Lata Mangeshkar: स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर की 6 फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया था, कम उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया और परिवार का पेट पालने के लिए कम उम्र में ही लता मंगेशकर ने काम करना शुरु कर दिया था, उन्हें भारत रत्न से भी नवाजा गया था, और उनके निधन पर राष्ट्रीय सम्मान दिया गया.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि लता मंगेशकर को स्वर सम्राज्ञी बनने का मौका देने वाले उनके गुरु कौन थे, जिनकी न केवल कम उम्र में दर्दनाक मौत हो गई थी बल्कि जब उनकी मेहनत की कमाई के पैसे देने के लिए उनकी पत्नी को ढूंढा गया तो वो मुम्बई के मलाड स्टेशन पर भीख मांगती मिली थी। आइये जानते है कि आखिर क्या दर्दनाक कहानी है लता मंगेशकर के गुरु जी की।
म्यूजिक कंपोजर खेमचंद प्रकाश
साल 1949 का समय था, लगा मंगेशकर ने गायकी शुरु की थी, लेकिन उन्हें वो संफलता हासिल नहीं हुई… लोग के लिए उन पर विश्वास करना थोड़ा कठिन हो रहा था, ऐसे में उन पर भरोसा जताने वाले थे मशहूर music composer खेमचंद प्रकाश। 1949 में जब फिल्म महल बनी तब लता मंगेशकर पर पूरा भरोसा करके खेमचंद प्रकाश ने लता मंगेशकर को ‘आयेगा आने वाला’ गाना गाने का मौका दिया था। खेमचंद को लता मंगेशकर के टेलेंट पर पूरा भरोसा था, और लता मंगेशकर ने उनके भरोसे में अपनी गायकी से चार चांद लगा दिया।
फिल्म महल के साथ साथ आयेगा आने वाला सोंग भी सुपर डुपर हिट हुआ, और लता मंगेशकर का करियर चल निकला। खेमचंद प्रकाश ने केवल लता मंगेशकर का ही नहीं बल्कि किशोर कुमार, मन्ना डे और नौशाद जैसे दिग्गजों के करियर को मजबूती देने में भी अहम भूमिका निभाई थी। ये गाना काफी समय तक चला था, लेकिन दुख की बात है कि अपने इस सुपरहिट गाने की सफलता देखने के लिए खेमचंद प्रकाश ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सकें थे। दरअसल लिवर सोराइसिस की वजह से खेमचंद का मात्र 42 साल की उम्र में ही 10 अगस्त 1950 को निधन हो गया था।
पत्नी मिली भीख मांगती
खेमचंद की मौत के बाद गाने के सुपरहिट होने के बाद जब फिल्म के मेकर्स खेमचंद की मेहनताना के बचे 13 हजार रूपय उनके परिवार तक पहुंचाने के लिए उन्हें ढूंढने निकले, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि खेमचंद अपनी दूसरी पत्नी श्रीदेवी के साथ अंतिम समय में रहा करते थे, लेकिन जब उन्हें पैसे देने के लिए खोजा गया तो उनका कुछ पता नहीं चला। काफी खोजबीन के बाद वो मुम्बई के ही मलाड स्टेशन पर भीख मांगती नजर आई थी।
जावेद अख्तर ने उठाया था मुद्दा
17 मई 2012 को राज्यसभा में अपनी पहली स्पीच में दिग्गज गीतकार और स्क्रीनराइटर जावेद अख्तर साहब ने खेमचंद प्रकाश की मौत के बाद उनके परिवार की स्थिति को लेकर सवाल उठाये थे। उन्होंने कहा भारत में क्रिएटिव प्रोफेशनल्स के लिए कॉपीराइट और रॉयल्टी फ्रेमवर्क में बहुत ज्यादा कमियां होने की बात उठाई थी। संगीतकारों, लेखकों और गायकों को ज्यादा पैसा नहीं मिलता और उनके पास ज्यादा जमा पूंजी नहीं होती है। इस कारण सरकार की तरफ से भी उन्हें क्रेडिट के तौर पर कुछ मदद करनी ही चाहिए..ताकि खेमचंद प्रकाश जैसे दिग्गज संगीतकार की मौत के बाद उनके परिवार को जिस तरह से भीख मांगनी पड़ी, वैसे किसी और कलाकार के परिवार के साथ न हो। हालांकि सिने जगत में गुमनाम कलाकारों की सुध अभी भी नहीं ली जाती है जो बेहद ही दुखद बात है।






























