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Mini Punjab in Assam: असम की गोद में बसता छोटा पंजाब, कामाख्या की धरती पर गूंजता सत श्री अकाल

Shikha | Nedrick News

Published: 17 Jan 2026, 06:00 AM | Updated: 17 Jan 2026, 06:01 AM

Mini punjab in assam: मौजूदा समय में भारत के कई पूर्वोतर राज्यों में से एक असम ऐसा राज्य है, जहां भारत के तेल के कुएं मौजूद है। असम, जहां की चाय दुनियाभर में फेमस है। जब भी आप असम का नाम लेते है तो चाय का स्वाद अपने आप ही आपके मुंह में आ जाता है.. असम जहां हिंदू धर्म के एक बहुत ही शक्तिशाली शक्तिपीठ मां कामाख्या का मंदिर है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु जाते है… असम में वैसे तो हिंदू बहुल है लेकिन हाल के कुछ दशकों में घुसपैठियों के कारण मुसलमानों की संख्या बढ़ी, लेकिन फिर भी एक तरफ जहां सरकार भी घुसपैठियों को बाहर खदेड़ने के लिए हर कोशिश कर रही है तो उन्ही के बीच एक ऐसा समुदाय है, जिसने असम में अपनी धार्मिक संस्कृति से खास जगह बनाई हुई है। जी हां, हम बात कर रहे है सिख धर्म की। असम में फैलते कट्टरपंथियों के बीच सिखों ने एक छोटी सी बस्तियां बसाई हुई है, जहां जाने के बाद आपको अहसास होगा कि आप पंजाब आ गए है..तो चलिए आपने इस लेख में हम असम में मौजूद मिनी पंजाब के बारे में जानेंगे, कैसे बसा असम में मिनी पंजाब।

असम का मिनी पंजाब

असम की राजधानी गुवाहटी से करीब 2335 किलोमीटर की दूरी पर बसा है एक छोटा सा क्षेत्र दुबरी.. जो यहां का पहला मिनी पंजाब कहलाता है। दुबरी, जहां सिख समुदाय सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी की उदासी के बाद से ही रह रहे है। दुबरी में रहने वाले सिख असल में आपको धर्म से तो सिख मिलेंगे, लेकिन उनकी परंपरा और रहन सहन पारंपरिक असमी ही है। यहां की औरते असम की प्रसिद्ध पारंपरिक परिधान मेखेला चादर पहनती है, वहीं यहां रहने वाले सिख पंजाबी भाषा नहीं बोलते बल्कि वो असमी भाषा ही बोलते है, जो उन्हें असम की परंपरा और संस्कृति के करीब रखता है।वहीं असम में एक इलाका और है जिसे दूसरा मिनी पंजाब कहा जाता है। इस स्थान का नाम है नागांव जिला।

सिखो का इतिहास करीब 200 साल पुराना

नागांव जिले के गांवों में सिखो का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। स्थानीय लोगो की माने तो यहां जो सिख समुदाय रहते है, वो मूल रूप से पंजाब से ही आते है। उनके पूर्वज शेर के पंजाब महाराजा रणजीत सिंह जी की सेना के सिपाही थे, जिसे अहोम राजा की मदद के लिए कि असम भेजे गए थे, क्योंकि असम के साथ महाराजा रणजीत सिंह जी के रिश्ते काफी बेहतर थे, और लड़ाई के दौरान सिख सैनिकों की मदद भी अहोम राजा के काम नहीं आई और वो हार गए। जिसके बाद भी सिख सैनिकों ने वापिस जाने के बजाय उस दौरान नए स्थान पर नगर बसाने का फैसला किया जंगल साफ किया और ज़मीन पर खेती की।

सिख धर्म के त्योंहारों और रीति रिवाजों

पंजाब पृष्ठभूमि से होने के कारण आज भी यहां रहने वाले सिख सिक्खी की परंपरा को पूरी तरह से बनाए रखते है, और गुरु ग्रंथ में पूरा विश्वास रखते हैं, लेकिन इन सिखों को भी पंजाबी नहीं आती है। ये लोग भी मूल असमी भाषा का इस्तेमाल करते है। हालांकि ये सिख मूल रूप से पंजाब के है लेकिन अब इन लोगो का पंजाब से कोई वास्ता नहीं है, लेकिन सिख धर्म का पालन करते है, असम के त्योंहारों को मनाने के साथ साथ ये सिख धर्म के त्योंहारों और रीति रिवाजों को मनाते है, हालांकि हाल के कुछ सालों में जो सिख पंजाब से असम गए है, वो लोग असमी सिखों को नकली सिख कहते है, क्योंकि उनका पंजाब से होने का कोई सबूत नहीं है।

गुवाहटी में गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा

बावजूद इसके नागांव जिले में रहने वाले सिख अपनी धार्मिक परंपरा का बखूबी पालन करते है। 2011 में हुई जनगणना के आकड़ो के अनुसार पूरे असम में करीब 20672 सिख रहा करते थे, जिनकी आबादी हाल के सालों में बढ़ी है। असम में मौजूद गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, जो कि धुबरी में स्थित है, यहां पर मजबूत होते सिख धर्म का जीवंत उदाहरण है, इसे खुद  नौवें गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी असम यात्रा के दौराम धुबरी आकर 17वीं सदी में स्थापना कराई थी, जिसे स्थानीय रूप से ‘दमदमा साहिब’ भी कहते हैं। वहीं गुवाहटी में गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा भी गुवाहटी में रहने वाले सिखों के बीच काफी प्रचलित है।

इस गुरुद्वारे की स्थापना 1914 में हुई थी, जो कि गुवाहटी का सबसे पुराना गुरुद्वारा है, जो कि पांच मंजिला इमारत है, इसके छत्र पर सोने का कलश लगा है, जिसमें बड़ा सा  लंगर हॉल, गेस्ट हाउस मौजूद है। सिख समुदाय अमूमन यहां पंजाबी ढाबा और छोटे मोटे व्यापार करते है, इन ढाबों में मिलने वाला खाना आपको पंजाब की धरती के करीब ले जाता है, जो सिख पंजाब से दूर है, वो इन ढाबों और खानो के जरिये पंजाब को करीब से समझ सकते है। इसके अलावा धनपुर में एक और गुरुद्वारा बनाया गया है गुरुद्वारा बरछा साहिब। जिसे गुरुनानक देव जी की यात्रा से ही जोड़ कर देखा जाता है। यहां मौजूद सिख गुरुद्वारे सिखों के लिए एक मजबूत आध्यात्मिक केंद्र है, जो सिखों की एकता और धार्मिक कट्टरता को दर्शाता है। असम के मिनी पंजाब की कहानी आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

Shikha

shikha@nedricknews.com

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