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क्यों सरकार हर फोन में डालना चाहती है Sanchar Saathi, और विपक्ष इसे ‘डिजिटल जासूस’ क्यों कह रहा?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 03 Dec 2025, 12:00 AM | Updated: 03 Dec 2025, 12:00 AM

Sanchar Saathi: देश में मोबाइल यूजर्स की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की एक नई पहल को लेकर सियासत तेज हो गई है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया है कि वे अपने नए हैंडसेट में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करें। जो फोन पहले से बाजार में उपलब्ध हैं, उन्हें यह ऐप अगले सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए देना होगा। इसके लिए कंपनियों को 90 दिन का वक्त दिया गया है और 120 दिन में इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

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लेकिन 28 नवंबर को जारी इस आदेश ने विपक्ष को हमलावर बना दिया है। उनका कहना है कि इस ऐप के बहाने नागरिकों की जासूसी की जाएगी। वहीं, सरकार साफ कह रही है कि यह पूरी तरह उपभोक्ता सुरक्षा का पैटफॉर्म है और इसे कोई भी यूजर अपनी मर्जी से हटा भी सकता है। तो आखिर मामला क्या है, ऐप कैसे काम करता है और विवाद क्यों इतना बढ़ गया? आइए पूरा मामला समझते हैं।

सरकार का आदेश: हर फोन में ‘संचार साथी’ पहले से इंस्टॉल होगा

सरकार ने निर्देश दिया है कि देश में बनने या आयात होकर आने वाले सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी ऐप पहले से मौजूद होना चाहिए। इतना ही नहीं, यह ऐप फोन सेटअप के समय बिना किसी प्रतिबंध के उपलब्ध हो इसके फीचर्स डिसेबल या लॉक नहीं होने चाहिएं। जो फोन पहले से बिक चुके हैं, उन पर कंपनियों से कहा गया है कि आने वाले अपडेट में इस ऐप को शामिल करने की कोशिश करें।

आखिर क्या है ‘संचार साथी’?(Sanchar Saathi)

दूरसंचार विभाग इसे एक citizen-centric प्लेटफॉर्म बता रहा है, जिसका उद्देश्य मोबाइल यूजर्स को सुरक्षित करना, धोखाधड़ी रोकना और सरकारी सुरक्षा पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह ऐप और वेब पोर्टल दोनों रूप में उपलब्ध है।

सरल भाषा में समझें तो संचार साथी तीन मुख्य कारणों से बनाया गया है:

1. साइबर फ्रॉड से बचाव

हाल के वर्षों में साइबर फ्रॉड और फर्जी कॉल्स की घटनाएं काफी बढ़ी हैं। ऐप में ऐसे कई टूल्स हैं जिनसे उपभोक्ता संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत कर सकते हैं।

2. फोन चोरी होने पर ट्रैकिंग में मदद

फोन चोरी या गुम होने पर यूजर ऐप में इसकी रिपोर्ट कर सकता है। इसके बाद साइबर सेल ब्लॉकिंग और ट्रैकिंग की प्रक्रिया शुरू करती है।

3. फोन का असली या नकली होना पहचानना

यह ऐप IMEI नंबर के जरिए पता लगाता है कि फोन असली है या नकली। नकली IMEI वाले फोन सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनते हैं और चोरी किए गए फोन की पहचान मुश्किल हो जाती है, इसलिए सरकार चाहती है कि हर यूजर आसानी से इसकी जांच कर सके।

IMEI की जांच क्यों जरूरी?

भारत में सेकेंड-हैंड मोबाइल का बड़ा बाजार है। कई बार चोरी हुए या ब्लैकलिस्टेड फोन फिर से बेचे जाते हैं। नकली IMEI वाले फोन सबसे बड़ी चुनौती हैं एक ही IMEI से कई- कई डिवाइस चल रहे होते हैं। ऐसे में असली चोरी हुए फोन को ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

संचार साथी ऐसे फोन की पहचान करने में मदद करता है और यूजर को बता देता है कि वह जिस डिवाइस का इस्तेमाल कर रहा है, वह ब्लॉक, प्रतिबंधित या असली IMEI वाला फोन है या नहीं।

अब तक कितने लोगों को मिला फायदा?

जनवरी 2025 में ऐप लॉन्च हुआ और अगस्त 2025 तक इसे 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका था। सरकार के आंकड़ों के अनुसार:

  • 37.28 लाख से अधिक चोरी/खोए फोन ब्लॉक किए गए
  • 22.76 लाख से अधिक फोन खोज निकाले गए
  • पोर्टल की मदद से 3 करोड़ से ज्यादा फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए
  • 3.19 लाख डिवाइस ब्लॉक
  • 16.97 लाख व्हाट्सएप अकाउंट बंद
  • 20 हजार से ज्यादा बल्क एसएमएस भेजने वाले नंबर ब्लैकलिस्ट

सरकार कहती है कि इन कार्रवाइयों से टेलीकॉम धोखाधड़ी पर काफी अंकुश लगा है।

तो फिर विवाद क्या है? विपक्ष क्यों नाराज़?

विवाद की असली वजह यह है कि सरकार ने कंपनियों को यह भी कहा था कि ऐप को डिसेबल या हटाया नहीं जा सके

विपक्ष के अनुसार ये ऐसा ऐप जिसे यूजर अनइंस्टॉल न कर पाए, वह निगरानी का औजार बन सकता है। कांग्रेस ने इसे ‘असंवैधानिक’ बताया है और कहा कि निजता का अधिकार खतरे में पड़ जाएगा। केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह नागरिकों की गतिविधियों, बातचीत और फैसलों पर नजर रखने जैसा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे “BIG BOSS सर्विलांस मोमेंट” कहा। विपक्ष की मांग है कि सरकार तुरंत यह आदेश वापस ले।

सरकार की सफाई “पूरी तरह वैकल्पिक है, चाहें तो डिलीट कर दें”

विपक्ष के आरोपों के बीच संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ किया कि ऐप पूरी तरह वैकल्पिक है यूजर चाहे तो इसे एक्टिवेट या डीएक्टिवेट कर सकता है। इतना ही नहीं, यह किसी भी अन्य ऐप की तरह डिलीट भी किया जा सकता है और सरकार का उद्देश्य सिर्फ यूजर सुरक्षा है, निगरानी नहीं

किरन रिजिजू ने भी विपक्ष को निशाना बनाते हुए कहा कि यह विवाद बिना वजह खड़ा किया जा रहा है और संसद में पहले से कई महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं।

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