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बाबा साहबे के आंदोलनों में ‘चमार नामा’ के लेखक ने दिया था ‘जय भीम’ का नारा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Sep 2023, 12:00 AM | Updated: 14 Sep 2023, 12:00 AM

जय भीम का नारा किसने दिया – हम आपको बता दे कि दलित साहित्य से अभिप्राय दलित जीवन और उनकी समस्याओं पर लेखन को केंद्र मेव रखकर साहित्यिक आन्दोलन से है. दलितों को हिन्दू समाज की वर्ण व्यवस्था के सबसे निचले स्थान पर होने के कारण न्याय, शिक्षा , समानता और स्वतंत्रता आदि मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया है. उन्हें अपने ही धर्म में अछूतों माना जाता है. वैसे तो दलित साहित्य की शुरूआत मराठी से मानी जाती है. इसमें दलित पैंथर आन्दोलन के दौरान बड़ी संख्या ने दलित जातियों से आए. और अपनी रचनाओं से आम जनता तक अपनी भावना, पीडाओं , दुःख-दर्दो के बारे में लिखा, जिसमे लेखों,  कविताओं, निबन्धों, जीवनियों, कटाक्षों, कथाओं आदि के माध्‍यम से पहुंचाया. दलित साहित्य को उनके लेखको को हमारे देश के साहित्य में इतना सम्मान नहीं मिला है. जितना उन्हें मिलना चाहिए.

दोस्तों, आईये आज हम एक ऐसे ही दलित लेखक के बारे में बात करेंगे, जिसक नाम बिहारी लाल हरित है. जो खुद को अम्बेडकरवादी बताते है, उन्होंने अपनी लेखनी से दलित समाज के लिए आवाज उठाई है.

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दलित लेखक बिहारी लाल हरित

बिहारी लाल हरित का जन्म 13 दिसम्बर 1913 को एक दलित परिवार में हुआ था. इनका अछुवांत दलित की प्रारम्भिक रचनाओं को लिखने में लिया जाता है. दलित समाज के प्रसिद्ध नारे जय भीम भी दलित लेखक बिहारी लाल हरित लिखी गयी है. उन्होंने 1946 में, बाबा साहेब की जन्म दिवस पर दिल्ली के एक समाहरो में जय भीम का नारा दिया था. साथ ही एक कविता गई, जिसके बोल थे; “नवयुवक कौम के जूट जावै सब मिलकर कौम परस्ती में, जय भीम का नारा लगा करे भारत की बस्ती बस्ती में”.

दलित लेखक बिहारी लाल हरित अभियान के कवि थे. 1940 में एक प्रसिद्ध लेखक जिनम उपनाम बूम था, ने अपनी लघु कहानियों में दलित समाज की महिलाओं के खिलाफ आपतिजनक बातें लिखी थी. जिसके जवाब मे दलित लेखक बिहारी लाल हरित ने दलितों के लिए “चमार नाम” लिख कर बूम की बातों का जवाब दिया था.

इसके आलावा भी बिहारी लाल हरित ने कई किताबे लिखी, जिनकी वजह से वह दलित साहित्य के बादशाह कहलाये. हिन्दू दलित साहित्य में कई महाकाव्य रचे गए, जिनमें बिहारीलाल हरित कृत्य भीमआयन जग जीवन ज्योति कथा वीरांगना झलकारी बाई प्रसिद्ध है. इसी प्रकार 1940 से 80 के दशक में बाबा साहेब के आंदोलनों में उन्होंने अपने साहित्य से आंदोलनों का प्रचार प्रसार किया था. इन्होने अपनी साहित्य से समाजिक कुरतियो को मिटने का सन्देश दिया है. इनकी कोई भी रचना उठा कर देख लो सभी में सामाजिक कुरतियों के जागरूकता के बारे में लिखी गयी है. इन्हें हम दलित समाज के सम्मानीय लेखको में गिनते है इनकी विभिन्न रचनाये है.

  • भीमायण महाकाव्य
  • वीरांगना महाकाव्य बाई
  • जग जीवन ज्योति महाकाव्य
  • चमार नामा
  • सामुद्रिकों का बेताज बादशाह

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