भारत में स्थित इस मंदिर में मां लक्ष्मी के करें दर्शन, दूर हो जाएगी सभी आर्थिक समस्याएं!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 25 Jan 2021, 12:00 AM | Updated: 25 Jan 2021, 12:00 AM

कहते हैं जिसके पास पैसा और सिर पर धन की देवी मां लक्ष्मी का हाथ होता है उसका कोई बाल भी बाका नहीं कर सकता है. इसलिए हर किसी की ये ही इच्छा होती है कि उस पर मां लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहें. वहीं, अगर हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताए जहां जाने से आप मालामाल हो जाएंगे या यूं कहें कि आपकी लॉटरी लग जाएगी तो?

शायद आपको ये कोई मजाक लग रहा होगा या फिर फिजूल की बातें लेकिन ये बिल्कुल सच है. दरअसल, आज हम आपको भारत में स्थित एक 900 साल पुराने मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो वास्तुशिल्प शैली और श्रद्धालुओं के संकट दूर किए जाने के लिए मश्हूर है. आइए आपको उस मंदिर के बारे में विस्तार से बताते हैं…

यहां स्थित हैं मां लक्ष्मी का मंदिर

हम आपको मां लक्ष्मी के जिस मंदिर (Lakshmi Devi Temple) के बारे में बताने जा रहे हैं. वो कर्नाटक (Karnataka) के हसन से 16 किलो मीटर की दूरी डोदगादवल्ली (Doddagaddavalli) नामक गांव में स्थित है. इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां वाले सभी श्रद्धालुओं की इच्छा पूरी होती है और आर्थिक समस्या भी दूर हो जाती है.

होसाला काल से निर्मित है ये मंदिर

900 साल पुराने मां लक्ष्मी मंदिर को लेकर इतिहासकार का कहना है कि होयसल सम्राज्य के शासक विष्णुवर्धन के काल में 1113-14 में इस मंदिर का निर्माण हुआ था. ऐसा भी कहा जाता है कि ये मंदिर होयसल वास्तुशिल्प शैली (Hoysala Architecture Style) के काफी पुराने मंदिरों में से एक है.

दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं भक्त

इस मंदिर में विशेष तौर पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. होसाला काल के दौरान निर्मित 4 मंदिर वाली मंदिर शैली का ये मंदिर एकमात्र उदाहरण है. यहां पर देवी मां के दर्शन करने के लिए कई भक्त दूर-दूर से आते हैं.

इन देवी-देवताओं की भी हैं मूर्ति स्थापित

आपको बता दें कि ये मंदिर चारों दिशाओं में 4 कमरे बना हुआ है और बीच में एक केन्द्र से आपस में जुड़ा हैं. पूर्व की तरफ गर्भगृह में महालक्ष्मी विराजित हैं, उनके दाहिने हाथ में शंख और बाएं हाथ में चक्र है. देवी लक्ष्मी के दोनों तरफ 2 परिचारिकाओं की मूर्तियां हैं. इस मंदिर में नृत्यरत भगवान शिव, समुद्र देवता वरुण और भैंसे पर सवार यम की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं. जबकि उतरी कमरे में देवराज इंद्र की मूर्ति विराजमान है. इसके अलावा देवराज इंद्र का व्रज लेकर इंद्राणी भी वहां मौजूद हैं.

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