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सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक नांबी नारायण मामले में पांचों आरोपियों की जमानत की जब्त, जासूसी का था मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 02 Dec 2022, 12:00 AM | Updated: 02 Dec 2022, 12:00 AM

नांबी नारायण मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला 

साल 1994 के इसरो (ISRO) जासूसी मामले में वैज्ञानिक नांबी नारायण  (Nambi Narayanan) को कथित रूप से फंसाने के मामले से जुड़े अभियुक्तों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने झटका दिया है। अगर आपको इस मामले के बारे में नहीं पता है तो आपको  R Madhavan की Rocketry जरूर देखनी चाहिए। तब आपको पता चलेगा की कैसे कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए एक वैज्ञानिक नांबी नारायण को देश की जानकारियों को बेचने के आरोप में फंसा देते हैं। 

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पांचों आरोपियों की जमानत हुई जब्त 

इसी मामले में देश के सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और आईबी (IB) के पांच पूर्व अधिकारियों की जमानत खारिज कर दी है। केरल हाई कोर्ट ने इन पांचों आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के इसी आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस एमआर शाह की अगुवाई वाली पीठ ने जमानत याचिकाओं को केरल हाई कोर्ट वापस भेज दिया और यह आदेश भी दिया कि इसपर चार सप्ताह के भीतर फ़ैसला किया जाए। 

अग्रिम ज़मानत देने से जांच पर पड़ सकता है प्रभाव 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि इस मामले को  वापस हाई कोर्ट भेजा जाता है ताकि वह इस मामले के गुणदोष के आधार पर नए सिरे से फैसला कर सके। इस अदालत ने किसी भी पक्ष के लिए गुणदोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।  यह फैसला गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP), आर बी श्रीकुमार, केरल के दो पूर्व पुलिस अधिकारियों एस विजयन और टी. एस. दुर्गा दत्त और एक सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी पी एस जयप्रकाश को जमानत देने के आदेश के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अपील पर आया। सीबीआई का कहना था कि अग्रिम ज़मानत देने से जांच पर प्रभाव पड़ सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक नांबी नारायण मामले में पांचों आरोपियों की जमानत की जब्त, जासूसी का था मामला — Nedrick News

कौन थे डॉक्टर नांबी नारायण?

डॉक्टर नांबी नारायण इसरो के उन वैज्ञानिकों में शामिल थे जिन्होंने ISRO को विक्रम स्पेस इंजन दिया था। नांबी को 30 नवंबर 1994 को गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान को बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर उस समय के सरकार ने गोपनीय क़ानून (ऑफ़िशियल सीक्रेट लॉ) के उल्लंघन और भ्रष्टाचार समेत अन्य कई मामलों का आरोप लगाया था। इसके बाद 1996 में उन्हें जमानत मिली, और इसी साल सीबीआई ने उन्हें क्लीनचिट भी दे दी थी। नांबी को इसके लिए मुआवज़े के तौर पर 50 लाख रुपए दिए गए थे, और उन्होंने ग़लत तरीके से फंसाने के लिए केरल सरकार पर मुकदमा कर दिया था। 

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