2025 Entertainment Review: साल 2025 भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बनकर सामने आया। यह साल इसलिए खास रहा क्योंकि यहां न तो सिर्फ बड़े सितारों का जादू चला और न ही किसी एक जॉनर ने पूरे साल पर कब्जा जमाया। कभी ऐतिहासिक गाथाओं ने दर्शकों को बांधा, तो कहीं रोमांस ने दिलों में जगह बनाई। कहीं छोटे बजट की फिल्में चुपचाप बड़ा असर छोड़ गईं, तो कहीं बड़े सितारे भी दर्शकों को सिनेमाघर तक नहीं खींच पाए। फिल्मों और OTT दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट, प्रयोग और विविधता सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे। दर्शकों की पसंद साफ तौर पर बदली और उन्होंने वही अपनाया, जो उन्हें सच्चा, नया और दिल से जुड़ा लगा। कुल मिलाकर 2025 ने साफ कर दिया कि अब भारतीय सिनेमा की दिशा बदल चुकी है और दर्शक पहले से कहीं ज्यादा समझदार हो गए हैं। आईए अब 2025 का एंटरटेनमेंट रिपोर्ट कार्ड देखते हैं।
ऐतिहासिक शुरुआत और भावनात्मक कहानियों की वापसी (2025 Entertainment Review)
साल की शुरुआत लक्ष्मण उतेकर की पीरियड ड्रामा फिल्म ‘छावा’ से हुई, जिसने छत्रपति संभाजी महाराज के शौर्य, संघर्ष और बलिदान को प्रभावशाली अंदाज में पेश किया। फिल्म ने न सिर्फ इतिहास को नए सिरे से दर्शकों के सामने रखा, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी जबरदस्त शुरुआत दिलाई। करीब 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई के साथ ‘छावा’ ने यह भरोसा दिलाया कि अगर कहानी दमदार हो, तो ऐतिहासिक विषय आज भी लोगों को जोड़ सकते हैं।
इसके साथ ही रोमांस ने भी 2025 में शानदार वापसी की। ‘सैयारा’, ‘तेरे इश्क में’, ‘धड़क 2’, ‘मेट्रो… इन दिनों’ और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी फिल्मों ने भावनाओं, रिश्तों और टूटते-बनते प्यार की कहानियों से दर्शकों को फिर से सिनेमा हॉल की ओर खींचा।
आमिर खान का प्रयोग और एनिमेशन का नया अध्याय
2025 में आमिर खान ने एक बार फिर साबित किया कि वे जोखिम लेने से नहीं डरते। उनकी फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ को ओटीटी के बजाय यूट्यूब पर पे-पर-व्यू मॉडल के तहत रिलीज किया गया। यह फैसला चर्चा का विषय बना और धीरे-धीरे दर्शकों ने इस मॉडल को अपनाया भी। इस प्रयोग ने इंडस्ट्री को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि रिलीज के पारंपरिक तरीके ही अब एकमात्र रास्ता नहीं हैं।
इसी साल अश्विन कुमार की एनिमेशन फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने भारतीय एनिमेशन सिनेमा को नई पहचान दी। शानदार विजुअल्स, भारतीय पौराणिकता और आधुनिक तकनीक के मेल ने इसे हॉलीवुड की एनिमेटेड फिल्मों के मुकाबले खड़ा कर दिया। बच्चों के साथ-साथ बड़ों ने भी इसे खूब सराहा।
हंसी, अपराध और कोर्टरूम ड्रामा का संतुलन
कॉमेडी के मोर्चे पर ‘हाउसफुल 5’ और ‘दे दे प्यार दे 2’ ने दर्शकों को हल्का-फुल्का मनोरंजन दिया। वहीं क्राइम और कोर्टरूम ड्रामा में ‘रेड 2’ और ‘जॉली एलएलबी 3’ ने अपनी फ्रेंचाइजी को नए एंगल दिए।
ऐतिहासिक कोर्टरूम ड्रामा ‘केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग’ को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। फिल्म का विषय गंभीर था, लेकिन दर्शकों का जुड़ाव सीमित रहा। हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स में आयुष्मान खुराना की ‘थामा’ ने इस जॉनर को आगे बढ़ाया, जबकि स्पाई-एक्शन फिल्म ‘धुरंधर’ साल की सबसे तेज रफ्तार फिल्मों में शामिल रही।
साल का अंत रोमांटिक कॉमेडी ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ के साथ हुआ, जिसने साल को हल्के और सकारात्मक नोट पर खत्म किया।
500 करोड़ क्लब और बॉक्स ऑफिस की बड़ी तस्वीर
2025 में बॉक्स ऑफिस के आंकड़े भी कई मायनों में चौंकाने वाले रहे। ‘छावा’, ‘कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1’ और ‘धुरंधर’ तीन फिल्मों ने 500 करोड़ क्लब में जगह बनाकर इतिहास रच दिया। रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना की ‘धुरंधर’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 600 करोड़ से ज्यादा की कमाई की।
हिंदी सिनेमा में इस साल 14 फिल्में 100 करोड़ क्लब में शामिल हुईं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ आठ था। इससे साफ है कि दर्शक थिएटर तक लौटे, लेकिन चुन-चुनकर।
जब बड़े सितारे भी नहीं चला पाए जादू
2025 ने यह भी दिखा दिया कि स्टारडम अब सफलता की गारंटी नहीं है। ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर की ‘वॉर 2’ उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। ईद पर रिलीज हुई सलमान खान की ‘सिकंदर’ भी दर्शकों को लुभाने में नाकाम रही।
शाहिद कपूर की ‘देवा’, वरुण धवन-जाह्नवी कपूर की ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’, सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘परम सुंदरी’, काजोल की ‘मां’ और कंगना रनौत की ‘इमरजेंसी’ जैसी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर निराश किया।
इसके उलट छोटे बजट की ‘सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव’, ‘फुले’, ‘हक’, ‘सैयारा’ और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी फिल्मों ने सरप्राइज हिट बनकर सबको चौंका दिया।
फ्रेंचाइजी थकान और दक्षिण फिल्मों का सीमित असर
इस साल यह भी साफ दिखा कि फ्रेंचाइजी का पुराना जादू कमजोर पड़ रहा है। ‘सन ऑफ सरदार 2’, ‘बागी 4’, ‘मस्ती 4’, ‘किस किसको प्यार करूं 2’ जैसी फिल्मों ने यह संकेत दे दिया कि सिर्फ पुराने नाम अब दर्शकों को खींच नहीं पा रहे।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में ‘कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1’ और ‘महावतार नरसिम्हा’ को छोड़ दें, तो बाकी पैन-इंडिया फिल्मों का असर सीमित रहा। एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी फिल्मों ने 4639 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया, जो अन्य भाषाओं की तुलना में कहीं आगे रहा।
नए चेहरों की असली परीक्षा
2025 नए कलाकारों के लिए भी निर्णायक साल रहा। अहान पांडे और अनीत पड्डा ‘सैयारा’ से चर्चा में आए। इब्राहिम अली खान को शुरुआती ट्रोलिंग झेलनी पड़ी, लेकिन बाद में सुधार दिखा। आर्यन खान ने निर्देशन में कदम रखकर सबको चौंकाया, जबकि कुछ स्टार किड्स का डेब्यू खास असर नहीं छोड़ पाया।
ओटीटी का सुनहरा साल
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए 2025 बेहद सफल रहा। ‘दिल्ली क्राइम 3’, ‘महारानी 4’, ‘द फैमिली मैन 3’, ‘पाताल लोक 2’ और ‘द ट्रायल 2’ जैसी सीरीज ने दर्शकों को बांधे रखा। फीमेल लीड किरदारों का दबदबा खास रहा।
टीवीएफ की ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ और ‘पंचायत सीजन 4’ ने भी जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की।
कंटेंट ही बना असली सुपरस्टार
कुल मिलाकर 2025 ने साफ कर दिया कि अब भारतीय सिनेमा की असली ताकत कहानी, ईमानदारी और नए विचारों में है। बड़े नाम अब सिर्फ सहारा हैं, असली फैसला दर्शक कर रहे हैं। यह साल इंडस्ट्री के लिए एक साफ संदेश छोड़ गया अब वही फिल्म टिकेगी, जिसमें दिल और दिमाग दोनों की जगह हो।






























