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Atishi Latest controversy: अपराध, बेरोज़गारी और न्याय पीछे… आगे है धर्म का शोर, आतिशी विवाद में फिर बीजेपी की वही पुरानी राजनीति

Nandani | Nedrick News
Delhi
Published: 09 Jan 2026, 04:57 PM | Updated: 10 Jan 2026, 09:48 PM

Atishi Latest controversy: देश इस वक्त बेरोजगारी, महंगाई, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, अंकिता भंडारी और उन्नाव रेप केस जैसे जघन्य मामलों की यादों से जूझ रहा है, लेकिन राजनीति का फोकस एक बार फिर धर्म से जुड़े विवाद पर टिक गया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी को लेकर खड़ा हुआ ताजा विवाद इसी कड़ी का हिस्सा बनता दिख रहा है। सवाल यह नहीं है कि किसी नेता ने क्या कहा, बल्कि यह है कि क्या देश के असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धर्म को बार-बार हथियार बनाया जा रहा है?

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कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद (Atishi Latest controversy)

आगे बढ़ने से पहले आईए अपको इस विवाद के बारे में बता देते हैं। दरअसल दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान यह आरोप लगाया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने पिछले साल नवंबर में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर हुई विशेष चर्चा के बाद कथित तौर पर असंवेदनशील टिप्पणी की थी। इस आरोप के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने न सिर्फ विरोध किया, बल्कि आतिशी की विधानसभा सदस्यता रद्द करने तक की मांग कर डाली।

भाजपा का दावा था कि आतिशी ने सिख गुरु के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। देखते ही देखते यह मुद्दा दिल्ली से निकलकर पंजाब तक पहुंच गया और सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए।

फोरेंसिक जांच ने खोली पोल

इस पूरे मामले में अहम मोड़ तब आया जब दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा की आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। जांच के बाद पंजाब पुलिस की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें साफ कहा गया कि आतिशी ने अपनी स्पीच में कहीं भी “गुरु” शब्द का इस्तेमाल ही नहीं किया था।

यानि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो क्लिप्स से छेड़छाड़ की गई थी। ऑडियो में ऐसे शब्द जोड़े गए थे, जो आतिशी ने बोले ही नहीं थे। इसके बाद जालंधर पुलिस ने इकबाल सिंह की शिकायत पर वीडियो को तोड़-मरोड़कर अपलोड और प्रसारित करने के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली।

जालंधर पुलिस की FIR और बढ़ती सियासी हलचल

जालंधर पुलिस कमिश्नरेट के प्रवक्ता के मुताबिक, सोशल मीडिया पर जानबूझकर भड़काऊ सुर्खियों के साथ एक एडिटेड वीडियो फैलाया गया, ताकि आतिशी को गुरुओं के खिलाफ बोलते हुए दिखाया जा सके। यह साफ तौर पर तकनीक के दुरुपयोग और राजनीतिक मकसद से किया गया कृत्य बताया गया।

इसके बावजूद भाजपा का विरोध थमता नहीं दिखा। पार्टी ने पंजाब और दिल्ली में प्रदर्शन किए और आम आदमी पार्टी पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया। दिल्ली में AAP कार्यालय के बाहर धरना दिया गया और आतिशी के साथ-साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी इस्तीफे की मांग की गई।

बीजेपी के आरोप और बयान

भाजपा महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता बार-बार हिंदू और सिख धर्म से जुड़े विषयों पर आपत्तिजनक बयान देते रहे हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ दिल्ली या पंजाब का मामला नहीं, बल्कि पूरे देश की संस्कृति और स्वाभिमान से जुड़ा सवाल है। चुघ ने यह भी कहा कि सिख समाज पहले भी AAP नेताओं के बयानों से आहत हो चुका है और अब सब्र का बांध टूट गया है।

आतिशी का पलटवार: “झूठ और नफरत की राजनीति”

वहीं आतिशी ने भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिख समाज और गुरुओं से नफरत की राजनीति करती है और इस बार भी गुरु तेग बहादुर जी के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया। आतिशी ने आरोप लगाया कि वायरल वीडियो में दो बड़े झूठ बोले गए।

पहला, वीडियो को गुरु तेग बहादुर जी की शहादत दिवस की चर्चा से जोड़ दिया गया, जबकि असल में वह एलजी के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान का था।
दूसरा, उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि प्रदूषण और आवारा कुत्तों के मुद्दे से बचने के लिए उनकी बातों में झूठा सब-टाइटल जोड़कर गुरु तेग बहादुर जी का नाम घसीटा गया।

आतिशी ने भावुक होते हुए कहा, “मैं ऐसे परिवार से आती हूं जहां पीढ़ियों से सिख धर्म अपनाया जाता रहा है। मैं अपनी जान दे सकती हूं, लेकिन गुरु साहब का अपमान नहीं कर सकती।”

जब बीजेपी का अपना रिकॉर्ड कटघरे में

यहीं से सवाल और गहरे हो जाते हैं। जो पार्टी आज धर्म और गुरुओं के सम्मान की बात कर रही है, उसका खुद का रिकॉर्ड क्या हमेशा साफ रहा है? बीजेपी का नाम ऐसे कई बाबाओं और धार्मिक नेताओं से जुड़ चुका है, जो गंभीर अपराधों में सजा काट रहे हैं।

सबसे चर्चित नाम है गुरमीत राम रहीम सिंह का, जो बलात्कार और हत्या के मामलों में 20 साल की सजा काट रहा है। बावजूद इसके, 2022 में उसके वर्चुअल सत्संग में हरियाणा के करनाल की मेयर रेणु बाला गुप्ता, उप महापौर नवीन कुमार और अन्य भाजपा नेता शामिल हुए थे। यह तब हुआ, जब हरियाणा में चुनावी माहौल गर्म था।

आसाराम और बीजेपी नेताओं के पुराने रिश्ते

इसी तरह बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके आसाराम के साथ भी कई भाजपा नेताओं की नजदीकियां रही हैं। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक समय आसाराम की तारीफ में कहा था कि “जब तक आपका आशीर्वाद है, कुछ गलत हो ही नहीं सकता।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो एक वीडियो में आसाराम को भगवान तक कह दिया था। दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कभी उनके प्रशंसकों में गिने जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो भी सामने आता रहा है, जिसमें वह आसाराम के पैर छूते नजर आते हैं।

उन्नाव रेप केस और चुप्पी

इतना ही नहीं, उन्नाव रेप केस में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। उस वक्त भी पार्टी की भूमिका पर सवाल उठे थे। ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है, जहां गंभीर अपराधों के बावजूद राजनीतिक संरक्षण की बातें सामने आईं।

असली मुद्दे कहां हैं?

यही वह बिंदु है, जहां आम जनता सवाल पूछ रही है। जब देश में बेरोजगारी चरम पर है, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, अंकित भंडारी जैसे मामलों में न्याय की लड़ाई जारी है, तब क्या राजनीति का केंद्र सिर्फ यही रह गया है कि किसने धर्म पर क्या कहा?

आतिशी के मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट और एफआईआर साफ इशारा करती है कि वीडियो से छेड़छाड़ हुई। इसके बावजूद धर्म के नाम पर सियासी तूफान खड़ा किया गया। आलोचकों का कहना है कि यह रणनीति नई नहीं है, जब भी असली मुद्दों पर जवाब देने की बारी आती है, धर्म को आगे कर दिया जाता है।

राजनीति बनाम जिम्मेदारी

यह पूरा विवाद सिर्फ आतिशी या आम आदमी पार्टी तक सीमित नहीं है। यह उस राजनीति की तस्वीर दिखाता है, जहां धर्म सबसे आसान हथियार बन चुका है। सवाल यही है कि क्या देश को ऐसे मुद्दों की जरूरत है या फिर रोजगार, सुरक्षा और न्याय जैसे असली सवालों पर गंभीर बहस की?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक हर नया विवाद यही सोचने पर मजबूर करेगा कि कहीं धर्म की आड़ में जरूरी मुद्दों को जानबूझकर पीछे तो नहीं धकेला जा रहा।

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