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जब इंदिरा गांधी की सभा में किसान ने छोड़ दिया था शेर, मजेदार है किस्सा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 02 Dec 2023, 12:00 AM | Updated: 02 Dec 2023, 12:00 AM

आज तक आपने बहुत अजीबो-गरीब बातें सुनी होंगी लेकिन जो बात आज हम आपको बताने जा रहे है, वैसी बात पहले कभी नहीं सुनी होंगी… सोचिये एक आदमी किसी से बदला लेने के लिए उसके पीछे एक जिन्दा शेर छोड़ देता है… सुनने में ये कोई फ़िल्मी सीन लगेगा लेकिन यह एक सच्ची घटना है. यह बात उस समय की थी, जब हमारे देश की प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी थी, जिनका हमारे देश की राजनीति में बहुत बड़ा रुतबा था. उस समय उनकी टक्कर में शायद ही कोई ओर नेता था. जब पूर्व प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी भाषण देती थी तो बहुत दूर-दूर से लोग उनके भाषण को सुनने के लिए आते थे.

आईए आज हम आपको पूर्व प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी के जीवन की एक रोचक घटना के बारे के बताएंगे, जिससे सुनकर आपको ये किसी मूवी का सीन लगेगा.

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यह बात 1974 में की है जब इंदिरा गांधी हरियाणा के दादरी में नेता रामचंद्र की चुनाव सभा में भाषण देने आई थीं… कहानी को शुरु से शुरू करते है. बिहारी सिंह बागी जो उस समय इंदिरा गाँधी एक बहुत करीबियों में से माने जाते थे. उन्होंने इंदिरा गाँधी से दादरी विधानसभा से कांग्रेस की टिकट मांगी थी. लेकिन इंदिरा गाँधी उस सीट पर एक मजबूत किसान नेता लाना चाहती थी. वैसे तो बिहारी सिंह बागी भी किसानों में काफी लोकप्रिय नेता थे लेकिन वह इंदिरा गाँधी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते थे.

इसीलिए इंदिरा गाँधी ने दादरी विधानसभा से रामचंद्र विकल को सीट दी, जो उस समय बागपत से सांसद थे. इंदिरा गाँधी ने उसे संसद रहते हुए ही उत्तर प्रदेश में कृषि मंत्री भी बनवाया था. जिसके बाद उसे दादरी के चुनावी में उतार दिया था. पूर्व प्रधानमन्त्री हर हाल में उन्हें जितना चाहती थी. जिसके चलते इंदिरा गाँधी हरियाणा के दादरी शहर में रामचंद्र की चुनावी सभा में भाषण देने गई थी.

दूसरी तरफ नाराज़ बिहारी सिंह बागी ने दादरी से विधानसभा के चुनाव में निर्दलीय उठ गए, जिसमे उनका चुनाव चिहन शेर था. बिहारी सिंह बागी ने इंदिरा गाँधी को मना किया था कि वह दादरी उस चुनावी सभा न जाएं लेकिन फिर भी इंदिरा गाँधी इस सभा में गई. जिसके बाद बागी गाजियाबाद के एक शर्क्स से 500 रुपए का शेर किराये पर ले आते है.

जब इंदिरा गाँधी दादरी में नेता रामचंद्र की चुनाव सभा में भाषण दे रही थी तो बीच में बागी ने आकर उस सभा में शेर को पिंजरे से छोड़ दिया. पूरा सभा में चिला-चिली मच गई थी. और मिनटों में पूरी सभा भाग खड़ी हुई. जिसके बाद थोरी देर में उस सभा से इंदिरा गाँधी भी चली गई थी. बागी ने इस हरकत से दिखा दिया था की उसका शेर कांग्रेस से किसी भी मामले में कम नहीं है.

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