Mini punjab in Goa: 15 अगस्त 1947 को भारत को अग्रेजों से आजादी मिली थी, और तब भारत के लोकतांत्रिक देश नहीं था बल्कि 562 रियासतों में बंटा हुआ था, लेकिन आजादी के बाद सरदार बल्लभ भाई पटेल ने देश को एकजुट करने के लिए सभी रियासतों को एक करने की मुहिम शुरू की थी। लेकिन क्या आप ये जानते है कि गोवा एक ऐसा राज्य है जो तब अंग्रेजों का नहीं बल्कि पुर्तगालियों के शासन ने था। और पुर्तगालियों से गोवा को आजादी 1961 के मिली थी, जिसके लिए एक बड़ा संघर्ष किया गया था।
गोवा के बारे में जानकारी
पुर्तगाली किसी हाल में गोवा छोड़ने के लिए तैयार नहीं था लेकिन फिर भी सिख सैनिकों की ताकत के आगे उन्हें झुकना पड़ा और यहीं से पहली बार गोवा की धरती पर सिख धर्म पहुंचा। अपने इस वीडियो में हम मौजूदा समय में गोवा में मौजूद सिख धर्म के बारे में जानेंगे, कैसे सिखों ने न केवल पुर्तगालियों को भारत की धरती से विदा किया बल्कि उन्होंने गोवा की धरती पर सिख धर्म की नींव भी रखी। मात्र 50 सालों में वहां सिख धर्म इतना मजबूत हो गया कि आज यहां कई सिख गुरुद्वारे मौजूद है। आइए जानते है कि क्या है सिख धर्म की कहानी गोवा में।।
गोवा भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित भारत का सबसे छोटा राज्य है, जिसकी क्षेत्रफल 3702 वर्ग किलोमीटर है। गोवा भारत का इकलौता ऐसा राज्य है जहां आज भी यूरोपियन संस्कृति का काफी प्रभाव है। जिसका कारण है करीब करीब 450 साल तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहना। गोवा की राजधानी पणजी है, वहीं गोवा की कुल आबादी 2025 के आकड़ो के अनुसार 1,593,000 के आसपास है।
गोवा में सिख धर्म शुरुआत
जब आप गोवा में सिख धर्म के फलने फूलमे की बात करते है तो ये इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। भारत की आजादी के बाद भी पुर्तगालियों ने गोवा पर से अपना शासन हटाने से इंकार कर दिया था तब भारत सरकार ने गोवा को भारत में विलय करने के लिए अपनी सेना को गोवा भेजा था। दिसंबर 1961 में “ऑपरेशन विजय” के तहत 17 दिसंबर 1961 को भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने गोवा, दमन और दीव की सीमाओं में प्रवेश किया इन सैनिकों में सिख सैनिकों की भी एक टुकड़ी थी। मात्र 3 दिन में पुर्तगाल के गवर्नर जनरल मैनुअल एंटोनियो वासलो डा सिल्वा ने घुटने टेक दिये और गोवा भारत के हाथों में आ गया।
आज के समय गोवा में सिखों की संख्या
इस दौरान सिख सैनिकों ने गोवा में ही रहने का फैसला किया और वो लोग पणजी, मोरमुगाओ, मारगाओ और मापुसा जैसे इलाके में बस गये। 2001 के आकड़ो के अनुसार गोवा में 970 सिख थे लेकिन वहीं 2011 में उनकी संख्या बढ़ कर 1473 हो गई थी, यानि की गोवा में सिखों की संख्या में बढ़ौतरी हो रही है। गोवा में सिखों के लिए एक विशेष भावना और स्थान है। वहां सिख समुदाय अपने कार्यों, लंगर और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए संगत सेवा को बढावा दे रहे है, जो कि आपसी भाईचारे और समानता के प्रतीक के रूप में लोगो के बीच प्रचलित है।
गोवा में सिखों की मजबूती ऐसी है कि वहां उनके जाने के कुछ समय बाद ही पहला सिख गुरुद्वारा गुरुद्वारा सिंह सभा जो कि वास्को दा गामा में बनाया गया, सिख संस्कृति और उनके मुल्यों को बढ़ावा देने के लिए निर्माण किया गया। इसके अलावा गुरूद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, पेन्हा डे फ्रांका में समुद्र के किनारे एक आध्यत्मिकता को बढ़ावा देने वाला गुरुद्वारा है। ये गुरुद्वारा पूरे गोवा में अपने शांत वातावरण और समुदायिक तौर पर सभी के लिए भोज करवाने के लिए प्रचलित है। इसके अलावा गुरुद्वारा 3 MTR एक ऐसा गुरुद्वारा है जहां सिख धर्म के अलावा अलग-अलग समुदाय की ज़रूरतों के हिसाब से ढलने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए खास तौर पर जाना जाता है।
गोवा की भव्यता और शांत माहौल
गोवा में होने वाले सभी सिख धर्म से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों को लेकर गुरुद्वारों में चर्चा की जाती है। सामुदायिक कल्याण और दान और सामाजिक सहायता के कामों में हिस्सा लेने के लिए गुरुद्वारे सभी समुदाय के लोगो को प्रोत्साहित करने का काम करते है। सिख त्योहारों के मौके पर गुरुद्वारे खास अरदास, कीर्तन दरबार और सामुदायिक भोज का आयोजन करते है जिसमें सभी धर्मों और समुदाय के लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है। गोवा में भले ही गुरुद्वारों की संख्या कम है लेकिन फिर भी यहां हर रोज सैकड़ो लोग आते है। यहां की भव्यता और शांत माहौल किसी का भी मन मोह लेती है। पणजी के बाद वास्को दा गामा में सिखों की आबादी है, जो कि गुरुद्वारों के आसपास ही मौजूद है।
समय के साथ सिख समुदाय यहां काफी संपन्न और मजबूत धर्म बनता जा रहा है। खासकर कोविड 19 महामारी के बाद गोवा के सिखों ने पीड़ितों की जो बढ़ चढ़ कर सेवा की, उसके बाद यहां के लोगो में सिखों की लोकप्रियता और तेजी से बढ़ी है। उनकी अपनी खास पहचान बन चुकी है। गोवा में सिख धर्म की कहानी आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।





























