Vanshika Yadav skating journey: शिकोहाबाद की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। न कोई रैली, न कोई शोर, बस स्केट्स पर चलती एक 9 साल की बच्ची और आंखों में अयोध्या का सपना। नाम है वंशिका यादव। जिसने यह ठान लिया कि अगर रामलला के लिए कुछ करना है, तो वो आम रास्ते से नहीं, अपने अंदाज़ में किया जाए। इसी सोच के साथ वंशिका स्केटिंग करते हुए शिकोहाबाद से अयोध्या के लिए निकल पड़ी है और हर पड़ाव पर लोगों के दिल जीत रही है।
ज़िद ऐसी कि पिता को लेनी पड़ी छुट्टी: Vanshika Yadav skating journey
दरअसल, वंशिका की जिद थी कि वह श्रीराम मंदिर स्केटिंग करते हुए ही जाएंगी। बेटी की इस भावना को देखकर पिता ने भी साथ देने का फैसला किया और छुट्टी लेकर इस यात्रा में शामिल हो गए। वंशिका मासूमियत से कहती हैं, “मोदी जी ने मंदिर बनाया है, तो मुझे भी तो कुछ करना चाहिए।” इसी सोच के साथ उनकी ‘सनातन यात्रा’ शुरू हुई, जो अब लोगों के दिलों को छू रही है।
कानपुर देहात में हुआ भव्य स्वागत
5 जनवरी को जब वंशिका स्केटिंग करते हुए कानपुर देहात पहुंचीं, तो वहां का नज़ारा देखने लायक था। टोल प्लाजा पर टोल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। एजीएम मनोज शर्मा के नेतृत्व में सभी ने बच्ची का उत्साह बढ़ाया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। छोटी सी उम्र में इतना लंबा और कठिन सफर तय करती वंशिका को देखकर हर कोई हैरान और भावुक नजर आया।
सनातन और आत्मनिर्भरता का संदेश
वंशिका बताती हैं कि उनकी इस यात्रा का मकसद सनातन धर्म के प्रति लोगों की आस्था को और मजबूत करना है। साथ ही वह यह भी दिखाना चाहती हैं कि बेटियां और महिलाएं भी अपने दम पर कुछ बड़ा कर सकती हैं। स्केटिंग के जरिए वह हर पड़ाव पर यही संदेश दे रही हैं। यही वजह है कि रास्ते में जहां-जहां वह पहुंच रही हैं, वहां लोग खुद-ब-खुद जुड़ते जा रहे हैं।
देशभर में चर्चा का विषय बनी वंशिका
शिकोहाबाद से अयोध्या तक का यह सफर अब सिर्फ एक बच्ची की यात्रा नहीं रह गया है। यह समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा बन चुका है। बच्चे हों या बड़े, हर कोई वंशिका के जज्बे को सलाम कर रहा है।
पहले भी दिखा बच्चों का ऐसा जज़्बा
गौरतलब है कि इससे पहले गाजियाबाद के छोटे भाई-बहन नंदिनी और युग ने भी स्केटिंग से गाजियाबाद से अयोध्या तक करीब 750 किलोमीटर का सफर सिर्फ सात दिनों में पूरा किया था। यह यात्रा सद्गुरु श्री रीतेश्वर जी महाराज के जन्मदिन के अवसर पर निकाली गई थी, जिसका समापन अयोध्या के नंदिनी नगर में हुआ।
वर्ल्ड रिकॉर्ड और आगे के सपने
नंदिनी और युग ने अपनी इस उपलब्धि को महाराज जी के चरणों में समर्पित किया। इस दौरान बृजभूषण शरण सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों की जमकर सराहना की। युग ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य गाजियाबाद से उज्जैन तक स्केटिंग कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है। साथ ही देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा स्केटिंग से करने का भी उनका संकल्प है।
नई पीढ़ी के लिए मिसाल
जिस उम्र में बच्चे मोबाइल और गेम में उलझे रहते हैं, उस उम्र में वंशिका, नंदिनी और युग जैसे बच्चे संस्कार, मेहनत और आस्था की मिसाल पेश कर रहे हैं। अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु भी इन बच्चों को देखकर दंग हैं। साफ है कि ये नन्हे कदम देश को एक नई दिशा दिखा रहे हैं।
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