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पंजाब में कांग्रेस के अंदर क्यों पड़ रही फूट? पूरे विवाद की आखिर जड़ क्या है? यहां जानिए सबकुछ…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 04 Jun 2021, 12:00 AM | Updated: 04 Jun 2021, 12:00 AM

पंजाब की राजनीति इन दिनों चर्चाओं में बनी हुई है। चुनाव से कुछ महीने पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ी हुई है। कांग्रेस पंजाब में अपनी पार्टी के अंदर ही फूट का सामना इन दिनों कर रही है। कई नेताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 

सीएम कैप्टन अमरिंदर और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जारी विवाद दिल्ली तक पहुंच गया। आज यानि शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दिल्ली में मल्लिकाअर्जुन खड़गे के नेतृत्व वाली कमिटी के सामने पेश हुए। वहीं इससे पहले पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और सिद्धू समेत दो दर्जन विधायक भी पैनल से मुलाकात कर चुके हैं। पंजाब में ये सबकुछ तब हो रहा है, जब राज्य में कुछ ही महीनों के बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। पंजाब की राजनीति में हो रहा ये विवाद क्या है, आइए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं…

दो गुटों में बंटे नेता

पंजाब की कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले दो खेमे में बंट चुकी हैं। एक गुट कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हैं, तो दूसरा उनके खिलाफ। कई नेताओं ने सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसमें सबसे ज्यादा मुखर नवजोत सिंह सिद्धू हैं। वो बीते कई दिनों से लगातार अपनी ही सरकार पर हमलावर हैं और सीएम पर निशाने साधते हुए नजर आ रहे हैं। सिद्धू मुख्यमंत्री पर बादल परिवार के लिए काम करने के आरोप भी लगा चुके हैं। 

सिद्धू ने अब क्यों खोला कैप्टन के खिलाफ मोर्चा?

वैसे तो सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच जारी घमासान कोई नई बात नहीं। इसकी शुरुआत तो 2017 में ही हो गई, जब कैप्टन अमरिंदर के नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव जीता और सरकार बनाई। वहीं 2019 में जब लोकसभा चुनाव तब भी सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच तनातनी देखने को मिली थीं। इसके बाद सिद्धू ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा तक दे दिया। 

अब एक बार फिर से सिद्धू, कैप्टन अमिरंदर सिंह के खिलाफ हमलावर हैं। वो इन दिनों बेअदबी कांड को लेकर सरकार पर खूब हमले बोल रहे हैं। ये कांड हुआ तो बादल सरकार के दौरान था, लेकिन इसकी असली जांच कांग्रेस के राज्य में सत्ता में आने के बाद ही शुरू हुई। कांग्रेस ने 2017 चुनाव के दौरान ये वादा किया था कि वो बेअदबी कांड की जांच कराने के लिए SIT का गठन करेगी और दोषियों को सजा दिलाएगी। लेकिन अप्रैल 2021 में इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने SIT रिपोर्ट को खारिज कर दिया। जिसके बाद मामले को लेकर सिद्धू अमरिंदर सिंह पर फिर निशाना साधने लगे। 

सिद्धू ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की खूब आलोचना की, जिसमें उनके पार्टी के अंदर कई लोगों का सपोर्ट भी मिला। हालांकि इससे कैप्टन खेमा नाराज हो गया। कैप्टीन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच का ये विवाद बढ़ता ही चला गया। एक इंटरव्यू में तो कैप्टन ने ये तक आरोप लगा दिए कि सिद्धू चुनाव के चलते कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी में जाना चाह रहे हैं और इसके लिए वो अरविंद केजरीवाल से बातचीत भी कर रहे हैं। 

प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर विवाद?

पंजाब के दो बड़े नेताओं के बीच इतना कुछ होता रहा और पार्टी अलाकमान ने इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया। अब जब फूट बढ़ गई है, तो चुनाव से पहले पंजाब के नेताओं के बीच जारी इस आपसी कलह को दूर करने की कोशिश में कांग्रेस जुटी हुई है। 

खबरें तो ये भी चल रही हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी सिद्धू को कोई बड़ा पद दे सकती हैं। कांग्रेस नेतृत्व सिद्धू को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर काबिज करना चाहते हैं, लेकिन कैप्टन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका ये मानना है कि इस पद पर किसी दलित वर्ग या फिर हिंदू समुदाय के शख्स को ही बैठना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में सीएम पद पर पहले से ही सिख समुदाय का कब्जा है। 

वहीं चुनाव से पहले सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता का फायदा उनको चुनावों में मिल सकता है, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह इसके भी विरोध में हैं। उनका तर्क है कि इस पद पर भी किसी दलित चेहरे को ही बैठाने से इसका फायदा चुनावों में मिल सकता है। 

खैर अभी तो पंजाब में कांग्रेस पार्टी के बीच अंदरुनी कलह जारी है। देखने वाली बात होगी कि ये तनातनी कब खत्म होती है और आने वाले चुनावों पर इस पूरे घटनाक्रम का क्या असर पड़ता है?

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