भी खोल दिए। लेकिन 1947 में देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान के हिस्से में रहने वाले सिखो ने भारत के इस हिस्से में आकर रहना शुरू कर दिया। खासकर ये सिख पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भाग कर आए हुए थे। इसमें से कुछ देश के अलग अलग हिस्सों के गए तो वहीं ज्यादातर जम्मू कश्मीर में बस गए। हालांकि 1990 में कश्मीर में केवल कश्मीरी पंडितों का ही विस्थापन नहीं हुआ बल्कि करीब 30 हजार सिखो का भी विस्थापन हुआ था। जो जम्मू में आकर बस गए थे।
इसलिए कश्मीर के मुकाबले जम्मू में सिखों की आबादी ज्यादा है। आपको जानकार हैरानी होगी कि 2011 के जम्मू में ही 114,000 सिख थे जो कि समय के साथ बढ़ी ही है। यहां अमूमन पंजाबी भाषी सिखो की आबादी ज्यादा है और यहाँ के जाट समुदाय में सिख और हिन्दू आपस में विवाह संबंध रखते हैं, जो यहां पर सिखो और हिंदुओं के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। जम्मू के सिखो के हितों की रक्षा के लिए सिख महासंघ, सिख फेडरेशन जैसे संगठन बनाए हुए हुए है जो कि सिखो की सामाजिक और राजनैतिक तौर पर ताकत बन कर खड़े रहते है। हालांकि सीमावर्ती इलाके में रहने वाले पहाड़ी भाषा बोलते है। यहां ज्यादातर सिख पूंछ, राजौरी और उसके आसपास के इलाके ने रहते है।
जम्मू का मिनी पंजाब
जम्मू के नानक नगर इलाका, जहां दो बड़े और पुराने गुरुद्वारे है, इसे यहां के लोग वड्डा गुरुद्वारा कहते है। इस इलाके में सिखो की सक्रियता को देखते हुए नानक नगर को मिनी पंजाब भी कहा जाता है। नानक नगर के सिख चुनावी समीकरण को बनाने और बिगड़ने में अहम रोल अदा करते है। इतना ही नहीं चुनावो के दौरान कई बड़ी पार्टियां अपनी रैलियां इस इलाके में करती नजर आती है और यहां की सिख जनसंख्या को साधने की कोशिश करती है क्योंकि यहां रहने वाले सिख किसी भी पार्टी का चुनावी समीकरण बदलने की ताकत रखते है।
सिख गुरुद्वारा जम्मू में
जम्मू के नानक नगर के दो महान गुरुद्वारे यहां के सिखो की मजबूती तो कहते ही है लेकिन उसी के साथ सिखों के महान इतिहास की कहानी कहते हुए कई विशाल और ऐतिहासिक गुरुद्वारे है। जिसमें गुरुद्वारा गुरु नानक देव जी, गुरुद्वारा कालगीधर, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, गुरु द्वारा छठी पातशाही, जैसे गुरुद्वारे काफी प्रचलित है। जम्मू में असल में हिंदुओं और मुसलमानों के बाद सुख समुदाय काफी मजबूर और प्रभावशाली समुदाय है। सिख धर्म की खुशबू को आप जम्मू की मिट्टी में आसानी से महसूस कर सकते है।






























