Black के बाद अब White फंगस ने बढ़ाई टेंशन, पटना में मिले 4 केस…इस बीमारी के बारे में जानिए सबकुछ!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 20 May 2021, 12:00 AM | Updated: 20 May 2021, 12:00 AM

कोरोना महामारी का खतरा देश पर से टल नहीं रहा। इस बीच एक के बाद एक दूसरी बीमारियां भी टेंशन बढ़ा रही हैं। कोरोना वायरस के साए के बीच जहां ब्लैक फंगस की वजह से पहले ही दहशत का माहौल है। तो दूसरी ओर अब एक और नई बला ने परेशानी बढ़ा दी हैं। इसका नई टेंशन का नाम है व्हाइट फंगस। 

अब व्हाइट फंगस ने दी दस्तक

जी हां, ब्लैक फंगस तो पहले ही आम लोगों के साथ साथ सरकारों के लिए भी नई मुश्किल खड़ी कर दी हैं। इसके केस कई राज्यों में तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ लोग ब्लैक फंगस की वजह से अपनी जान तक गंवा बैठे। वहीं राजस्थान ने इस बीमारी को महामारी तक घोषित कर दिया। इस परेशानी से निपटने का काम चल ही रहा था कि इस बीच व्हाइट फंगस ने बिहार की राजधानी पटना में दस्तक दे दी। यहां व्हाइट फंगस के 4 मामले सामने आए है। 

शरीर के इन हिस्सों को पहुंचाता नुकसान

व्हाइट फंगस को ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। ये भी कोरोना की तरह फेफड़ों को संक्रमित करता है। व्हाइट फंगस शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे नाखून, स्किन, किडनी, ब्रेन, पेट, प्राइवेट पार्ट्स और मुंह के अंदर भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। 

इसे पहचान पाना इसलिए बेहद मुश्किल…

पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि चारों मरीजों में कोरोना जैसे ही लक्षण रदिख रहे थे। इन सभी के रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और RT-PCR तीनों ही टेस्ट किए गए, लेकिन रिपोर्ट सबमें नेगेटिव आई। बाद में पता चला कि मरीज व्हाइट फंगस से संक्रमित हैं। हालांकि राहत की बात ये रही कि ये चारों मरीज एंटी फंगल दवाएं देने से ठीक हो गए। 

कोरोना और व्हाइट फंगस में अंतर करना काफी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि जब मरीज का सीटी स्कैन किया जाता है, तब फेफड़ों में संक्रमण के जो लक्षण नजर आते है, वो कोरोना जैसे ही होते है। इस वजह से ऐसे मरीजों का रैपिड और RT-PCR टेस्ट नेगेटिव आता है। सीटी स्कैन में अगर कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और फंगस के लिए बलगम का कल्चर कराना चाहिए। ऐसा करने से व्हाइट फंगस की पहचान की जा सकती है। 

कौन लोग आ रहे इसकी चपेट में?

कोरोना के वो मरीज जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, वो इस फंगस के चपेट में आ सकते हैं। इम्यूनिटी कमजोर होने से व्हाइट फंगस का शिकार होने की संभावनाएं होती हैं। डायबिटीज, एंटीबायोटिक या फिर स्टेरॉयड का लंबा सेवन करने वालों को व्हाइट फंगस हो सकता है। 

वहीं कैंसर के मरीजों को भी इससे सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही नवजात में ये बीमारी डायपर कैंडिडोसिस के रूप में होती है। इसमें क्रीम कलर के सफेद धब्बे दिखने लगते हैं। छोटे बच्चों में ये ओरल थ्रस्ट करता है। वहीं महिलाओं में ये ल्यूकोरिया का मुख्य कारण है।

जानिए इससे बचने के तरीके…

व्हाइट फंगस से बचने के कई तरीके हैं। वो मरीज जो ऑक्सीजन सपोर्ट या फिर वेटिलेंटर पर हैं, उनके उपकरण खास तौर पर ट्यूब जीवाणु मुक्त होनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो ऑक्सीजन मरीजों के फेफड़ों में जाएं, वो फंगस मुक्त हो। ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर में स्ट्रेलाइज वाटर का इस्तेमाल करना चाहिए। 

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