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White Sikhs: पश्चिमी देशों में गूंज रहा सत श्री अकाल, अमेरिका में कैसे बढ़ा सिख धर्म का प्रभाव, कौन हैं ये गोरे सिख

Shikha Mishra | Nedrick News
AMERICA
Published: 17 Feb 2026, 08:11 AM | Updated: 17 Feb 2026, 08:11 AM

White Sikhs: आज जब भी दुनिया के किसी भी कोने में कोई आपदा आती है, तो जो संगठन सबसे पहले मदद के लिए आगे आते है, वो सिख संगठन ही होते है। खालसा एड जैसे संगठन तो ऐसे है जो दुनियाभर में फैली त्रासदी को झेलने वाले देशो में आर्थिक सहायता के साथ साथ बेसिक सुविधायें मुहैया कराते है… शायद इसी लिए इस संगठन को नोबेल पुरूष्कार तक के लिए नामांकित किया गया था। सिख धर्म की संस्कृति, परोपकार की भावना इतनी मजबूत है कि विदेशी लोग भी सिख धर्म की तरफ आकर्षित हो रहे है, जिसमें सबसे ज्यादा नाम 3HO मूवमेंट का जिक्र होता है,

सिख धर्म के प्रभाव के कारण अमेरिका में रहने वाले लोगो ने सिख धर्म को अपनाना शुरु कर दिया.. अपने इस लेख में हम अमेरिका में शुरु हुए 3HO मूवमेंट के बारे में जानेंगे, जिससे प्रभावित होकर सैकड़ो अमेरिकी गोरे नागरिक सिख धर्म में परिवर्तितत हो गए है।

क्या है 3HO मूवमेंट? What is the 3HO movement?

3HO, जिसमें 3 H का मतलब है – हेल्दी, हैप्पी, होली ऑर्गनाइज़ेशन, जिसे पूरी दुनिया में सिख धर्म ऑफ़ द वेस्टर्न हेमिस्फ़ेयर या फिर सिख धर्म इंटरनेशनल के नाम से भी जाना जाता है। 3HO  को 1969 में हरभजन सिंह खालसा ने शुरू किया थाहरभजन सिंह खालसा जिनका एक नाम “योगी भजन” भी है। इस संगठन को असल में सिख धर्म ब्रदरहुड के लिए स्थापित किया गया था, लेकिन इसकी गतिविधियो के लेकर ये काफी विवादित अमेरिकन ऑर्गनाइज़ेशन बन गया है। हालांकि 3HO एजुकेशनल ब्रांच का नाम है, जो इस धार्मिक मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए शुरु किया गया है।

खालसा अथवा निहंग सिखों का प्रतीक माना गया

3HO ऑर्गनाइज़ेशन असल में सिख धर्म की कुछ सख्त मान्यताओ के आधार पर चलता है। इसमें शामिल होने वाले लोगों के लिए मेडिटेशन, वेजिटेरियनिज़्म और योग, खासकर कुंडलिनी योग संस्कारों पर ध्यान दिया जाता है। इसमें शामिल होने वाले पुरुष और या महिलाएं, सभी पगड़ी पहनते है, जो कि असल में खालसा अथवा निहंग सिखों का प्रतीक माना जाता है, साथ ही ये लोग हमेशा सफेद कपड़े पहनते है। 3HO संस्था में योग, ध्यान और आध्यात्मिक के खुले विचारों को ताकत का सोर्स माना जाता है। सिख धर्म से जुड़े विचारो से ज्यादा इसमें खालसा से जुड़े नियमों को मानना अनिवार्य माना जाता है, जिसके तहत लैक्टो-वेजिटेरियन डाइट लेने और शराब, रिक्रिएशनल ड्रग्स और तंबाकू का इस्तेमाल सख्त मना है।

3HO ऑर्गनाइज़ेशन में शामिल हुए अमेरिकी

वर्न ए. डुसेनबेरी और पशौरा सिंह जैसे कई स्कॉर्लर्स ये मानते है कि 3HO और योगी भजन ने असल में सिख शिक्षाओं को वर्ल्ड रिलीजन के तौर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। इतना ही नहीं ये भी माना जाता है कि उनके प्रयासों से जो सिखो की एक छवि बनी हुई थी, जिसके अनुसार सिखों को सिर्फ़ भारत में एक जैसी हिस्ट्री वाली रेस के तौर पर पहचाना जाता था, उसकी सोच भी बदल गई। इतना ही नहीं अमेरिका में आध्यत्म को बढ़ावा देने का मामला गोरे लोगो में काफी प्रचलित हुआ और वो सिख धर्म की तरफ आकर्षित हुए।

साउथ एशियन एथनिक ग्रुप्स

गोरे अमेरिकन संस्था से जुड़ते गए, और इन्हें गोरा सिख कहा जाता है। ये सिख योगी भजन की 3HO परंपरा को मानते हैं, जो मूल भारतीय पंजाबी सिख परंपरा से अलग होती है। सिखों का किसी ओर धर्म में बदलना विरले ही होता है लेकिन सिंधियों और दूसरे साउथ एशियन एथनिक ग्रुप्स का झुकाव सिख धर्म के प्रति बढ़ा। आज सिख धर्म ग्लोबल धर्म बन गया है। 1970 के दशक की शुरुआत में योगी भजन के अधिकांश अनुयायी श्वेत, युवा और मध्यम वर्ग के थे।

जिन्होंने न केवल सिख धर्म को अपनाया बल्कि सिख धर्म को और करीब से जानने और उसकी शिक्षा को हासिल करने के लिए बच्चों को भारत भेजा करते है। गोरा सिख लोग नाम जप, कीर्त करो, और वंड छको के सिद्धांतों से प्रेरित होकर सिख बनते हैं। ये सिख पगड़ी पहनते है, सिख धर्म की संस्कृति को मानते है। 3HO के प्रभाव के कारण कई बड़ी हस्तियां है जो सिख धर्म के अनुयायी बन गए।

सिख संगठने से ही झेलनी पड़ती है आलोचना

हालांकि जहां बड़ी उपलब्धि होती है वहां विवाद भी खुद ही जुड़ जाते है। ऐसी ही इस संस्था के साथ भी हुआ। जनवरी 2020 में, योगी भजन की पूर्व सचिव पामेला सहारा डायसन ने एक मैगजीन में प्रेमका: व्हाइट बर्ड इन ए गोल्डन केज: माई लाइफ विद योगी भजन, नाम से एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें योगी भजन पर कई महिलाओं के साथ सैक्सुअल रिलेसनशिप होने का दावा किया गया था। इतना ही नहीं उनके कई करिबियों पर भी संगीन आरोप लगे थे। वहीं सिख इतिहासकार त्रिलोचन सिंह ने भी योगी भजन का अमेरिकी लोगो को सिख बनाने के लिए कुंडलिनी योग की जो शिक्षा अपनाने है वो ज्ञान वो कहां से लाये है, ये एक रहस्य है।

सिख संगठन 3HO को एक कल्ट संस्ता

अपनी किताब “सिख धर्म और तांत्रिक योग” में भी उन्होंने कहा कि मैंने कभी किसी तंत्र ग्रंथ में नहीं पढ़ी, और न ही किसी जीवित तांत्रिक विद्वान से सुना है। फिर वो किस तरह से लोगो को अपने ऊपर विश्वास दिलाते है. हालांकि इसी के साथ भारत के कई सिख संगठन 3HO को एक कल्ट संस्ता कहते हुए निंदा करते है। वहीं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व प्रेसिडेंट गुरुचरण सिंह तोहरा ने तो उन दावो को भी खारिज किया जिसमें हरभजन सिंह को सिरी सिंह साहिब की उपाधि देने का दावा किया गया था।

वहीं वैसे तो वहां सैक्सुअल एक्टिविटिज के लिए मनाही है लेकिन योग, तंत्र और भजन द्वारा सिखाई गई “सेक्सुअल प्रैक्टिस पूरी तरह से गलत और निषेध है। लेकिन गोरे लोगो को इस प्रेक्टिश के जरिए आध्यत्म सिखाया जाता है, जिससे वो सिख धर्म के प्रति आकर्षित हो रहे है। 3HO Movement असल में एक क्रांति है, जिसे भले ही भारतीय सिख स्वीकार न करते हो लेकिन इस मूवमेंट के कारण अमेरिका में गोरे सिखों का संख्या बढ़ी। सिख धर्म को एक अलग और बड़ी पहचान मिली… तमाम विवादों के बाद भी इस संस्था को आज भी वैश्विक तौर पर बड़ी पहचान मिली है, जिसे सिख धर्म को बड़े स्तर पर पहचान दिलाने का श्रैय भी जाता है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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