1989 का वो प्रस्ताव जिसमें बीजेपी ने पहली बार किया था राम मंदिर निर्माण का खुलकर समर्थन, जानिए…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 04 Aug 2020, 12:00 AM | Updated: 04 Aug 2020, 12:00 AM

दशकों तक चली लंबी लड़ाई के बाद अब आखिरकार राम मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी आ गई है. 5 अगस्त का दिन यादगार होने वाला है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला की नगरी अयोध्या पहुंचकर मंदिर निर्माण की नींव रखेंगे. पिछले साल दिए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता एकदम साफ हो गया था और अब 5 अगस्त को मंदिर का भूमि पूजन होने जा रहा है.

राम मंदिर का मुद्दा सिर्फ कानूनी ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक तौर पर भी कई मायनों में काफी अहम रहा. राम मंदिर आंदोलन ने देश की राजनीति की दशा और दिशा को पूरी तरह से बदलकर रख दिया. इस आंदोलन में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत कई नेताओं ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई. इसी आंदोलन से निकली भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज केंद्र ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की सत्ता पर भी विराजमान है.

लेकिन क्या आपके इसके बारे में जानते हैं कि आखिर कब पहली बार बीजेपी के एंजेंडे में राम मंदिर का मुद्दा शामिल हुआ था? आइए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं…

ये बात साल 1989 की है, जब हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में बीजेपी का अधिवेशन हुआ था. उस दौरान लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के अध्यक्ष थे. इसी अधिवेशन में राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ था, जिसके बाद से ये बीजेपी के घोषणापत्र में शामिल हो गया और अहम बिन्दु बन गया.

इसके बाद इसी साल जून में बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये फैसला लिया गया कि पार्टी अब राम मंदिर आंदोलन के लिए खुलकर समर्थन करेगी. वहीं इससे पहले तक विश्व हिंदू परिषद (VHP) इस आंदोलन का नेतृत्व किया करती थी. फिर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर 25 सितंबर 1990 को लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमवार से लेकर अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू की. इस दौरान लाखों कारसेवक आडवाणी के साथ अयोध्या रवाना हुए थे. 

23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में तत्कालीन लालू यादव सरकार ने रथ यात्रा को रोका और आडवाणी को हिरासत में ले लिया. आडवाणी की रथ यात्रा को रोके जाने के बावजूद लाखों कारसेवक अयोध्या के लिए कूच कर चुके थे. उस दौरान उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार सत्ता पर काबिज थी. उन्होनें कारसेवकों की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए थे.

इसके बाद 1991 के जुलाई में उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए तो बीजेपी के हाथों में सत्ता की चाबी लग गई. कल्याण सिंह यूपी के नए मुख्यमंत्री बने. वहीं केंद्र में कांग्रेस की सरकार आई और नरसिम्हा राव को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया. 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को गिरा दिया गया, जिसके बाद देशभर में दंगे भड़क गए.

वहीं इसके बाद कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उस दौरान कल्याण सिंह ने ये कहा था कि उनकी सरकार का मकसद पूरा हो गया और राम मंदिर के लिए सरकार की कुर्बानी देना कोई भी बड़ी बात नहीं है.

मंदिर आंदोलन से जुड़ने के बाद से ही बीजेपी का लगातार राजनीतिक उत्थान होता चला गया. साल 1996, 1998 और 1999 के चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. अटली बिहारी वाजपेयी की सरकार पहले 13 दिन, फिर उसके बाद 13 महीनों तक चली. इसके बाद आखिर में वाजपेयी साढ़े चार सालों के लिए देश के प्रधानमंत्री बने. वहीं 2004 में बीजेपी को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. साल 2014 में बीजेपी की दोबारा से सत्ता में वापसी हुई और लगातार दूसरी बार अब पूर्ण बहुमत हासिल कर सत्ता पर काबिज है.

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