Uttarakhand Disaster: 10 साल में 4654 लैंडस्लाइड, 12758 बार बाढ़, 1100 से ज़्यादा मौतें… पहाड़ पर कहर बरपा रही कुदरत

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 08 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 08 Aug 2025, 12:00 AM

Uttarakhand Disaster: उत्तराखंड, जिसे लोग श्रद्धा से ‘देवभूमि’ कहते हैं, वहां अब हर साल बरसात के मौसम में जैसे डर का मौसम भी उतर आता है। जहां एक ओर पहाड़ों की खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है, वहीं दूसरी ओर बारिश, भूस्खलन, बादल फटना, बिजली गिरना और बाढ़ जैसी आपदाएं जिंदगी पर आफत बनकर टूटती हैं। बीते 10 सालों में उत्तराखंड में जो हुआ है, वो सिर्फ आंकड़े नहीं हैं वो दर्द, डर और तबाही की कहानियां हैं।

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10 सालों की तबाही की तस्वीर- Uttarakhand Disaster

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि यहां हर साल कुदरत का कहर जारी है। साल 2015 से 2024 तक राज्य में:

  • 4654 बार भूस्खलन,
  • 92 बार एवलांच (हिमस्खलन),
  • 259 बार बिजली गिरी,
  • 67 बार बादल फटे,
  • और लगभग 12,758 बार तेज बारिश-बाढ़ जैसी घटनाएं दर्ज की गईं।

इन घटनाओं में लगभग 1000 से 1100 लोगों की जान गई है, जिसमें सबसे ज्यादा जानें भूस्खलन की वजह से गईं। अकेले लैंडस्लाइड ने ही 319 से ज्यादा जिंदगियां निगल लीं।

पौड़ी और उत्तरकाशी सबसे ज़्यादा प्रभावित

अगर जिलेवार बात करें तो सबसे ज़्यादा घटनाएं पौड़ी ज़िले में दर्ज़ हुई हैं। यहां 2040 भूस्खलन की घटनाएं हुईं। इसके अलावा:

  • पिथौरागढ़ – 1426
  • टिहरी – 279
  • चमोली – 258
  • चंपावत – 173
  • उत्तरकाशी – 80
  • रुद्रप्रयाग – 48
  • अल्मोड़ा – 30

उत्तरकाशी जिले ने भी बीते 10 सालों में काफी आपदाएं झेली हैं। यहां 1525 प्राकृतिक घटनाएं दर्ज़ की गईं जिनमें भूस्खलन, बाढ़, ओलावृष्टि, बादल फटना और जंगल की आग शामिल हैं।

1000 से ज़्यादा लोगों ने गंवाई जान

आपदा प्रबंधन विभाग और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 10 सालों में उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के चलते करीब 1000 से 1100 लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों में सबसे ज़्यादा यानी 35 से 40 प्रतिशत लोगों की जान भूस्खलन की घटनाओं में गई है। वहीं, 25 से 30 प्रतिशत मौतें बाढ़ और भारी बारिश की वजह से हुई हैं। इसके अलावा, 15 से 20 प्रतिशत मौतें बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) जैसी घटनाओं के कारण दर्ज की गई हैं।

अगर सिर्फ भूस्खलन की बात करें, तो अब तक 319 लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि एक सामान्य-सी लगने वाली बारिश भी पहाड़ों में कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। हर बरसात के साथ यहां के लोगों के सिर पर मौत मंडराने लगती है और कभी-कभी तो वो बचने का मौका भी नहीं देती।

05 अगस्त की त्रासदी: धराली और हर्षिल की दहशत

हाल ही में 05 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल में जो हुआ, उसने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया। बारिश के साथ आए मलबे ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देख हर कोई सहम जाता है।

सरकार का दावा: राहत के लिए हो रहा काम

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन का कहना है कि सरकार आपदाओं के असर को कम करने के लिए लगातार काम कर रही है। जहां-जहां बार-बार भूस्खलन हो रहा है, वहां ट्रीटमेंट वर्क कराया जा रहा है। साथ ही हर घटना पर नज़र रखी जा रही है ताकि भविष्य में उसका समाधान निकाला जा सके।

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