यूपी: गजब जुगाड़…बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई का गरीब कोटे में हुई नियुक्ति, तो उठने लगे सवाल, IAS ने भी ली चुटकी!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 23 May 2021, 12:00 AM | Updated: 23 May 2021, 12:00 AM

एक मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे में होना…ये सुनने में आपको थोड़ा अटपटा लग रहा होगा। आप सोच रहे होंगे कि किसी मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे में हो सकती है, लेकिन ऐसा सच में हुआ है उत्तर प्रदेश में। यूपी में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी को सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी, कपिलवस्तु का असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया। 

नियुक्ति पर उठे सवाल

अरुण द्विवेदी की नियुक्ति सवालों के घेरे में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर खूब चर्चाएं कर रहे हैं। सवाल उठ रहे है कि आखिर किसी मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे में कैसे की जा सकती है?

अरुण द्विवेदी को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी के पद पर नियुक्त किया गया। चयन के बाद अरुण द्विवेदी ने शुक्रवार से ही यूनिवर्सिटी में ज्वाइन किया। बता दें कि मंत्री सतीश द्विवेदी जिले की ही इटवा सीट से विधायक हैं।

एक दिन पहले कुलपति का कार्यकाल बढ़ाया गया

जानकारी के मुताबिक जिस विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति हुई, वहां के कुलपति का कार्यकाल एक दिन पहले ही बढ़ाया गया था। 21 मई को कुलपति सुरेंद्र दुबे का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, लेकिन 20 मई को एक दिन पहले सरकार ने उनका कार्यकाल नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक बढ़ा दिया। ऐसे में सवाल ये भी उठाए जा रहे हैं कि क्या कुलपति का कार्यकाल इस वजह से बढ़ाया गया, क्योंकि मंत्री के भाई की नियुक्ति करनी थी?

सोशल मीडिया पर ये मामला सुर्खियों में बना हुआ है और लोग इसको लेकर योगी सरकार पर तंज भी कसते नजर आ रहे हैं। रिटायर्ड IAS सूर्य प्रताप सिंह ने इसको लेकर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- “यूपी का गज़ब जुगाडू मंत्री-नियमों को तोड़मरोड़ कर, सगे भाई को बनाया असिस्टेंट प्रोफेसरl योगी जी को दिखाया अंगूठाl”

कुलपति ने सफाई में कहा ये…

वहीं जब इस मामले को लेकर विवाद बढ़ा और कुलपति से सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं मालूम था कि अरुण द्विवेदी मंत्री के भाई है। कुलपति सुरेंद्र दुबे ने बताया- “मनोविज्ञान में 150 के करीब आवेदन आए थे। मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों को चुना गया, जिसमें अरुण कुमार भी शामिल थे। इन 10 लोगों का इंटरव्यू हुआ, तब अरुण दूसरे नंबर पर रहे। इंटरव्यू, एकेडमिक और अन्य अंकों को मिलाकर वो पहले स्थान पर आ गए, जिसके चलते उनका चयन किया गया।”

कलपति ने कहा- “EWS का प्रमाणपत्र प्रशासन जारी करता है। शैक्षिक प्रमाणपत्र सही था। इंटरव्यू की वीडियो रिकार्डिंग भी मौजूद है। सोशल मीडिया के जरिए ये पता चला कि वो मंत्री के भाई हैं। अगर उनका EWS प्रमाणपत्रत्र फेक होगा, तो वो दंड के भागी होंगे।” वहीं इस पूरे मामले को लेकर मंत्री सतीश द्विवेदी ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। 

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