चरण वंदना नहीं की इसलिए 13 साल में 21 ट्रांसफर ? आईपीएस प्रभाकर को कितना जानते हैं आप

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 03 Aug 2023, 12:00 AM | Updated: 03 Aug 2023, 12:00 AM

IPS Prabhakar Chaudhary Full Details in Hindi – हाल ही में बरेली में कांवड़ियों के पास अवैध हथियार मिलने और नशा करके झगड़ा करने का मामला सामने आया. मामले की संगीनता को देखते हुए वहां के एसएसपी प्रभाकर ने हालात पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन बातचीत से बात नहीं बनी. उसके बाद उन्होंने कांवडियों पर लाठीचार्ज करने का आदेश दे दिया. वहां का मामला तो सुलझ गया लेकिन अगले ही दिन एसएसपी प्रभाकर के तबादले की खबर आ गई. वैसे तो सीएम योगी के राज में किसी अधिकारी के तबादले की ख़बर कोई बड़ी बात नहीं है पर यह तबादला इस घटना के अगले ही दिन किया गया. ऐसे में शक की सुईयां दिमाग में अपने आप घुमने लग जाती है.

ऐसा भी नहीं है कि आईपीएस प्रभाकर का यह पहला या दूसरा तबादला हो , इनके 13 साल के सर्विस कार्यकाल में यह 21 वा ट्रांसफर हुआ है. वह किसी भी जगह पर 5-6 महीने से अधिक टिक नहीं पाए हैं. इस जांबाज का नाम आज तक किसी भी तरह के भ्रष्टाचार आदि मामलों में भी नहीं आया है लेकिन एक नहीं बल्कि कई बार उन्हें ‘कानून व्यवस्था’ बनाए रखने की भी सजा मिली है. उन्हें अब लखनऊ में 32वीं वाहिनी , PAC के सेना कमांडर के पद पर स्थानातंरण कर दिया गया हैं.

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कौन हैं आईपीएस प्रभाकर चौधरी?

प्रभाकर चौधरी 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वह मूलतः अम्बेडकर नगर, UP के रहने वाले हैं. इनके पिता का नाम पारस नाथ है. इन्होने पहले ही प्रयास में सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली थी. आईपीएस प्रभाकर की छवि किसी हीरो से कम नहीं है. वह जहां भी जाते हैं वहां की कानून व्यवस्था दुरुस्त हो जाती है.

आपको बता दें कि मेरठ का सोतीगंज मार्केट चोरी की गाड़ियों की स्क्रैपिंग के लिए बदनाम था. यहां 5 मिनट में गाड़ियां कट जाती थीं. देशभर के कई राज्य ऐसे थे, जहां से वाहन चोरी होकर मेरठ आते थे और सोतीगंज मार्केट में इनको काट दिया जाता था. छोटे वाहन पांच मिनट के अंदर तो बड़े वाहन 10 मिनट के अंदर काट दिए जाते थे. लेकिन अब सोतीगंज मार्केट में गाड़ियां नहीं कटती हैं. इसकी बड़ी वजह तब वहां के SSP रहे प्रभाकर चौधरी थे. प्रभाकर चौधरी ने सोतीगंज मार्केट के सिंडिकेट को ही तोड़कर रख दिया था. अब वहां पर किसी ने कपड़े की दुकान, फल की दुकान तो किसी ने जूते-चप्पल की दुकान खोल ली है.

ध्यान देने वाली बात है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से ठीक पहले मेरठ में एक स्पोर्टस यूनिवर्सिटी का शिलान्यास हुआ था. पीएम मोदी की जनसभा थी और उसी जनसभा में अपने संबोधन में पीएम ने कहा था कि मेरठ का सोतीगंज मार्केट, जहां कुछ ही समय में वाहन कट जाया करते थे, उस मार्केट को मेरठ के कप्तान (Prabhakar Chaudhary Full Details) ने बंद करा दिया, जो पिछले सरकार में खूब फल फूल रहा था. 2021 में आईपीएस प्रभाकर को मेरठ का एसएसपी बनाया गया था और उन्होंने कुछ ही महीनों में पूरे सिंडिकेट को मरोड़ कर रख दिया था. पीएम तक ने उनके काम की तारीफ की थी.

मेरठ के बाद उन्हें बरेली भेजा गया और बरेली में वह चार महीने पहले ही आए थे. लेकिन अब कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उनके द्वारा किए गए एक्शन को लेकर उन्हीं पर कार्रवाई हो गई. जब आईपीएस से उनके तबादले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तबादले को लेकर कुछ नहीं कहा. पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई वाले दिन कांवड़िए नशा करके झगड़ा कर रहे थे और उनके पास अवैध हथियार भी मिले थे.

ईमानदार, निष्ठावान और जमीन से जुड़ा अधिकारी

आपको बता दें कि आईपीएस प्रभाकर चौधरी (Prabhakar Chaudhary Full Details) को लोग उनकी ईमानदारी, काम के प्रति निष्ठावान और साधारण रहन सहन की वजह से पसंद करते हैं. किसी भी व्यक्ति के कामों को देख कर हम उसके व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है. जब 2021 में उनका तबादला मेरठ में हुआ था तो तबादला होते ही उन्होंने दो दिन की छुट्टी ली, मेरठ जाकर आम आदमी बनकर वहां का माहौल देखा, पुलिस व्यवस्था को देखा और उसके बाद चार्ज लिया.

इन्हें लेकर एक कहानी यह भी है कि जब इनका तबादला देवरिया से कानपुर हुआ तो आईपीएस प्रभाकर कानपुर में एसपी का चार्ज लेने पिट्ठू बैग टांगकर रोडवेज बस से एसपी दफ्तर पहुंचे थे. स्टेनो से कहा था कि मैं आ गया हूं, आप सरकारी सिम मुझे दें. स्टेनो ने हैरान होते हुआ पूछा कि आप कौन, जो सरकारी सिम मांग रहे हैं. तब उन्होंने अपना परिचय देते हुए बताया था कि मैं ही हूं नया एसपी प्रभाकर चौधरी.

आईपीएस प्रभाकर इसी किस्म के इंसान हैं. कानून व्यवस्था को ताक पर रखने वालों पर लगाम लगाना हो, माफिया को उनकी औकात दिखानी हो या फिर नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसना हो…आईपीएस प्रभाकर ने हर काम किया. हां ये बात जरुर है कि वह कभी किसी के दबाव में झुके नहीं और काम करते रहे. ऐसे में अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि 13 साल के करियर में उनका 21 ट्रांसफर क्यों हुआ है.

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