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Hindutva in America: रटगर्स यूनिवर्सिटी में ‘हिंदुत्व’ पर बहस, पर हिंदू स्टूडेंट्स को ही किया गया नजरअंदाज़

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 30 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 30 Oct 2025, 12:00 AM

Hindutva in America: अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित रटगर्स यूनिवर्सिटी इन दिनों एक विवाद के केंद्र में है। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिक्योरिटी, रेस एंड राइट्स (CSRR) द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा ‘Hindutva in America: A Threat to Equality and Religious Pluralism’ ने हिंदू समुदाय और कई अमेरिकी सांसदों के बीच गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है। इस कार्यक्रम में हिंदुत्व को एक ऐसी विचारधारा बताया गया जो अमेरिका में मुसलमानों, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाती है।

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हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह आयोजन एकतरफा था और इसमें किसी सक्रिय हिंदू प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया। उनका मानना है कि इस तरह की चर्चा हिंदू छात्रों को असुरक्षित महसूस करवाती है और कैंपस के माहौल को और विभाजित कर सकती है।

सांसदों ने लिखा विरोध पत्र- Hindutva in America

इस कार्यक्रम से पहले ही अमेरिकी कांग्रेस के चार सांसदों ने रटगर्स प्रशासन को पत्र लिखकर गहरी चिंता जताई थी। इन सांसदों में स्टैनफोर्ड बिशप, सुहास सुब्रमण्यम, रिच मैककॉर्मिक और श्री थानेदार शामिल थे जिनमें से दो भारतीय मूल के हैं।
24 अक्टूबर को भेजे गए इस पत्र में सांसदों ने कहा कि यह कार्यक्रम “राजनीतिक रूप से प्रेरित” है और हिंदू छात्रों को अनुचित तरीके से निशाना बना सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि वह ऐसे आयोजनों के जरिए छात्रों में भय का माहौल न बनने दे।

10 हजार से अधिक ईमेल के जरिए विरोध

विरोध सिर्फ पत्र तक सीमित नहीं रहा। एक हिंदू वकालत समूह ने खुलासा किया कि 10,000 से ज्यादा छात्रों, अभिभावकों और समुदाय के लोगों ने विश्वविद्यालय को ईमेल भेजकर कार्यक्रम को “हिंदू-विरोधी” बताते हुए उससे दूरी बनाए रखने की मांग की।
समूह ने यह भी कहा कि पैनल में अमेरिका में हाल ही में बढ़ रहे हिंदू मंदिरों पर हमलों और घृणा अपराधों की अनदेखी की गई। केवल दिसंबर 2023 से अब तक सात हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं दर्ज की गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में हिंदू-विरोधी घटनाएं अब यहूदी-विरोधी हमलों के बाद दूसरे स्थान पर हैं।

‘झूठे दावे’ और प्रतीकों को लेकर विवाद

विरोध करने वाले समूहों ने पैनल के दौरान किए गए कुछ बयानों को “तथ्यों से परे और भ्रामक” बताया।
विशेष रूप से, कुछ वक्ताओं ने दावा किया कि नाज़ी हेकेनक्रूज़ (Hakenkreuz) और हिंदू स्वस्तिक एक जैसे प्रतीक हैं। इस पर कोहना (CoHNA) संगठन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि हिटलर ने अपने प्रतीक को कभी “स्वस्तिक” नहीं कहा, बल्कि “हेकेनक्रूज़” कहा था — इसलिए इस तुलना को बढ़ावा देना अनुचित है।

हिंदू छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन

रटगर्स यूनिवर्सिटी में हिंदू छात्रों ने पैनल स्थल के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
विश्वविद्यालय की छात्र वेबसाइट ‘द डेली टार्गम’ के अनुसार, कई फैकल्टी सदस्य भी छात्रों के समर्थन में शामिल हुए।
एक छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमें लगा जैसे कोई हमें भड़काने की कोशिश कर रहा है। कई साथी डर के कारण रैली में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि प्रशासन ने सुरक्षा की गारंटी नहीं दी।”
रटगर्स के हिंदू पुजारी हितेश त्रिवेदी ने भी कहा, “हम इस कार्यक्रम को रद्द करने की मांग नहीं कर रहे थे। हमारी बस यह अपील थी कि विश्वविद्यालय का नाम किसी हिंदू-विरोधी बयानबाजी से न जोड़ा जाए।”

पैनल की मेजबानी और प्रमुख वक्ता

इस चर्चा का संचालन रटगर्स लॉ स्कूल की प्रोफेसर और सामाजिक न्याय की विद्वान सहर अज़ीज़ ने किया, जबकि मुख्य वक्ता ऑड्रे ट्रुश्के, जो विश्वविद्यालय में इतिहास और एशियाई अध्ययन की प्रोफेसर हैं, ने हिंदुत्व के प्रभाव पर अपने विचार रखे।

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