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हिंदू धर्म से काफी अलग है बौद्ध धर्म में दाह संस्कार की प्रक्रिया, यहां जानें सबकुछ

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 22 Jun 2023, 12:00 AM | Updated: 22 Jun 2023, 12:00 AM

Cremation in Buddhism Details in Hindi – इंसान, जीव, पेड़ पौधे जिसका भी जन्म इस धरती पर हुआ है उसका मरना तय है और ये सच्चाई है और इस बात को कभी भी झुठलाया नहीं जा सकता हैं. जो पैदा हुआ है उसका मरना तय है. वहीं इंसानों में जिसने जिस भी धर्म के अनुसार जन्म लिया है और अगर वो जीवन भर उसी धर्म को अपनाता है तो मरने के बाद आखिर में उसका दाह संस्कार भी उसी धर्म के अनुसार होता है. कहते हैं सभी धर्म के अनुसार, आत्मा की मोक्ष प्राप्ति के लिए मृत शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है और अंतिम संस्कार प्रकिया सही से की जाने चाहिये वरना आत्मा की मोक्ष प्राप्ति नहीं होती है. वहीं इस पोस्ट एक जरिए हम आपको बताएंगे कि बौद्धों में दाह संस्कार कैसे होता है ?

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बौद्धों में दाह संस्कार कैसे होता है ?

जहाँ हिंदू धर्म में मृत शरीर का अंतिम संस्कार विधि विधान के साथ उसके शरीर को जलाकर किया जाता है और मृत शरीर के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सूर्यास्त से पहले की जाती है और मृत शरीर को आग के हवाले करने के बाद उसके शरीर की राख को अस्थियों के तौर पर जल में बह दिय जाता है. इसी के साथ मुस्लिम धर्म और इसाई धर्म में मृत शरीर को दफनाया जाता है तो वहीं बौद्ध धर्म में मृत शरीर को जलाकर या दफनाकर दोनों तरह से मृत शरीर को अंतिम विदाई दी जाती है.

cremation in buddhism
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बौद्ध धर्म में अपनाई जाती है दोनों प्रकिया  

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म में बौद्ध धर्म में मृत शरीर को जलाया भी जा सकता है और दफनाया भी जा सकता है. इस धर्म में दोनों ही परंपरा को मान्यता प्रदान की गई है. इस धर्म में अंतिम संस्कार की जो परंपरा है वो स्थानीय संस्कृति में चले आ रहे उसी रीति रिवाजों के अनुसार ही मृत शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है.

cremation in buddhism, बौद्धों में दाह संस्कार
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इस तरह निभाई जाती है सभी रस्म 

वहीं जब बौद्ध धर्म में शरीर का अंतिम संस्कार (Cremation in Buddhism Details in Hindi) किया जाता है, उस समय परिवार के लोग या फिर भिक्षु के सदस्य मृत शरीर के सामने प्रार्थना करते हैं. अगर बौद्ध धर्म में शरीर को जलाया जाने की प्रकिया को फॉलो कर रहे हैं तो शरीर को जलाकर इसके बाद अगले दिन संस्कारित अवशेषों को परिवार के लोग इकट्ठा कर अपने पास रख सकते हैं या फिर इसको किसी समर्पित भवन में रख सकते हैं साथ ही समुद्र में भी विसर्जित किया जा सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ जो लोग शरीर को दफनाने की प्रकिया अपना रहे हैं तो वो लोग सबसे पहले पार्थिव शरीर को ताबूत में रखते हैं और उसके बाद प्रार्थना करते हैं. इसके बाद फिर शरीर को किसी खास जगह पर दफना दिया जाता है.

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